Wednesday, April 20, 2011

विश्व बैंक का पाकिस्तान को मदद से इंकार


अंतरराष्ट्रीय मदद के सहारे चल रही पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा है। अपनी खस्ताहाल अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए विश्र्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइएमएफ) से मदद मांगने गए पाकिस्तानी अधिकारी खाली हाथ लौट आए हैं। वहां के मीडिया ने यह जानकारी दी है। पाकिस्तान को मिलने वाली 11.3 अरब डॉलर (करीब 504 अरब रुपये) की मदद के पैकेज की आखिरी किस्त को लेकर विश्र्व बैंक के अधिकारियों ने उसे कोई आश्वासन नहीं दिया। मदद पैकेज के अंतर्गत पाकिस्तान को पांच किस्तों में अब तक 7 अरब डॉलर (312 अरब रुपये) की राशि दी जा चुकी है। मगर छठीं किस्त मई 2010 से अब तक लंबित है। क्यों रुकी वित्तीय मदद माना जा रहा है कि अर्थव्यवस्था सुधार के क्षेत्र में पाकिस्तान आइएमएफ द्वारा तय मानकों के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाया, इसलिए मदद रोकी गई है। अब पाकिस्तान के प्रति संदेह और पुख्ता हो गया है कि वह अंतरराष्ट्रीय मदद का इस्तेमाल अपने देश में सुधार कार्यक्रमों के बजाय आतंकवादी समूहों को पालने में करता है। अब क्या होगा पाकिस्तानी अखबार डॉन ने राजनयिक सूत्रों के हवाले से लिखा है, अगली किस्त के अधर में लटक जाने से आइएमएफ और पाकिस्तान द्वारा मिल कर बनाई गई परियोजनाओं पर आशंका के बादल मंडराने लगे हैं। इससे पहले पाकिस्तान ने संकेत दिया था कि वह अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से 3.2 अरब डॉलर (करीब 142 अरब रुपये) का नया कर्ज लेकर पुराने कर्ज जल्द से जल्द वापस लौटाएगा। जानकारों के अनुसार, पाकिस्तान अपनी तय सीमा की आधे से अधिक राशि आइएमएफ, व‌र्ल्ड बैंक और एशियन डेवलपमेंट से ले चुका है। मगर अब तक उसका आर्थिक प्रदर्शन काफी खराब रहा है। अब देखना यह है कि वो कब तक आइएमएफ को अगली किस्त जारी करने के लिए राजी कर पाता है। पाकिस्तान के पास तय समयसीमा में आइएमएफ द्वारा तय किए गए मानक लागू करने के लिए अब भी दो महीने का वक्त है। माना जा रहा है कि वह अगले महीने या जून की शुरुआत में अपने अगले प्रतिनिधिमंडल को वाशिंगटन भेजेगा।


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