पाकिस्तान की जेलों में लगभग 27 वर्ष की सजा काटने के बाद गुरुवार को रिहा होकर भारत पहुंचे भैणी मियां खान (गुरदासपुर जिला) के गोपाल दास (68 वर्ष) ने कहा कि वह देश सेवा के लिए पाकिस्तान गया था। दुख का विषय है कि वहां गिरफ्तारी के बाद पीछे उसकी व परिवार की सुध नहीं ली गई। अटारी सड़क सीमा पर पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, मुझे जासूस बनाकर भेजा गया था। मुझे बताया गया था कि यह देश सेवा है। इसी भावना से वह पाकिस्तान पहुंचा। बेशक मेरा मिशन अधूरा रहा। लेकिन सरकार पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले भारतीयों की कोई सुध नहीं लेती। गोपाल दास ने कहा कि उसे जीवन के 27 वर्ष देश सेवा के लिए पाकिस्तान की जेलों में काटे। उसे नया जीवन शुरू करना है। जीवन का यह सफर कैसा होगा, इसका निर्णय सरकार को करना है। उसने खुलासा किया कि इस समय कोट लखपत जेल में सुरजीत सिंह नाम के जासूस की सजा पूरी हुए 8 माह हो गए। लगभग 20 भारतीय वहां की जेलों में मानसिक संतुलन खो चुके हैं। इन 27 बरसों में उसने देखा कि लगभग छह भारतीय जासूस मौत के आगोश में चले गए। उसने यह भी बताया कि जो भारतीय सजा काट रहे हैं, उनमें अधिकतर टीबी के मरीज हैं। इनको दवा दी जाती है, मगर पर्याप्त नहीं होती। गोपाल दास ने भावुक होते हुए कहा कि किसी भी भारतीय को पाकिस्तान में जासूसी के लिए नहीं जाना चाहिए। सुरक्षा एजेंसियां व देश की सरकार पाकिस्तान जाने वाले भारतीयों का वारिस नहीं बनतीं। साथ ही कहा, मुझे पाकिस्तान जाने का कोई अफसोस नहीं। 1984 में गया था। वहां पकड़ा गया। इसके बाद परिवार के साथ केवल पत्र-व्यवहार से ही संपर्क रहा। मुझे कोई उम्मीद नहीं थी कि रिहा होकर भारत लौट पाऊंगा। छह दिन पूर्व ही मुझे बताया गया कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने रिहाई के आदेश जारी कर दिए हैं। देश के नेताओं पर बरसते हुए उसने कहा कि इन्हें केवल अपनी चिंता है। जासूसी में दोनों देशों के लोग जेलों में फंसे हुए हैं, जिनको तुरंत रिहा कर देना चाहिए। उसने अपने गांव में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जासूसी करते हुए वह कई बार पाकिस्तान आया-गया। वर्ष 1984 में 26- 27 जुलाई की रात में वह पाकिस्तान की फौज के हाथ आ गया|
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