अमेरिका में रह रहे भारतीय और चीनी मूल के प्रतिभाशाली लोग अब तेजी से स्वदेश वापसी कर रहे हैं। इससे इन दोनों देशों में 'उद्यमशीलता की लहर' चल पड़ी है। ड्यूक विश्वविद्यालय, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय और हार्वर्ड विश्वविद्यालय के सहयोग से कॉफमैन फाउंडेशन द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया कि मौजूदा रुख से अमेरिका को एक 'बड़ा नुकसान'
होने जा रहा है। 'स्वदेश वापसी करने वाले उद्यमियों के लिए वास्तव में भारत और चीन में घास अधिक हरी है' शीर्षक से जारी रपट में कहा गया है कि किसी समय 'प्रतिभा पलायन'
से लाभ उठाने वाली अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए यह उलटी गंगा बहने जैसा है। यह भारत और चीन के लिए दीर्घकाल में लाभप्रद होगा। यह रपट अमेरिका में ऐसे करीब 153 कुशल भारतीयों और 111 चीनी कामगारों के बीच कराए गए सव्रेक्षण पर आधारित है, जो स्वदेश वापसी कर चुके हैं। इनमें से करीब आधे लोगों ने कहा कि वे स्वदेश में अपनी कंपनी स्थापित करेंगे। अमेरिका से कितने कुशल कर्मचारी स्वदेश लौट चुके हैं, इस बारे में कोई ठोस आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। हालांकि रपट के लेखकों में से एक, विवेक वाधवा ने अनुमान व्यक्त किया कि पिछले दो दशक में 1,50,000 लोग भारत और इतने ही लोग चीन वापस लौट चुके हैं। रपट के मुताबिक, 'पिछले पांच साल में इस रुख में जबर्दस्त तेजी आई है और अब हर साल लाखों लोग स्वदेश लौट रहे हैं। ज्यादातर अधिकारी भी इन अनुमानों से सहमति जता रहे हैं।' वाधवा ने कहा, 'उदाहरण के तौर पर चीन के शिक्षा मंत्रालय का अनुमान है कि विदेश में शिक्षा हासिल करने के बाद 2009 में स्वदेश लौटने वाले चीनी लोगों की तादाद 1,08,000 रही, जो इससे पिछले साल के मुकाबले 56.2 प्रतिशत अधिक है। 2010 में यह संख्या बढ़कर अब तक के सर्वोच्च स्तर 1,34,800 पर पहुंच गई।'
वाधवा ने कहा कि कुशल आव्रजक अब 'झुंड' में अमेरिका छोड़ रहे हैं। यह इसलिए है क्योंकि भारत और चीन जैसे देशों में आर्थिक अवसर बढ़े हैं और लोग परिवार व मित्रों के नजदीक आना आना चाहते हैं। इसके अलावा अमेरिका की सख्त आव्रजन पण्राली भी लोगों को स्वदेश वापसी के लिए प्रेरित कर रही है। उन्होंने कहा, 'हम इसे चाहे प्रतिभा पलायन कहें या कुछ और, यह अमेरिका के लिए घातक है। अभी तक जो नवप्रवर्तन यहां हो रहा था, अब विदेश में होगा।' स्वदेश लौटने वाले 60 प्रतिशत से अधिक भारतीयों और 90 प्रतिशत चीनी मूल के लोगों ने कहा कि उनके देश में आर्थिक अवसरों की उपलब्धता उनकी स्वदेश वापसी का एक मुख्य कारण है।
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