Saturday, April 9, 2011

सालेह ने सत्ता छोड़ने संबंधी खाड़ी देशों के प्रस्ताव को ठुकराया


संकट में घिरे यमन के राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह ने खाड़ी देशों की योजना को खारिज कर अशांति के दौर से गुजर रहे देश को नए संकट में डाल दिया। इस बीच देश में हजारों लोग सरकार के समर्थन और विरोध में प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतर आए। खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) ने पेशकश की थी, जिसमें सालेह से कहा गया था कि वह अपने नायब को सत्ता सौंप दें। इसके बदले उनकी सुरक्षा की गारंटी दी जाएगी और उन्हें तथा उनके परिवार को देश से बाहर निकलने का मौका दिया जाएगा। सालेह ने जीसीसी के प्रस्ताव को यमन के मामलों में सीधा हस्तक्षेप करार दिया है। उन्होंने सना में सरकार समर्थक एक रैली में कहा, हम स्वतंत्र पैदा हुए हंै और हम निर्णय करने के लिए स्वतंत्र हैं। उन्हें हमारी इच्छाओं का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र, संविधान और हमारी आजादी के खिलाफ किसी भी सशस्त्र विद्रोह को हम खारिज करते हैं। उन्होंने कहा, हमारे लोगों ने मुझे सत्ता प्रदान की है न कि कतर या किसी और ने। सालेह के इस बयान से पहले यमन के विदेश मंत्री अबु बक्र अल कुर्बी ने कतर के प्रधानमंत्री शेख हमद बिन जासेम अल थानी द्वारा की गई पेशकश का स्वागत किया था। यमन में सालेह जब रैली को संबोधित कर रहे थे उसी समय वहां से करीब मील दूर हजारों लोग सरकार विरोधी प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों के हाथ में तख्तियां थी जिसमें सालेह से सत्ता से हटने को कहा गया था। अमेरिका ने एक अरब डालर के सहायता पैकेज पर लगाई रोक अमेरिका ने आतंकवाद निरोधक मुहिम के तहत यमन को दिए जाने वाले एक अरब के सहायता पैकेज पर रोक लगा दी है। दूसरी ओर यमन ने कहा कि वह अपने देश में कई महीनों से चल रहे संघर्ष को रोकने के खाड़ी देशों के प्रस्ताव पर गौर कर रहा है। अमेरिका यह मदद पैकेज इसलिए देने जा रहा था ताकि अरब प्रायद्वीप में अल कायदा के खिलाफ उसकी मुहिम में यमन के राष्ट्रपति अल अब्दुल्ला सालेह की मदद हासिल की जा सके। द वॉल स्ट्रीट जर्नल मे प्रकाशित खबर के मुताबिक सहायता पैकेज की आड़ में अमेरिका को उम्मीद थी कि उसके सैनिकों को यमन में आतंकवादियों को पकड़ने की अनुमति मिल जाएगी। सहायता पैकेज इसलिए स्थगित किया गया, क्योंकि यमन के विदेश मंत्री अबु बक्र अल कुर्बी ने कहा कि यमन सरकार उनके देश में संकट को खत्म करने के लिए खाड़ी सहयोग परिषद की पहल पर गौर कर रही है। इस समय देश में शांति स्थापित करना सबसे पहला कार्य है, इसलिए आतंकवाद पर बात में गौर किया जाएगा।


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