Wednesday, April 27, 2011

क्यूबा में बदलाव की हवा


राउल कास्त्रो राज्य की जिम्मेदारियों को नए सिरे से परिभाषित करते हुए कहते हैं कि इसका काम देश की सार्वभौमिकता बनाए रखना, अपराधों को नियंत्रित करना और गरीबी तथा हिंसा को दूर करना है। इसलिए आर्थिक विकेंद्रीकरण उन्हें आवश्यक लगता है, लेकिन इसका अर्थ पूंजीवाद व निजीकरण को बढ़ावा देना कतई नहीं है। ध्यान से देखा जाए तो राउल कास्त्रो का यह विचार साम्यवादी चीन के तजुर्बे से मेल नहीं खाता क्योंकि चीन में जब आर्थिक बदलाव हुए तो वहां पूंजीवाद का परोक्ष प्रभाव बढ़ा है। क्यूबा के बदलाव को इसी नजरिए से देखा जा रहा है, लेकिन राउल कास्त्रो ऐसी किसी आशंका को खारिज करते हैं..ब क्यूबा में राउल कास्त्रो ने देश की छठी कम्युनिस्ट कांग्रेस का उद्घाटन किया, तब किसी को यह अनुमान नहीं था कि वे भावी राष्ट्रध्यक्षों के लिए अधिकतम दस वर्षो का कार्यकाल निश्चित करने की बात करेंगे। उस कांग्रेस में केवल यही आश्चर्य सामने नहीं आया था, बल्कि अभी वैश्विक राजनीति में क्रांति, सत्ता परिवर्तन, दीर्घकालिक स्थायित्व और ईमानदार नेतृत्व की मिसाल बने साम्यवादी देश क्यूबा में कुछ और परिवर्तन दुनिया को अचरज में डालने वाले साबित होने थे। क्यूबा का मित्र राष्ट्र और फिदेल कास्त्रो के करीबी वेनेजुएला में ह्यूगो शावेज वर्ष 1999 से सत्ता संभाले हुए हैं और वर्ष 2012 को आगामी छह वर्षो के लिए फिर सत्ता संभालने को तैयार हैं। अरब देशों में दो-तीन दशकों से सत्ता संभाले राष्ट्राध्यक्षों, सैन्य तानाशाहों के खिलाफ जनता सड़कों पर उतर आई है और नेतृत्व परिवर्तन की मांग कर रही है। ऐसे में यह सवाल उठना जायज है कि जनांदोलन या विपक्षी दलों के हमलों के बिना क्यूबा में नेतृत्व की समयसीमा तय करने की घोषणा करने की कौन सी जरूरत आन पड़ी? राउल कास्त्रो ने अपने आप ही प्रस्थान बिंदु घोषित कर दी। जबकि उनके बड़े भाई और अब तक क्यूबा में साम्यवाद की कमान संभालते आए फिदेल कास्त्रो ने कम्युनिस्ट पार्टी के मुखिया का पद छोड़ते हुए इसकी कमान राउल कास्त्रो को ही सौंप दी है। नेतृत्व में परिवर्तन के साथ ही क्यूबा अपने आर्थिक ढांचे में फेरबदल के लिए भी तैयार हो रहा है। फरवरी 2008 में फिदेल कास्त्रो से सत्ता संभालने के बाद राउल कास्त्रो ने संकेत दिए थे कि वे बड़े पैमाने पर आर्थिक व ढांचागत बदलाव लाएंगे और अब ऐसा लग रहा है कि वे इसे पूरी तरह अमल में लाने को प्रतिबद्घ हैं। क्यूबा में अब आम जनता को घर व कार खरीदने व बेचने का अधिकार देने का कानून बन रहा है, साथ ही सरकारी लीज पर किसानों को जमीन देने की भी तैयारी चल रही है। पहले फैसले से जहां क्यूबा के आंतरिक बाजार में भारी बदलाव देखने मिलेगा, वहीं दूसरा फैसला लागू होने से जमीन मालिकों की संख्या बढ़ेगी, जो वर्ष 1959 की क्रांति के बाद बेहद कम थी। इन फैसलों के पीछे सरकार पर बोझ कम करने का इरादा बताया जा रहा है। ज्ञात हो कि क्यूबा में 90 प्रतिशत कार्य सरकार द्वारा प्रदत्त है। इसका अर्थ है कि सरकार पर वेतन देने का बोझ बना हुआ है। अगले पांच वर्षो में 90 प्रतिशत सरकारी कर्मचारियों को घटाकर 65 प्रतिशत तक लाने का इरादा है। 

राउल कास्त्रो राज्य की जिम्मेदारियों को नए सिरे से परिभाषित करते हुए कहते हैं कि इसका काम देश की सार्वभौमिकता बनाए रखना, अपराधों को नियंत्रित करना और गरीबी तथा हिंसा को दूर करना है। इसलिए आर्थिक विकेंद्रीकरण उन्हें आवश्यक लगता है, लेकिन इसका अर्थ पूंजीवाद व निजीकरण को बढ़ावा देना कतई नहीं है। यह ध्यान रहे कि साम्यवादी चीन में जब आर्थिक बदलाव हुए तो वहां पूंजीवाद का परोक्ष प्रभाव बढ़ा है। क्यूबा के बदलाव को इसी नजरिए से देखा जा रहा है, लेकिन राउल कास्त्रो ऐसी किसी आशंका को खारिज करते हैं। हालांकि वहां की जनता में कांग्रेस की घोषणाओं के बाद मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने मिली हैं। लोग प्रसन्न हैं कि अब उनके वित्तीय प्रबंध में राज्य का सीधा दखल नहीं रहेगा, लेकिन इसके साथ सशंकित भी हैं कि राज्य का नियंत्रण कम होने से उनका आर्थिक भविष्य कैसा होगा? रहा सवाल नेतृत्व परिवर्तन का, तो क्रांति के पांच दशक बाद अब तक वहां नई पीढ़ी का मजबूत नेतृत्व तैयार नहीं हुआ है। राउल कास्त्रो स्वयं अगले वर्ष 80 साल के होने जा रहे हैं। फिदेल कास्त्रो पहले ही अपने स्वास्थ्य के कारण मुख्यधारा से हट गए हैं। ऐसे में क्यूबा में स्थायित्व बनाए रखने, अमेरिकी दबाव से स्वतंत्र नीतियां बनाने, अर्थव्यवस्था की बदलती परिभाषाओं के अनुरूप देश को तैयार करने और आर्थिक संकट से बचाने के लिए युवा नेतृत्व की पंक्ति तैयार होना बेहद जरूरी है। कास्त्रो बंधु क्यूबा को इस क्रांति में कैसे सफल करते हैं यह देखने वाली बात होगी।

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