Friday, April 1, 2011

पूरी रफ्तार से दौड़ेगी वार्ता की गाड़ी


क्रिकेट कूटनीति की पिच पर भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों की मुलाकात ने दोनों देशों के बीच वार्ता की रेलगाड़ी फुल स्पीड में आगे बढ़ाने की तैयारी कर दी है। पाक प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी के मुताबिक दोनों देशों के बीच जुलाई में विदेश मंत्रियों की बैठक से पहले आठ स्तर की वार्ता होगी। जुलाई में दोनों विदेश मंत्रियों की हर मुलाकात के साथ विश्वास बहाली के कुछ नए कदमों का एलान करते जाएंगे। पाक प्रधानमंत्री को विदा करने से पहले मीडिया कैमरों से रूबरू मनमोहन सिंह और यूसुफ रजा गिलानी ने अच्छी शुरुआत का नारा बुलंद किया। मनमोहन का कहना था कि दोनों मुल्कों में चाहे जो मतभेद हों लेकिन हमें उनको सुलझाने का रास्ता ढूंढ़ना होगा। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि वह और उनके पाकिस्तानी समकक्ष गिलानी द्विपक्षीय संबंधों के सुधार के रास्ते में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने के लिए हर ईमानदार प्रयास करेंगे। वहीं मनमोहन की मौजूदगी में कैमरे के आगे समग्र वार्ता प्रक्रिया बहाली पर गिलानी के धन्यवाद ने मुंबई आतंकी हमले के बाद से रुकी कवायद को फिर शुरू करने पर मुहर लगा दी। भारतीय खेमे ने मनमोहन के पाक दौरे पर सकारात्मक रुख दिखाया है। हालांकि फैसला नतीजों को तौलने के बाद होगा। अगली शिखर मुलाकात से पहले आने वाले चार महीनों में पूर्व जल संसाधन सचिव जहां सिंधु जल बंटवारे और किशनगंगा परियोजना जैसे विवादों के तार सुलझाने की कोशिश करेंगे। सियाचिन मामले के निपटारे की कोशिश को आगे बढ़ाना रक्षा सचिवों की बैठक के एजेंडे पर होगा। इसके अलावा नियंत्रण रेखा के आर-पार व्यापार रियायतें बढ़ाने का एलान भी संभव है। हालांकि जानकार भारत-पाक मेल-मिलाप की ताजा कोशिशों में खासे एहतियात सलाह देते हैं। भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के पूर्व अतिरिक्त निदेशक बी रामन कहते हैं कि इस कवायद को पटरी से उतारने को आमादा तत्वों को लेकर सावधानी जरूरी है। साथ ही दोनों मुल्कों को विश्वास बहाली के लिए तय पायदानों पर भी गति बढ़ानी होगी ताकि विश्वास बहाली की कोशिशों पर ठोस नतीजों की मुहर लग सके। वैसे भारत-पाक वार्ता के इतिहास में विश्वास बहाली की कोशिशें अक्सर सीमा पार प्रायोजित आतंकी हमले से ही लड़खड़ाई हैं। 2008 में दोनों देशों के बीच जारी समग्र वार्ता प्रक्रिया पर ब्रेक भी मुंबई हमले ने ही लगाया था। साथ ही लाहौर बस से लेकर आगरा शिखर बैठक तक हुई कई कवायदें के चेहरे पर आतंकवादी हमलों के भी घाव हैं|

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