Sunday, April 17, 2011

भारत-कजाखिस्तान के बीच तेल और परमाणु समझौता


भारत और कजाखिस्तान ने अपने पुराने रिश्तों को और मजबूत करने के लिए शनिवार को सात नए समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इन महत्वाकांक्षी योजनाओं में नागरिक परमाणु कार्यक्रम और तेल के क्षेत्र में हिस्सेदारी प्रमुख हैं। इस बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह चीन और कजाखिस्तान के दौरे के बाद स्वदेश रवाना हो गए। इससे पहले उन्होंने कजाखिस्तान के राष्ट्रपति नूरसुल्तान नजरबाएव से मुलाकात की। सिंह ने कहा, यहां सहयोग की काफी संभावनाएं हैं, जो 2009 मे नजरबाएव के भारत दौरे के बाद की स्थितियों को मजबूत करने की दिशा में काफी सहायक हैं। सिंह और नजरबाएव के बीच हुई बातचीत में दोनों देशों के बीच गैर तेल क्षेत्र, जैसे दवा और सूचना एवं तकनीक के क्षेत्र मेंद्विपक्षीय व्यवसाय में विविधता लाने पर काम करने का निर्णय लिया गया। दोनों ने खाड़ी देशों के संकट पर भी विमर्श किया। दोनों देशों ने शांतिपूर्ण परमाणु उर्जा के प्रयोग, परमाणु ईंधन की आपूर्ति, परमाणु पावर प्लांट का संचालन, यूरेनियम के साझा खनन, वैज्ञानिक शोध का आदान-प्रदान, स्वास्थ्य के लिए विकरण तकनीक का इस्तेमाल और परमाणु रिएक्टर की सुरक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर किए। नजरबाएव ने भारत को 2100 टन यूरेनियम की आपूर्ति करने की घोषणा भी की है। उल्लेखनीय है कि भारत और कजाखिस्तान 2009 से नागरिक परमाणु समझौते पर काम कर रहे हैं। न्यूक्लियिर पावर कार्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीएल) ने कजाख न्यूक्लियर कंपनी कजएटमप्रोम के साथ नजरबाएव के भारत दौरे के समय एक करार किया था, जिसके तहत उसने भारतीय परमाणु रिएक्टर के लिए यूरेनियम की आपूर्ति का वादा किया था। नए समझौते में हाइड्रोकार्बन क्षेत्र को शामिल किया गया है, जिसके तहत ओएनजीसी विदेश लिमिटेड कैस्पियन सागर के सतपायेव तेल शोधक में 25 प्रतिशत का हिस्सेदार बनेगा। दोनों देशों ने आतंकवाद और मादक पदार्थों की तस्करी पर नियंत्रण के लिए साझा कानूनी सहायता संधि पर भी हस्ताक्षर किए। 2011 से 2014 के बीच सभी परियोजनाओं की रूपरेखा तय करने के लिए एक संयुक्त कार्य योजना के गठन की बात कही गई। प्रधानमंत्री ने कहा, हमने अस्ताना के यूरेशियन विश्वविद्यालय में एक संयुक्त सूचना तकनीक केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा है। उन्होंने कहा, भारत कजाखिस्तान के साथ अपने संबंधों को विशेष तवज्जो देता है। यहां दोनो ही देशों के लिए काफी संभावनाएं हैं। नजरबाएव ने कहा, वर्तमान में द्विपक्षीय व्यापार वास्तविक क्षमता तक नहीं पहुंच पाया है, हमारी रुचि इसे और बढ़ाने की है।


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