Sunday, April 10, 2011

अफरीदी,गोपालदास और परवेज मुशर्रफ


गाजी खान, गोपाल दास और शाहिद अफरीदी या परवेज मुशर्रफ। किसकी बात की जाए। डेरा गाजी खान इस बार तालिबानियों के निशाने पर था। बम विस्फोट कर दिया यहां के प्रसिद्ध सूफी संत सैयद अहमद सखी सरवर की दरगाह में। 48 से ज्यादा लोग मारे गए। विस्फोट के बाद तालिबान ने जिम्मेवारी ले ली। सखी सरवर पाकिस्तान के साथ-साथ भारतीय पंजाब में भी काफी लोकप्रिय हैं और इनसे संबंधित कई दरगाहें भारतीय पंजाब में भी हैं। तालिबान ने कहा कि सूफी दरगाह एंटी इस्लाम के केंद्र हैं। यहां पर जो कुछ भी नृत्य संगीत होता है, वो हिंदू परंपरा है, जिसका इस्लाम में विरोध है। अरब का बहावी आंदोलन भी इसका विरोध करता है। किस्मत अच्छी थी कि एक आत्मघाती 14 साल का बच्चा पकड़ा गया। लेकिन बच्चा इतना खतरनाक था कि वह पुलिस थाने में भी कह रहा था कि मौका मिलने पर फिर सुसाइडल बम का धमाका करेगा। आखिर अब पाकिस्तान किस तरफ जा रहा है? अमेरिकी कांग्रेस में ओबामा की गोपनीय रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ जो कुछ करना चाहिए था, वो नहीं हुआ। हालात काफी नाजुक हैं और आम पाकिस्तानी भी अब इन आतंकियों से सुरक्षित नहीं है। पाकिस्तान में सूफी संतों की दरगाह इस समय तालिबान के निशाने पर हैं। सबसे पहले लाहौर के प्रसिद्ध दाता दरबार पर हमला हुआ। इसके बाद फिर अब्दुल्ला शाह गाजी के मजार पर कराची में आत्मघाती हमला हुआ। लेकिन तालिबानी यहां भी नहीं रुके। प्रसिद्ध संत शेख फरीद के पाक पटन स्थित दरगाह पर भी उन्होंने हमला कर दिया। अब डेरा गाजी खान की सूफी दरगाह पर हमला हुआ। आम पाकिस्तानी इस समस्या को समझते हैं। लेकिन वे भी मजबूर हैं। जैसे शाहिद अफरीदी। शाहिद अफरीदी ने मैच हारने के बाद भारत की संस्कृति और पाकिस्तान की संस्कृति को एक ही बताया था। कहा था कि भारत से इतनी दुश्मनी क्यों। दोनों मुल्क तो एक जैसे ही हैं। लेकिन पाकिस्तान की धरती पर उतरते ही टोन बदल गया अफरीदी का। कहा, भारतीय छोटे दिल के होते हैं। उनसे साठ साल से बातचीत की जा रही है, लेकिन वो दगा देते हैं। यह टोन पूरी तरह से मिल्रिटी की टोन थी। यही टोन कुछ आईएसआई की होती है। कहते हैं कि भारतीयों से दोस्ती संभव नहीं है। हालांकि बताया जा रहा है कि अफरीदी ने कट्टरपंथियों के दबाव में भारत विरोधी बयान दिया। उन पर देवबंदियों का दबाव था कि वे भारत विरोधी बयान दें। देवबंदी मौलाना उनके खिलाफ हो गए थे- भारत समर्थक बयान देने के लिए और दोनों मुल्कों की संस्कृति एक बताने के लिए। हालांकि फिर एक बार शाहिद ने पलटी मारी और कहा कि वे टीवी चैनल के प्रोग्राम को ध्यान से देखेंगे कि उन्होंने क्या कहा था। अब बात परवेज मुशर्रफ साहब की। इस समय लंदन में रहते हैं और खूब नोट कमाते हैं। एक लेक्चर का एक लाख डालर तक चार्ज कर रहे हैं। कभी अमेरिका में स्पीच देते हैं तो कभी जर्मनी में। हालांकि उनकी स्पीच में क्या होता है, यह लोगों को समझ में नहीं आता। कभी कहते हैं कि कश्मीर समस्या वो सुलझाने के करीब थे, तो कभी कहते हैं अटल बिहारी वाजपेयी ठीक नहीं थे। लेकिन अब उनकी समस्या बढ़ गई है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरून ने पाकिस्तानी नेताओं को कहा है कि अगर पाकिस्तानी अथारिटी उनका प्रत्यर्पण चाहेगी तो ब्रिटिश सरकार सहयोग करेगी। पिछले दिनों कैमरून इस्लामाबाद के दौरे पर थे। उन्होंने वहां पर आसिफ अली जरदारी और यूसुफ रजा गिलानी से बातचीत के दौरान कहा कि वे मुशर्रफ को सौंपने के लिए तैयार हैं। गौरतलब है कि मुशर्रफ के खिलाफ अब गैर-जमानती वारंट जारी हो चुका है। वे बेनजीर भुट्टो हत्याकांड में पाकिस्तानी कोर्ट में वांछित हैं। संघीय जांच एजेंसी ने बेनजीर भुट्टो हत्याकांड में उन्हें आरोपी बना दिया है। अब मुशर्रफ साहब अपने बचाव का रास्ता ढूंढ़ने में लग गए हैं। हालांकि अभी भी प्रत्यर्पण इतना आसान नहीं है, क्योंकि पाकिस्तानी सरकार के एजेंसियों को अपने ही मुल्क में रुकावट झेलनी पड़ेगी। क्योंकि सेना में बहुत बड़ा नेटवर्क मुशर्रफ का है, जो मुशर्रफ को जेल जाने से रोकने की कोशिश करेगा। खुद आर्मी चीफ परवेज कयानी नहीं चाहते हैं कि मुशर्रफ जेल जाएं, क्योंकि अगर एक पूर्व आर्मी चीफ का यह हाल चुने हुए नेता कर देंगे तो कल को कयानी का भी यही हाल हो सकता है। यह मानसिकता पाकिस्तानी सेना में काफी जोरदार है। वह अपने किसी भी अधिकारी को जेल जाते नहीं देख सकती है। हालांकि आसिफ अली जरदारी कुछ न कुछ अपनी तरफ से खेल कर रहे हैं। जुल्फिकार अली भुट्टो की फांसी की सजा संबंधी केस को दुबारा खोलने संबंधी रेफरेंस सुप्रीम कोर्ट को भेज उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से सेना को ही चुनौती दी है। हालांकि इसे जुडिशियल कीलिंग बता जरदारी ने फाइल भेजी है और कहा कि इस केस को दुबारा खोला जाए, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से यह हमला सेना पर ही है। क्योंकि भुट्टो को फांसी बेशक न्यायलय ने दी थी, लेकिन न्यायलय का रिमोट कंट्रोल उस समय के सैन्य तानाशाह जनरल जिया उल हक थे। इसकी जानकारी सेना चीफ परवेज कयानी को है। अब बात गोपाल दास की। गोपाल दास पिछले 27 साल से कोट लखपत जेल में बंद था। भारत के गुरदासपुर का रहने वाला गोपाल दास गलती से 1984 में सीमा पार कर गया था और उसे पाक रेंजरों ने जासूसी के आरोप में जेल में डाल दिया। गोपाल दास की रिहाई गुरुवार को हो गई और वो भारत लौट आया। गोपाल दास की रिहाई भारतीय सुप्रीम कोर्ट की अपील पर की गई।

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