आर्थिक क्षेत्र में तेजी से विकास कर रहे भारत और चीन जैसे देश विश्व में गरीबी कम करने में बड़ी भूमिका निभाएंगे। विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइएमएफ) की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2015 तक विश्व में गरीबी का स्तर आधा हो जाएगा। इसमें भारत और चीन की सबसे अधिक भागीदारी होगी। विश्व बैंक और आइएमएफ की ग्लोबल मॉनीटरिंग रिपोर्ट 2011 : इंप्रूविंग द ऑड्स ऑफ अचीविंग द एमडीजी शीर्षक वाली रिपोर्ट के मुताबिक, दो तिहाई विकासशील देश अत्यधिक गरीबी और भूख से निपटने में सक्षम होने के कगार पर हैं। गुजरी वैश्विक आर्थिक तंगी के बावजूद विकासशील देश वर्ष 2015 तक गरीबी को आधा करने के लक्ष्य के काफी करीब हैं। इस क्षेत्र में भारत और चीन जैसे देशों का धन्यवाद। रिपोर्ट ने आंकड़ों के आधार पर कहा, भारत में 1990 में प्रतिदिन 1.25 डॉलर (लगभग 55 रुपये) की आय वाले व्यक्तियों की संख्या 51.3 प्रतिशत थी, जो 2005 में घटकर 46.6 प्रतिशत रह गई। 2015 तक यह संख्या 22.4 प्रतिशत होने का अनुमान है। इसी तरह चीन में 1990 के 60 प्रतिशत की तुलना में 2015 में यह संख्या 4.8 प्रतिशत तक हो सकती है। रिपोर्ट में यह कहा गया है, दुनिया भर में 1990 में एक अरब 80 करोड़ और वर्ष 2005 में एक अरब 40 करोड़ व्यक्ति की तुलना में 2015 में प्रतिदिन 1.25 डॉलर (लगभग 55 रुपये) की आय वाले व्यक्ति की अनुमानित संख्या 88 करोड़ 30 लाख हो जाएगी। विश्व बैंक के डेवलपमेंट प्रॉस्पेक्ट के अध्यक्ष हैंस टिमर ने रिपोर्ट पर टिप्पणी करते हुए कहा, मिलेनियम डेवलपमेंट गोल (एमडीजी) को हासिल करना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन विकासशील देशों में गरीबी को कम करने और स्वास्थ्य सुधार के लिए अभी बहुत कुछ करने की जरूरत है। 45 प्रतिशत विकासशील देशों की स्वच्छता संसाधन तक पहुंच नहीं है, 39 प्रतिशत मातृ मृत्यु दर और 38 प्रतिशत बाल मृत्यु दर पर काबू पाने में नाकाम हैं। आइएमएफ के स्ट्रैटेजी, पॉलिसी एंड रिव्यू के उप निदेशक ह्यूज ब्रेडेनकैंप ने कहा, निम्न आय वाले देशों में निजी क्षेत्रों में रोजगार को बढ़ाने की नीतियों को बनाने की चुनौती सबसे अधिक है। रिपोर्ट में निम्न आय वाले देशों को अंतरराष्ट्रीय बाजार के साथ जोड़े जाने के लिए कदम उठाए जाने की बात भी कही गई है। सात बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की होगी निगरानी भारत सहित दुनिया की सात सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की खामियों की पहचान और उन्हें दूर करने के लिए जी-20 देशों के वित्त मंत्री एक नया निगरानी तंत्र स्थापित करने पर सहमत हुए हैं। जी-20 देशों के वित्त मंत्रियों और अधिकारियों की बैठक के बाद जारी एक संयुक्त बयान में इस नए तंत्र का उल्लेख किया गया है। यह तंत्र इन संबंधित देशों को विदेशी व्यापार असंतुलन और सरकारी कर्ज में अत्यधिक वृद्धि की अवस्था में सुधारात्मक कार्रवाई के लिए प्रेरित करेगा।
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