भारत-चीन के रिश्तों में हाल के कुछ वर्षो में बढ़ी खटास से भारत ही नहीं बल्कि चीन भी चिंतित है। चीन इस पर गंभीरता से विचार कर रहा है। सान्या में ब्रिक्स देशों की शिखर वार्ता में भाग लेने के गए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और चीन के राष्ट्रपति हू जिनताओ के बीच तकरीबन 50 मिनट की द्विपक्षीय बातचीत में दोनों देशों ने सहमति जताई कि द्विपक्षीय व्यापार को वर्ष 2015 तक 100 अरब डॉलर तक पहुंचाया जाएगा, लेकिन चीन के पक्ष में झुका व्यापार संतुलन भारत के लिए चिंता का विषय है। जो भी हो, इस बातचीत ने दुनिया की सबसे बड़ी और उभरती पड़ोसी अर्थव्यवस्थाओं के बीच मजबूत और मधुर संबंधों की संभावनाएं प्रबल हुई हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन ने बैठक के बाद कहा कि भारतीय प्रधानमंत्री ने चीनी राष्ट्रपति से गर्मजोशी भरे और दोस्ताना मुलाकात की। इसमें भारतीय औषधियों, सूचना प्रौोगिकी और कृषि उत्पादों के लिए चीन के बाजार को और खोले जाने की बात कही गई। मनमोहन और जिनताओ की मुलाकात यहां शेरेटन बीच रिजॉर्ट पर हुई। यह बातचीत ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अंतरराष्ट्रीय संगठन की तीसरी शिखर वार्ता की पूर्व संध्या पर संपन्न हुई। इसे कूटनीतिक नजरिए से काफी महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है क्योंकि चीन ने इस मंच को हाल के वर्षो में काफी महत्व दिया है और इसके मंचों से की गई घोषणाएं निभाने की उसने गंभीरता से कोशिश भी की है।
मेनन ने संवाददाताओं से कहा कि दोनों नेताओं ने आपसी कारोबारी रिश्तों की समीक्षा की और इस बात पर विश्वास जताया कि दोनों देश पिछले साल तय किए गए 100 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य को हासिल करने के रास्ते पर हैं। मनमोहन सिंह ने चीन के पक्ष में बढ़ते व्यापार संतुलन का भी जिक्र किया। वर्ष 2010 में दोनों देशों के बीच 60 अरब डॉलर का व्यापार हुआ। आपसी व्यापार में चीन ने भारत को 20 अरब डॉलर अधिक मूल्य का निर्यात किया। इससे पहले वर्ष 2009 में चीन ने भारत को 16 अरब डॉलर अधिक निर्यात किया था। चीन ने इस बात को गंभीरता से लिया और भारत से आयात बढ़ाने का भरोसा दिलाया।
मनमोहन सिंह ने औषधि, सूचना प्रौोगिकी और कृषि उत्पादों के बाजार में खुलापन लाकर इस असंतुलन को कम करने का सुझाव दिया जिसका चीन ने विरोध नहीं किया। राष्ट्रपति हू जिनताओ ने कहा कि असंतुलन का मुद्दा उन्हें भी परेशान करता रहा है। वे इसका समाधान तलाशने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि नई प्रणाली की कमान अधिकारियों को सौंपी जाएगी। इसके तहत दोनों देशों के बीच सीमावर्ती क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी। यह विचारनया है और दोनों पक्ष इसकी बारीकियों पर काम कर रहे हैं। मेनन ने बेहिचक यह स्वीकार किया कि हू के साथ प्रधानमंत्री की द्विपक्षीय बातचीत की यह सबसे बड़ी उपलब्धि रही। मनमोहन सिंह और चीनी राष्ट्रपति की मुलाकात में केंद्रीय वाणिज्य और उोग मंत्री आनंद शर्मा तथा चीन में भारतीय राजदूत एस जयशंकर भी मौजूद थे।
इससे वार्ता के पहले ब्रिक्स देशों के व्यापार मंत्रियों की भी एक बैठक हुई। इस समूह के देशों ने बुधवार को व्यापार मंत्रियों की बैठक में चीन से मांग की कि वह उनके मूल्य वद्र्घित उत्पादों की अधिकाधिक खरीदारी करे। इस मांग में भारतीय औषधियों का खास तौर से उल्लेख किया गया। शर्मा के मुताबिक, चीन के वाणिज्य मंत्री चेन देमिंग ने वादा किया कि ब्रिक्स देशों से मूल्य वद्र्घित उत्पादों की खरीदारी को तरजीह दी जाएगी। शर्मा बैठक के तुरंत बाद संवाददाताओं से बात कर रहे थे। उन्होंने बताया कि ब्राजील और भारत ने चीन से उसकी मुद्रा की कीमत कम करने को लेकर भी शिकायत की, जिसका द्विपक्षीय व्यापार पर नकारात्मक असर होता है।
मेनन ने संवाददाताओं से कहा कि दोनों नेताओं ने आपसी कारोबारी रिश्तों की समीक्षा की और इस बात पर विश्वास जताया कि दोनों देश पिछले साल तय किए गए 100 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य को हासिल करने के रास्ते पर हैं। मनमोहन सिंह ने चीन के पक्ष में बढ़ते व्यापार संतुलन का भी जिक्र किया। वर्ष 2010 में दोनों देशों के बीच 60 अरब डॉलर का व्यापार हुआ। आपसी व्यापार में चीन ने भारत को 20 अरब डॉलर अधिक मूल्य का निर्यात किया। इससे पहले वर्ष 2009 में चीन ने भारत को 16 अरब डॉलर अधिक निर्यात किया था। चीन ने इस बात को गंभीरता से लिया और भारत से आयात बढ़ाने का भरोसा दिलाया।
मनमोहन सिंह ने औषधि, सूचना प्रौोगिकी और कृषि उत्पादों के बाजार में खुलापन लाकर इस असंतुलन को कम करने का सुझाव दिया जिसका चीन ने विरोध नहीं किया। राष्ट्रपति हू जिनताओ ने कहा कि असंतुलन का मुद्दा उन्हें भी परेशान करता रहा है। वे इसका समाधान तलाशने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि नई प्रणाली की कमान अधिकारियों को सौंपी जाएगी। इसके तहत दोनों देशों के बीच सीमावर्ती क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी। यह विचारनया है और दोनों पक्ष इसकी बारीकियों पर काम कर रहे हैं। मेनन ने बेहिचक यह स्वीकार किया कि हू के साथ प्रधानमंत्री की द्विपक्षीय बातचीत की यह सबसे बड़ी उपलब्धि रही। मनमोहन सिंह और चीनी राष्ट्रपति की मुलाकात में केंद्रीय वाणिज्य और उोग मंत्री आनंद शर्मा तथा चीन में भारतीय राजदूत एस जयशंकर भी मौजूद थे।
इससे वार्ता के पहले ब्रिक्स देशों के व्यापार मंत्रियों की भी एक बैठक हुई। इस समूह के देशों ने बुधवार को व्यापार मंत्रियों की बैठक में चीन से मांग की कि वह उनके मूल्य वद्र्घित उत्पादों की अधिकाधिक खरीदारी करे। इस मांग में भारतीय औषधियों का खास तौर से उल्लेख किया गया। शर्मा के मुताबिक, चीन के वाणिज्य मंत्री चेन देमिंग ने वादा किया कि ब्रिक्स देशों से मूल्य वद्र्घित उत्पादों की खरीदारी को तरजीह दी जाएगी। शर्मा बैठक के तुरंत बाद संवाददाताओं से बात कर रहे थे। उन्होंने बताया कि ब्राजील और भारत ने चीन से उसकी मुद्रा की कीमत कम करने को लेकर भी शिकायत की, जिसका द्विपक्षीय व्यापार पर नकारात्मक असर होता है।
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