मिस्र के अपदस्थ राष्ट्रपति होस्नी मुबारक पर लोकतंत्र समर्थकों की हत्या के ताजा आरोप यदि साबित हो गए तो उन्हें फांसी भी हो सकती है। सैन्य सरकार की ओर से गठित जांच समिति का दावा है कि 30 साल तक राष्ट्रपति पद संभालने वाले होस्नी मुबारक ने जनवरी में हुए जनआंदोलन को कुचलने का पूरा प्रयास किया था। उनके आदेश पर 850 लोकतंत्र समर्थकों की हत्या कर दी गई थी। तीन हफ्ते तक चले जनआंदोलन में लोकतंत्र समर्थकों की हत्या का यह आंकड़ा अनुमान से कहीं अधिक है। समिति में शामिल न्यायाधीशों ने रिपोर्ट में बताया कि मुबारक के आदेश पर पुलिस ने लोगों के सिर और छाती को निशाना बनाकर गोलियां दागी थीं। प्रदर्शन में शामिल लोगों को पुलिस के वाहनों तले कुचल दिया गया था। समिति के अध्यक्ष उमर मारवां ने बताया कि यह रिपोर्ट 17,058 अधिकारियों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और 800 वीडियो तथा चित्रों के आधार पर तैयार की गई है। मिस्र के सरकारी अखबार अल-अहराम ने काइरो की अपील कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जकारिया शलाश के हवाले से कहा है कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान मुबारक को प्रदर्शनकारियों की हत्या का आदेश देने का दोषी पाया गया, तो उन्हें फांसी या उम्रकैद भी हो सकती है। मामले की जांच में एक साल का भी वक्त लग सकता है। उल्लेखनीय है कि पिछले हफ्ते मुबारक और उनके दो बेटों अला और गमाल को 15 दिन के लिए हिरासत में लेने का आदेश दिया गया था। तब से मुबारक तबियत खराब होने के बाद वह सैन्य अस्पताल में हैं और बेटे जेल में। मुबारक के सहयोगियों के साथ मिस्र की कुख्यात टोरा जेल में बंद अला और गमाल से भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के मामलों में पूछताछ चल रही है|
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