Sunday, April 10, 2011

फुकुशिमा संयंत्र में दीवार बना रहा जापान


जापान के सर्वाधिक भीषण परमाणु संकट को काबू करने के लिए संघर्षरत कामगारों ने भूकंप प्रभावित फुकुशिमा परमाणु संयंत्र में शनिवार को इस्पात के अवरोधक को बनाने का काम शुरू कर दिया। इसके साथ ही अधिकारियों ने रेडियोधर्मिता से दूषित जमीन में चावल बोने पर प्रतिबंध लगा दिया है। फुकुशिमा प्रांत में प्रभावित संयंत्र के प्रथम उच्चस्तरीय दौरे के तहत वाणिज्य और उद्योग मंत्री बानरी काइदा ने उन कामगारों से मुलाकात की जो इस संयंत्र पर नियंत्रण पाने के लिए प्रयासरत हैं। यह संयंत्र 11 मार्च को 9 तीव्रता वाले भूकंप और सुनामी के कारण क्षतिग्रस्त हो गया था और इसके बाद से अब तक 30,000 लोग मृत या लापता हैं। मंत्री ने फुकुशिमा के गवर्नर युहेई सातो से भी मुलाकात की। संयंत्र की संचालक कंपनी टोक्यो इलेक्टि्रक पावर कंपनी (टेपको) ने रिएक्टर में नाइट्रोजन डालना जारी रखा है ताकि संयंत्र में और परमाणु विस्फोट न हो। फुकुशिमा संयंत्र में पहले ही पिछले माह के दौरान रेडियोधर्मिता के रिसाव के कारण दो विस्फोट हो चुके हैं। संयंत्र के इंजीनियरों ने रेडियोधर्मिता को फैलने से रोकने के लिए 120 मीटर चौड़ी दीवार बनाने का काम शुरू कर दिया है। राष्ट्रीय प्रसारक एनएचके के अनुसार, कामगारों ने रिएक्टर संख्या दो की सुरंग से अत्यधिक रेडियोधर्मी पानी को निकालने के प्रयासों को तेज कर दिया है। इसके साथ साथ वे रिएक्टर की कोर को ठंडा करने और रिसाव को भरने की कोशिश कर रहे हैं। टोक्यो इलेक्टि्रक पावर कंपनी का कहना है कि रिएक्टर संख्या दो की कंक्रीट की एक सुरंग में रेडियोधर्मी पानी दस सेंटीमीटर और ऊंचा चढ़ गया है। बुधवार को समुद्र में रेडियोधर्मी पानी के रिसाव को बुधवार को रोकने में सफलता हासिल हो गई थी। रिसाव को रोकने के प्रयासों के साथ ही संयंत्र से कम स्तर वाले रेडियोधर्मी पदाथरें से युक्त 9,000 टन पानी को समुद्र में छोड़ा गया ताकि रिएक्टर नंबर 2 की टरबाइन इमारत और इसके बाहर मौजूद सुरंग में भरे संदूषित पानी को इकट्ठा करने के लिए और जगह बनाई जा सके|

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