Wednesday, June 1, 2011

नेपाल में माओवादियों ने लोकतंत्र को नकारा

नेपाल गंभीर संकट की ओर बढ़ रहा है। देश में नया संविधान लागू करने की निर्धारित तिथि 28 मई है, लेकिन सरकार इसमें सफल होती नजर नहीं आ रही। इस बीच माओवादियों ने हथियार छोड़ने से इंकार कर दिया है। माओवादियों ने 10 साल की विद्रोही गतिविधियों के बाद पांच साल पहले शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन उनकी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी अब भी बरकरार है और उसके पास 3,500 तोपों के हथियारों का घोषित जखीरा भी है। मुख्य विपक्षी पार्टी नेपाली कांग्रेस ने हथियार छोड़ने के लिए माओवादियों के समक्ष 24 मई की तारीख निर्धारित की थी, लेकिन माओवादियों ने इसे खारिज कर दिया। माओवादियों के करीब 20,000 लड़ाके अब भी 28 छावनियों में रह रहे हैं, जिनका खर्च सरकार वहन करती है। शांति समझौते में लिबरेशन आर्मी को छह महीने के भीतर भंग कर दिए जाने की बात कही गई थी, लेकिन माओवादी इससे पीछे हट रहे हैं। वे सभी लड़ाकों को सेना में शामिल किए जाने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में लोकतांत्रिक सरकार और कानून के शासन से जुड़े रहने की उनकी भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। इन सबके बीच नेपाल के प्रधानमंत्री झलनाथ खनल पर इस्तीफे का दबाव बढ़ता जा रहा है। शनिवार यानी 28 मई को नया संविधान लागू करने की अंतिम तिथि है। यदि ऐसा नहीं हुआ तो संसद और सरकार की भी कोई वैधता नहीं रह जाएगी। प्रधानमंत्री अंतरिम संविधान की तिथि एक साल और बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन इसके लिए उन्हें दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी, जो नेपाली कांग्रेस के समर्थन के बगैर हासिल करना मुश्किल दिख रहा है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से भी सरकार को निराशा हाथ लगी है। बुधवार को अदालत ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि अंतरिम संविधान और संसद को अनिश्चितकाल के लिए नहीं बढ़ाया जा सकता। नेपाल में आपातकाल लागू करने या किसी प्राकृतिक आपदा के बाद ही सरकार को इसके लिए समय विस्तार मिल सकता है और वह भी केवल छह माह के लिए.

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