Wednesday, June 15, 2011

सीरियाई सेना फिर दमन की तैयारी में

सीरिया में जारी हिंसा से बचने के लिए हजारों की संख्या में लोग देश छोड़कर तुर्की में दाखिल हो रहे हैं। घर छोड़ने वालों में खासतौर पर जस्र अल शुग़ूर शहर के निवासी हैं, क्योंकि वहां सैनिक कार्रवाई होने का खतरा है। सरकार का कहना है कि इस नगर में सुरक्षाबलों के 120 सदस्य मारे गए थे और वह सशस्त्र गिरोहों से निपटने के लिए सख्त कदम उठाएगी। हालांकि सरकार के विरोधी कहते हैं कि ये स्पष्ट नहीं है कि ये सुरक्षाकर्मी कैसे मारे गए? दूसरी ओर तुर्की के प्रधानमंत्री रिसेप एरडोआन ने कहा कि वे तुर्की में शरण ले रहे विस्थापितों के लिए देश की सीमाएं सील नहीं करेंगे। तुर्की-सीरिया की सीमा पर मौजूद पर बीबीसी संवाददाता ओवेन बेनेट जोन्स के मुताबिक भारी संख्या में तुर्की एंबुलेंस सीरिया के घायल लोगों को लाती ले जाती देखी गई। जोन्स के मुताबिक सीरिया की सीमा पर कुछ तंबू भी देखे जा सकते हैं। ये उन लोगों के ठिकाने हैं जो सेना के डर से शहरों से भागकर वहां पहुंचे हैं। तुर्की सरकार शरणार्थियों के मुद्दे को राजनीतिक रंग नहीं देना चाहती और यही वजह है कि उसने पत्रकारों के साथ शरणार्थियों की बातचीत पर रोक लगा दी है। जस्र अल शुग़ूर के नजदीक लेबनान में मौजूद बीबीसी संवाददाता जिम मुईर के मुताबिक फिलहाल शहर में कोई सैनिक कार्रवाई नहीं हुई है लेकिन सैन्य दलों के तैयारियों में जुटे होने की खबरें हैं। तुर्की के प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि दमिश्क को चाहिए कि इस मामले से एहतियात और धैर्य के साथ निपटे। ब्रिटेन-फ्रांस लाएंगे प्रस्ताव दूसरी ओर ब्रिटेन और फ्रांस ने कहा कि वे सीरिया में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों को लेकर बुधवार को संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद के सामने एक प्रस्ताव रखेंगे। इस प्रस्ताव को फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी और पुर्तगाल ने तैयार किया था। इसमें राष्ट्रपति असद की सरकार के हाथों हो रही हिंसा की भ‌र्त्सना की गई है और उनसे मांग की गई है कि मानवीय दलों को सीरिया के शहरों में आने दिया जाए। ब्रिटेन के विदेश मंत्री विलियम हेग ने कहा कि राष्ट्रपति असद अपनी वैधता खोते जा रहे हैं और उन्हें या तो सुधर जाना चाहिए या फिर पद से हट जाना चाहिए। इस प्रस्ताव में सीरिया पर प्रतिबंध या सैनिक कार्रवाई की बात नहीं है। ब्रिटेन और फ्रांस पहले भी सीरिया में जारी हिंसा की निंदा कर चुके हैं। ब्रिटेन का कहना है कि अगर कोई भी देश इस प्रस्ताव पर वीटो करता है तो यह उसकी अपनी नैतिक जि़म्मेदारी होगी। फ्रांस भी कह चुका है कि सीरिया में जारी हालात के मद्देनजर संयुक्त राष्ट्र का इस मुद्दे पर चुप रहना वाजिब नहीं होगा। रूस, सीरिया के मामले पर सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव पारित किए जाने का विरोध कर चुका है। दूसरी ओर जस्र अल शुग़ूर के नज़दीक लेबनान में मौजूद बीबीसी संवाददाता जिम मुईर के मुताबिक फिलहाल शहर में कोई सैनिक कार्रवाई नहीं हुई है, लेकिन सैन्य दलों के तैयारियों में जुटे होने की खबरें हैं।

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