Wednesday, June 15, 2011
कश्मीरी की मौत के दावों में अमेरिका को दिखी साजिश
अलकायदा के शीर्ष कमांडरों में से एक और 26/11 के मास्टरमाइंड इलियास कश्मीरी की मौत के दावे को लेकर अमेरिका-पाक आमने-सामने आ गए हैं। अमेरिका कश्मीरी के मारे जाने की पुष्टि से इंकार कर रहा है, जबकि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी न केवल अपनी ओर से बल्कि ओबामा प्रशासन का हवाला देकर भी इस आतंकी सरगना की मौत का एलान कर चुके हैं। अब अमेरिका-पाक में कश्मीरी की मौत की पुष्टि पर मतभेद बढ़ते जा रहे हैं। हरकत उल जेहाद अल इस्लामी (हुजी) ने कश्मीरी की मौत का बात जिस तरह स्वीकार कर ली उससे भी संदेह गहरा रहा है। पाक सरकार की पुष्टि पर अमेरिकी मुहर न लगना भी यह सवाल खड़ा करता है कि कहीं हुजी की तरह पाक सरकार भी कश्मीरी को अमेरिकी ड्रोन हमलों से तो नहीं बचाना चाहती? 2003 में तत्कालीन पाक राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ पर जानलेवा हमले के बाद कई आतंकी कमांडर गिरफ्तार किए गए थे। इनमें से इलियास कश्मीरी भी एक था, लेकिन उसे हिज्बुल मुजाहिदीन के सरगना सैयद सलाउद्दीन की गवाही पर छोड़ दिया गया। कश्मीरी कभी 313 ब्रिगेड और हुजी का सरगना था। कहा जाता है कि उस दौरान वह एक भारतीय सैनिक का सिर काटकर मुशर्रफ के लिए भेंट स्वरूप ले गया था। पाक सेना में कमांडो रह चुके कश्मीरी भारत विरोधी गतिविधियों की वजह से हमेशा से आइएसआइ का चहेता रहा। ऐसे में यह संभव है कि पाक सरकार उसकी मौत की पुष्टि कर उसकी हिफाजत करने की कोशिश कर रही हो। कश्मीरी के बारे में 2009, 2010 में कई बार ऐसी खबरें आई जिनमें उसे मरा हुआ बताया गया। इस बार भी कश्मीरी की मौत की खबर के बाद हुजी की ओर से इंटरनेट पर डाली गई उसकी तस्वीर नकली निकली। जो तस्वीर कश्मीरी की बताकर पेश की गई है वह 26/11 हमले में मारे गए एक पाकिस्तानी आतंकी की हैं। उसका नाम अबू डेरा इस्माइल खान है। घनी दाढ़ी वाले कश्मीरी की एक आंख नहीं थी। तस्वीर में दिखाए गए व्यक्ति की भी एक आंख नहीं है, लेकिन उसके दाढ़ी नहीं है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि संदिग्ध फोटो और हुजी के वक्तव्य से यह समझ पाना मुश्किल है कि कश्मीरी जिंदा है या मर गया? एक अधिकारी ने कहा कि हम फिलहाल उसकी मौत की पुष्टि नहीं कर सकते, क्योंकि हमारे पास परीक्षण के लिए उसका डीएनए नहीं है। अमेरिकी विशेषज्ञों का कहना है कि हो सकता है कि हुजी ने अमेरिका को गुमराह करने के लिए कश्मीरी की मौत की झूठी खबर फैला दी हो। यदि यह सही है तोइसका मतलब है कि पाकिस्तान उन पांच वांछितों की सलामती चाहता है जिन्हें अमेरिका किसी भी कीमत पर जिंदा या मुर्दा चाहता है। इनमें इलियास कश्मीरी और मुल्ला उमर प्रमुख हैं। ऐसा पहली बार नहीं जब किसी दुर्दात आतंकी की मौत पर रहस्य के बादल मंडराए हों। इससे पहले तहरीक-ए-तालिबान (टीटीपी) पाकिस्तान के प्रमुख हकीमुल्ला महसूद की मौत भी सवाल बनकर रह गई थी। 2010 में 9 जनवरी, 14 जनवरी और 31 जनवरी को हकीमुल्ला की मौत खबरें आई, लेकिन तालिबान ने उसकी मौत से इंकार किया। दूसरी ओर पाकिस्तान सहित एशिया के प्रमुख मीडिया संस्थानों ने उसकी मौत की बात कही। इसके बाद आइएसआइ के पूर्व अधिकारी ने उसके जिंदा होने की बात कही। एक तथ्य यह भी है कि हकीमुल्ला महसूद 31 दिसंबर 2009 को अफगानिस्तान के खोस्त स्थित सीआइए ठिकाने पर आतंकी हमले के बाद सिर्फ एक बार वीडियो में दिखाई दिया। वीडियो में वह उस फिदायीन के साथ था जिसने खोस्त स्थित सीआइए ठिकाने पर जाकर खुद को उड़ा लिया था। वीडियो से स्पष्ट था कि वह उस समय बनाया गया जब ठिकाने की साजिश रची जा रही थी। विशेषज्ञ मानते हैं कि तालिबान ने जानबूझकर ऐसे तथ्य पेश किए कि मीडिया उसे मरा हुआ मान ले। 2009 में ड्रोन हमलों में मारे गए टीटीपी के पूर्व सरगना बैतुल्ला महसूद को लेकर भी ऐसी ही खबरें आती रहीं, लेकिन उसने कभी खुद को छिपाया नहीं। जब-जब उसकी मौत की खबरें आई वह मीडिया के सामने आया।
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