Friday, June 10, 2011

जख्मी यमनी राष्ट्रपति सऊदी अरब गए, देश में जश्न

विद्रोही कबाइलियों के हमले में शुक्रवार को घायल हुए यमनी राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह इस समय सऊदी अरब के शहर रियाद में इलाज करा रहे हैं। ऐसी खबरें हैं कि सालेह अब स्वदेश नहीं लौटेंगे। दूसरी ओर राष्ट्रपति के देश छोड़ने से यमन में जश्न का माहौल है। वहां पर हजारों लोकतंत्र समर्थक कई महीनों से सालेह के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। सालेह विरोधी कबाइली लड़ाके बीते 10 दिनों से राजधानी सना में यमनी सेना के साथ संघर्ष कर रहे हैं। रविवार को राजधानी सना की सड़कों पर बड़ी संख्या में लोगों ने नारे लगाकर और झंडे लहराकर राष्ट्रपति सालेह के देश से जाने की खुशी मनाई। वहां कबाइली लड़ाकों और सेना के बीच संघर्ष के चलते गोलियों की आवाजें भी सुनाई दे रही हैं। बीबीसी को मिली जानकारी के अनुसार रविवार को सना के उत्तर में स्थित सैन्य परिसर में हुए ग्रेनेड हमले में पांच लोग मारे गए। खबरें मिल रही हैं कि राष्ट्रपति सालेह की वफादार सेना और विद्रोही अल अहमर कबाइली लड़ाकों के बीच नई लड़ाई शुरू हो गई है। दूसरी ओर यमन के एक अन्य शहर तईज में गोलीबारी शुरू हो गई है, जिसमें पांच लोग मारे गए। मरनेवालों में चार यमनी सैनिक और एक हमलावर शामिल हैं। शनिवार सुबह रियाद पहुंचे संकट और विरोध का सामना कर रहे यमनी राष्ट्रपति सालेह इलाज के लिए शनिवार सुबह रियाद पहुंचे। वह शुक्रवार को राष्ट्रपति परिसर पर हुए विद्रोहियों के हमले में घायल हुए। सालेह सऊदी अरब के एक विशेष चिकित्सा विमान से शनिवार सुबह रियाद पहुंचे। इसी मस्जिद पर हुए हमले में सालेह जख्मी हुए शुक्रवार को उनके परिसर की अल नहदाईन मस्जिद पर रॉकेट हमला हुआ था, जिसमें राष्ट्रपति सालेह और उनके कई बड़े प्रशासनिक अधिकारी जख्मी हो गए थे। ये सभी लोग राजधानी सना के दक्षिण में स्थित राष्ट्रपति परिसर की मस्जिद में दोपहर बाद प्रार्थना कर रहे थे, तभी रॉकेट से हमला हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक राष्ट्रपति सालेह विमान से चलकर बाहर निकले। हालांकि उनकी गर्दन, सिर और चेहरे के जख्म साफ-साफ नजर आ रहा था। उनके परिवार के कई सदस्य भी उनके साथ मौजूद थे। सरकारी अधिकारियों ने सालेह विरोधियों का साथ दे रहे सशस्त्र कबाइली लड़ाकों पर हमले को अंजाम देने का आरोप लगाया है, जिसमें सात लोग मारे गए हैं। हालांकि उन्होंने इस आरोप का खंडन किया है। सालेह के बाद? इस बात को लेकर कई शंकाएं हैं कि सालेह कभी लौटकर यमन आएंगे या नहीं और ये भी कि अरब जगत में हुए सत्ता विरोधी प्रदर्शन की परिणति तीसरे अरब नेता के पतन के रूप में तो नहीं हुई है। राष्ट्रपति सालेह यमन पर 33 साल से शासन कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने कई विद्रोह, बगावत और गृहयुद्ध का सामना करते हुए सत्ता बरकरार रखी। राष्ट्रपति सालेह पिछले कई महीनों से लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शन और विद्रोही कबाइली नेताओं के हिंसक विरोध का सामना कर रहे हैं। पिछले हफ्ते में विद्रोही कबाइली लड़ाकों और उनकी वफादार सेना के साथ संघर्ष तेज हो गया है। अगर राष्ट्रपति सालेह सऊदी अरब से वापस नहीं आते हैं तो उनकी जगह लेने के लिए सत्ता का नया संघर्ष शुरू हो सकता है। यमन के उपराष्ट्रपति, सालेह के बड़े बेटे, दूसरे कबीलाई नेता और लोकप्रिय प्रदर्शनकारी सभी देश का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की कोशिश कर सकते हैं। उपराष्ट्रपति ने संभाली कमान मास्को : उपराष्ट्रपति अब्द-रब्बू मंसूर हादी ने कार्यवाहक राष्ट्रपति और सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर के तौर पर जिम्मेदारी संभाल ली है। यह जानकारी अल जजीरा ने रविवार को दी। समाचार एजेंसी आरआइए नोवोस्ती के अनुसार राष्ट्रपति भवन के अंदर उपस्थित मस्जिद पर उस समय हमला हुआ, जब सालेह और सरकार के शीर्ष अधिकारी वहां जुमे की नमाज अदा कर रहे थे। हमले में कम से कम तीन अंगरक्षकों की मौत हो गई और कई वरिष्ठ अधिकारी घायल हो गए। कुछ प्रारंभिक मीडिया रपटों में कहा गया है कि सालेह भी हमले में मारे गए, लेकिन यमन के सरकारी टेलीविजन ने इन खबरों का तत्काल खण्डन किया और कहा कि राष्ट्रपति स्वस्थ हैं। सालेह के खिलाफ लगभग पांच महीनों से विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। सालेह 33 वर्षो से सत्ता पर काबिज हैं। हाल में विरोध प्रदर्शन, सालेह के वफादारों और विपक्षी कबायली संगठनों के सैकड़ों सदस्यों के बीच बार-बार के मुठभेड़ों में तब्दील हो गया। पिछले सप्ताह इन मुठभेड़ों में 120 से अधिक लोग मारे गए थे। यमन में गृहयुद्ध की स्थिति पैदा हो गई है।

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