Wednesday, June 15, 2011
केंद्र की कार्रवाई पर अमेरिका में भी उठे सवाल
दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में भ्रष्टाचार के खिलाफ अनशन कर रहे बाबा रामदेव पर पुलिस कार्रवाई का मामला अमेरिका में भी उठा। अमेरिकी विदेश मंत्रालय की दैनिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान पत्रकारों ने इससे संबंधित कई सवाल पूछे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मार्क टोनर ने कहा कि रामदेव के बारे में उन्होंने मीडिया में ढेर सारी खबरें देखी हैं, लेकिन उनके मुताबिक यह भारत का आंतरिक मामला है। पत्रकारों के इस बारे में बार-बार सवाल पूछे जाने पर मार्क टोनर ने कहा कि अमेरिका शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन के अधिकार का समर्थन करता है, लेकिन साथ ही नागरिक सुरक्षा को लागू करने के एक लोकतांत्रिक सरकार के अधिकार का भी अमेरिका समर्थन करता है। एक पत्रकार ने जब ये पूछा कि इसी तरह की घटना कहीं और होती है तब तो अमेरिका उसे आंतरिक मामला नहीं कहता है फिर भारत के मामले में ऐसा रवैया क्यूं? खासकर जब भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। इस सवाल के जवाब में मार्क टोनर ने कहा कि जी बिल्कुल कानून के शासन और मानवाधिकार का सम्मान होना चाहिए। एक पत्रकार ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ वहां हजारों की संख्या में लोग जमा हुए थे। वे भारत के नेताओं के जरिए अरबों रुपये देश से बाहर ले जाने का विरोध कर रहे थे और उन्हें देश में वापस लाए जाने की मांग कर रहे थे। उन लोगों पर रात में हमला किया गया। अमेरिकी विदेश मंत्री को इस बारे में कोई बयान देना चाहिए। इसके जवाब में मार्क टोनर ने कहा कि यह बिल्कुल जायज सवाल है, क्योंकि अमेरिका का हमेशा ही कहना रहा है कि वह दुनिया भर में लोगों को अपनी बातों को शांतिपूर्वक तरीके से व्यक्त करने के अधिकार का समर्थन करता है। रामदेव के मामले में उनका कहना था कि रामदेव मामला बहुत पेचीदा है। भारतीय सुरक्षाकर्मी नागरिक सुरक्षा बहाल करने की कोशिश कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों के पास अनशन करने का परमिट हो भी सकता है और नहीं भी। मैं इस बारे में निश्चित तौर पर नहीं कह सकता। हमलोग दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की हैसियत से भारत का सम्मान करते हैं और मानते है कि यह भारत का आंतरिक मामला है और क्या अच्छा है इसका फैसला भारत को करना है। एक पत्रकार ने सवाल किया कि भारत के चार-चार मंत्री रामदेव से बातचीत कर रहे थे, इसलिए परमिट होने या ना होने का कोई सवाल ही नहीं पैदा होता है। इसके जवाब में टोनर ने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र होने के नाते भारत की जिम्मेदारी है कि वह शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे लोगों को अपनी बात कहने का मौका दे, लेकिन उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी प्रदर्शनकारियों पर भी है कि वे सुरक्षा जरूरतों का पूरा ख्याल रखें।
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