Wednesday, June 29, 2011
अब सूखे से छह महीने पहले हो जाएगी खबर
ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के एक वैज्ञानिक ने ऐसी तकनीक विकसित की है जो छह महीने पहले ही किसी इलाके में पड़ने वाले सूखे की स्थिति के बारे में बता सकती है। भारत में भी सूखे के हालात कई राज्यों में अलग-अलग समय पर देखे जाते हैं। यह खोज निश्चित रूप से भारत समेत पूरे विश्व के लिए लाभप्रद हो सकती है। विक्टोरिया यूनिवर्सिटी के शिशुतोष बरुआ ने यह महत्वपूर्ण खोज की है। उनके द्वारा तैयार उपकरण वातावरण में जल और जलवायु संबंधी बदलाव को मापकर उस क्षेत्र में नमी का आकलन करने के साथ पूर्व की परिस्थितियों के आधार पर भविष्य में सूखा पड़ने की स्थिति का अनुमान लगाया जा सकता है। बरुआ ने कहा कि सूखे के बारे में अग्रिम जानकारी होने पर जल प्रबंधन से जुड़े लोग फसल को बचाने के लिए पहले ही पानी की समुचित व्यवस्था कर सकते हैं। अपने अध्ययन के लिए उन्होंने विक्टोरिया में पहले पैदा हुई सूखे की परिस्थितियों पर भी गौर किया। उनका कहना है कि इससे पहले हुई खोजों से केवल वर्षा की कमी के बारे में ही पता लग पाता था। मगर इस तकनीक के जरिए जमीन में जल के भंडार, धारा प्रवाह और जमीन से पानी के वाष्पोत्सर्जन की दर का भी पता लगाया जा सकता है। इससे सूखे की मार से बचने के लिए पहले ही सारे उपाय करने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि हाल के ऑस्ट्रेलिया में पड़े 13 साल लंबे सूखे से यह पता चला है कि इससे प्रभावित लोगों के लिए ऑस्ट्रेलिया में पहले से ही पानी की कमी हो गई थी। उन्हें यह उम्मीद है कि अब सरकारें और जल प्रबंधन प्रशासन उनकी इस खोज का लाभ उठाते हुए समय रहते जल का समुचित प्रबंध कर सकेगा। उन्होंने कहा कि पिछले 60 सालों में ऑस्ट्रेलिया के लगातार कई साल तक सूखा पड़ता रहा है। लेकिन यहां आने वाले सालों में ना सिर्फ और सूखा पड़ेगा बल्कि सूखा और भीषण व भयावह भी होता जाएगा। इसका कारण वहां वातावरण में भारी परिवर्तन होना है।
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