Wednesday, June 1, 2011
दलाईलामा अब सिर्फ धर्मगुरु
लोकतंत्र के लिए दलाईलामा के प्रण के कारण तिब्बतियों की सदियों पुरानी व्यवस्था अंतत: बदल गई। अब दलाईलामा केवल धर्मगुरु रहेंगे। दलाईलामा ने निर्वासित तिब्बती संसद की ओर से उनकी राजनीतिक शक्तियों के हस्तांतरण के कारण तिब्बती चार्टर में किए गए संशोधन व पारित प्रस्तावों पर सोमवार को अंतिम मुहर लगा दी। निर्वासित तिब्बती सरकार के आदर्श वाक्य में परिवर्तन किया गया है। अब यह देन्पान्यी नैम्पर ग्यालग्युर चिग होगा। इसका हिंदी भावार्थ वही है जो भारतीय प्रतीक चिन्ह पर रहता है यानी सत्यमेव जयते। शनिवार को तिब्बती संसद के विशेष सत्र में शक्तियों के हस्तांतरण के प्रारूप व उसके बाद हुए संशोधन को मंजूरी दी गई थी। इसके बाद संशोधन को औपचारिकता के रूप में तिब्बती सर्वोच्च धर्मगुरु दलाईलामा के पास रविवार को प्रस्तुत किया गया था। दलाईलामा अब पूरी तरह से अपनी राजनीतिक व प्रशासनिक शक्तियों से मुक्त हो गए हैं। उनकी शक्तियां अब चुनी हुई निर्वासित तिब्बती सरकार के कालोन ट्रिप्पा (प्रधानमंत्री), स्पीकर, डिप्टी स्पीकर व न्याय आयोग सहित संसद के कुछ अन्य प्रतिनिधियों के हवाले हो गई हैं। अनुच्छेद-19 के तहत दलाईलामा के पास रहने वाली बड़ी राजनीतिक शक्तियां निर्वासित सरकार के कालोन ट्रिप्पा (प्रधानमंत्री) के पास रहेंगी। इनमें किसी बड़े विधेयक को पारित करने व उसे लागू करवाने की सबसे बड़ी शक्ति शामिल है। लेकिन तिब्बती प्रतिनिधियों द्वारा अनुच्छेद एक के तहत तैयार की गई नई प्रस्तावना के तीन अनुच्छेदों को कुछ संशोधनों के साथ मान लेने से दलाईलामा अब धार्मिक मामलों के अलावा तिब्बती समुदाय के हितों तथा निर्वासित तिब्बत सरकार को सुझाव दे सकेंगे।
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