Tuesday, June 14, 2011
अमेरिका की दोहरी नीति
एक दशक से भी अधिक समय से अमेरिका पाकिस्तान के खिलाफ आतंकवाद के खिलाफ मिलने वाले प्रमाणों की अनदेखी करता आ रहा है। हालांकि, इसका नुकसान भी उसे उठाना पड़ा है। ऐबटाबाद ऑपरेशन के बाद वाशिंगटन दुनिया को जवाब दे सकता है कि आइएसआइ को क्यों न एक आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया जाए? दुनिया का मोस्ट वांटेड आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को ऐबटाबाद में पाकिस्तान मिलिटरी अकादमी के पास होना और उसका वहां मारा जाना यही साबित करता है कि पाकिस्तान दहशतगर्दो की शरणस्थली बन गई है। ओसामा के मारे जाने के बाद पाकिस्तान और अमेरिका के रिश्तों में जो खटास आई है उसे दूर करने के लिए अमेरिका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिटंन ने अचानक पाकिस्तान का दौरा किया और उन्होंने वहां जाकर राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, प्रधानमंत्री युसुफ रजा गिलानी और सेना प्रमुख अशफाक परवेज कियानी से मुलाकात की। दोनों देशों के रिश्तों में जो कड़वाहट आई है उसे दूर करने के लिए दोनों देशों ने कुछ कदम उठाए हैं। पाकिस्तान जहां अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआइए को ऐबटाबाद में ओसामा बिन लादेन के घर की जांच करने को तैयार हो गया है वहीं अमेरिका अपने सैनिकों की संख्या में कटौती करने को तैयार हुआ है। पाकिस्तान की यात्रा पर आई हिलेरी क्लिंटन ने कहा कि इस बात के कोई सबूत नहीं है कि पाक के उच्च अधिकारियों को ओसामा की कोई जानकारी थी। पाकिस्तान ने अमेरिका को भरोसा दिलाया है कि चरमपंथियों के खिलाफ कार्रवाई करने में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी। वैसे पाकिस्तान में लादेन के मारे जाने से पहले भी कई सार्वजनिक स्थलों, सेना के ठिकानों तथा नेताओं पर आत्मघाती व अन्य हमले होते रहते थे परंतु ओसामा बिन लादेन के मारे जाने के बाद अब इनमें काफी तेजी आ गई है। उदाहरण के तौर पर 22 मई को कराची स्थित नौसेना अड्डे पर चरमपंथियों द्वारा हमला किया गया। अलकायदा के बारे में अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन का मानना है कि यह अब भी एक बड़ा खतरा है और इससे निपटने के लिए पूरे विश्व को एकजुट होकर अलकायदा के खिलाफ कार्रवाई करनी होगी तभी हम चरमपंथियों के खिलाफ लड़ाई जीत पाएंगे। आजकल पाकिस्तान की सेना और उसकी खुफिया एजेंसी आइएसआइ दोनों सवालों के घेरे में है। पाकिस्तान की संसद ने प्रस्ताव पास करके यह स्पष्ट कर दिया है कि लोकतांत्रिक सरकार पर भी सेना का ही दबदबा है। इस प्रस्ताव में नाकाम होने की बात स्वीकार की गई है, लेकिन इस बात से इंकार किया गया है कि ओसामा बिन लादेन के पाकिस्तान में होने के बारे में सरकार को मालूम था। अमेरिका के कई राजनेताओं ने आश्चर्य व्यक्त किया है कि ओसामा बिन लादेन इतने दिनों तक ऐसे सुरक्षित स्थान में रह रहा था और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी को इसकी जानकारी कैसे नहीं हुई। दुनिया में आतंकवाद को जिंदा रखने में अमेरिका द्वारा पाकिस्तान सेना की भूमिका की जानबूझकर अनदेखी की गई है। पहले जनरल परवेज मुशर्रफ और अब जनरल अशफाक परवेज कियानी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह मनाने की जुगात लगाई है कि वैश्विक आतंकवाद का मुहिम पाकिस्तानी सेना की मदद के बिना मुश्किल है। पाकिस्तान एक ओर तो आतंकवादियों से निपटने की बात करता है वहीं दूसरी ओर वह उन्हें शरण देता है। पाकिस्तान सेना को मिलने वाले मदद का उपयोग आतंकवादियों को तैयार करने में किया जाता है यह किसी से छिपा नहीं है। पाकिस्तान और आइएसआइ दोनों आतंकवादी ढांचे हैं। आइएसआइ के द्वारा ही कई अन्य चरमपंथी संगठन फल-फूल रहे हैं और इन्हीं दहशतगर्दो ने कई देशों में अपना आतंक फैला रखा है। (लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं)
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