Wednesday, June 15, 2011

ऊंची इमारतों में चीन होगा नंबर वन

चीन में 2016 तक 800 गगनचुंबी इमारतें होगी जिनकी संख्या इस तरह की अमेरिकी इमारतों की तुलना में चार गुना ज्यादा होगी। लेकिन विशेषज्ञों ने इस तरह की इमारतों को अनुमति देने की नीति पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता जताई है क्योंकि इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है और उनके रखरखाव पर काफी खर्च आता है। शंघाई से निकलने वाली स्काईस्क्रेपर पत्रिका ने कहा कि दुनिया की दस सबसे ऊंची इमारतों में पांच चीन में हैं। चीन की सर्वाधिक गगनचुंबी इमारतें हांगकांग में हैं। इस आधुनिक चीनी शहर में 58 गगनचुंबी इमारतें हैं जबकि शंघाई में ऐसी 51 इमारतें हैं। शेनझेन में ऐसी 45 इमारतें हैं। पत्रिका की खबर के अनुसार 500 फुट (152.4 मीटर) से अधिक ऊंचाई वाली इमारतों को गगनचुंबी इमारतों की श्रेणी में शामिल किया गया है। अमूमन यह बुलंद इमारतों की शुरूआत ही कम से कम पचास मजिलों से होती है। पत्रिका ने चीन की गगनचुंबी इमारतों के एक साल के अध्ययन के बाद यह निष्कर्ष निकाला है कि भारत के इस पड़ोसी मुल्क में 2016 तक 800 गगनचुंबी इमारतें होंगी जोकि उस समय तक अमेरिका में मौजूद स्काईस्क्रैपर्स से चार गुना अधिक होंगी। यानी सिर्फ पांच साल बाद दुनिया में सर्वाधिक बुलंद इमारतों वाले देश के रूप में अमेरिका के बजाय सबसे अधिक आबादी वाला देश चीन जाना जाएगा। हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इन गगनचुंबी इमारतों की शुरूआत यूंतो भूमि बचाने के लिए हुई थी लेकिन अब इन आलीशान और निर्माण के लिहाज से बेहद आधुनिक इमारतों के निर्माण का मकसद उस देश की छवि और पहचान के रूप में लिया जाने लगा है। चीन भी अत्यधिक आबादी वाला देश है इसलिए उसे अपने देश के शहरीकरण के दौरान ऊंचे बुर्जो की जरूरत है। ऐसी गगनचुंबी इमारतें जमीन बचाने में सहायक हैं। चीन-यूरोप इंटरनेशनल बिजनेस स्कूल के प्रोफेसर वांग जिनमाओ ने सरकारी पत्रिका ग्लोबल टाइम्स को बताया कि इन गगनचुंबी इमारतों के निर्माण की लागत अत्यधिक होने, रखरखाव महंगा होने और पर्यावरण के लिए यह संकट होने के चलते आसमान छूती इमारतों के प्रोजेक्ट में चीनी सरकार को सावधानी बरतनी चाहिए। उल्लेखनीय है कि इस समय चीन में 200 गगनचुंबी इमारतों का निर्माण चल रहा है जबकि फिलहाल अमेरिका में कुल गगनचुंबी इमारतें ही इतनी हैं। शंघाई स्थित 421 मीटर ऊंचा जिन माओ टावर दुनिया की दूसरी सबसे ऊंची इमारत है। इसके निर्माण पर प्रति वर्ग मीटर 20,000 युआन (करीब 3,088 डॉलर) लागत आई है। शंघाई स्थित न्यूज पोर्टल इस्टडे के अनुसार इस इमारत के रखरखाव में प्रतिदिन एक मिलियन युआन का खर्च आता है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन के जिन शहरों में दस लाख आबादी भी नहीं है वहां भी लोग स्काईस्क्रैपरों की परियोजनाओं में रहने की तैयारी में हैं। उदाहरण के लिए चीन के स्वायत्त क्षेत्र गुझिंग जुआंग के फेकचेगैंग शहर में एक 528 मीटर ऊंची इमारत बनाने की योजना है। यह शंघाई के व‌र्ल्ड फाइनेशियल सेंटर से भी ऊंची होगी। शंघाई की यह इमारत दुनिया की तीसरी सबसे ऊंची बिल्डिंग है। शंघाई रीयल इस्टेट इकानिमी सोसाइटी के उप निदेशक यिन कुनहुआ के अनुसार अगर छोटे शहरों की इन बुलंद इमारतों में फ्लैट और दफ्तर नहीं बिक पाए तो बिल्डरों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पडे़गा।

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