Wednesday, June 29, 2011

ब्रह्मपुत्र पर चीन की बुरी नजर के नहीं मिले सबूत

चीन की बांध परियोजनाओं की भारत सैटेलाइट निगरानी भी कर रहा है। ब्रह्मपुत्र की धारा मोड़ने और बांध निर्माण की खबरों के बाद नई दिल्ली ने सैटेलाइट तस्वीरों से भी इनकी तस्दीक की। सरकारी सूत्रों के मुताबिक भारत को धारा मोड़ने के कोई निशान नहीं मिले हैं। हालांकि इस कड़ी में असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने गुरुवार को विदेश मंत्री एसएम कृष्णा से मुलाकात कर मामले पर अपनी चिंताएं साझा कीं। ताजा तथ्यों के साथ भारत ब्रह्मपुत्र पर चीन की परियोजनाओं पर लगातार नजर रखे हुए है। नई दिल्ली की नजर ब्रह्मपुत्र की मुख्य धारा ही नहीं, उपधाराओं पर बनने वाली छोटी बांध परियोजनाओं पर भी है। इस बीच असम के मुख्यमंत्री ने चीन में ब्रह्मपुत्र की धारा मोड़ने की कोशिशों से जुड़ी खबरों के बाद विदेश मंत्री से मुलाकात कर अपनी चिंता जताई। गोगोई का कहना था कि यदि ऐसे होता है तो असम की कृषि पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ेगा। वैसे विदेश मंत्री एसएम कृष्णा यह स्पष्ट कर चुके हैं कि तिब्बत क्षेत्र में चीन की झांगमू बांध परियोजना से घबराने की जरूरत नहीं है। कृष्णा के अनुसार झांगमू बांध ब्रह्मपुत्र की धारा की दिशा में बनाया जा रहा है जिसमें पानी रोका नहीं जाएगा। लिहाजा इसके कारण भारत में आने वाले ब्रह्मपुत्र के पाने में फर्क नहीं पड़ेगा। सूत्रों के मुताबिक ब्रह्मपुत्र का अधिकतर प्रवाह क्षेत्र भारत में जरूर है, लेकिन नदी की धारा में चीन से आने वाले पानी की मात्रा भारत से बाहर जाने वाले जल की तुलना में कम है। असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने विदेश मंत्री के अलावा गृहमंत्री पी चिदंबरम से भी बात की और उन्हें उल्फा और सरकार के बीच इस महीने के अंत में शुरू होने वाली औपचारिक वार्ता की जानकारी दी। गोगोई ने कहा कि उल्फा के अध्यक्ष अरविंदा राजखोवा के नेतृत्व वाले दल के साथ अनौपचारिक बातचीत सकारात्मक रूप से आगे बढ़ रही है और दोनों पक्ष जल्द ही असम में अपना अभियान बंद करने की घोषणा करेंगे।

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