Thursday, June 16, 2011

तमिल मुद्दे पर भारत और श्रीलंका के बीच टकराव

श्रीलंका में लंबे समय से चली आ रही तमिल समस्या को सुलझाने के लिए भारत की ओर से दिए गए प्रस्ताव पर श्रीलंका अमल करने को तैयार नहीं है। स्थानीय समाचार पत्र संडे टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यदि भारत ने इस मुद्दे पर अधिक दबाव डाला तो दोनों पक्षों के बीच संघर्ष की स्थिति पैदा हो सकती है। श्रीलंका ने भारत से कहा कि वह उसकी राजनीतिक योजना के मुताबिक अपनी मुख्य भूमियों और पुलिस शक्ति को प्रांतीय परिषदों के हवाले नहीं करेगा। श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने शनिवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिव शंकर मेनन के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल से कहा कि पुलिस की मुख्य शक्तियों और भूमि नियंत्रण को प्रांतीय परिषदों को नहीं सौंपा जा सकता। सत्ता हस्तांतरण के लिए इन परिषदों का गठन संविधान के 13वें संशोधन के तहत हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार भूमि का नियंत्रण और पुलिस शक्तियों को प्रांतीय परिषदें को नहीं सौंपने के सरकार के कठोर रवैये के कारण ऐसी आशंका है कि श्रीलंका और भारत के बीच कूटनीतिक तौर पर गतिरोध पैदा हो सकता है। दूसरी तरफ राजपक्षे से मुलाकात करने वाले शिवशंकर मेनन, विदेश सचिव निरुपमा राव और रक्षा सचिव प्रदीप कुमार ने ऐसी स्थिति पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। संडे टाइम्स के मुताबिक राजपक्षे की पार्टी यूनाइटेड पीपुल्स फ्रीडम एलांयस के कई सहयोगी प्रांतीय परिषदों को और ज्यादा शक्ति प्रदान करने का विरोध कर रहे हैं। राजपक्षे ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल से कहा कि संविधान के 13वें संशोधन के अनुसार उनकी सरकार संयुक्त सूची में आने वाले अन्य बहुत से विषयों पर छूट देने को तैयार है। इसके अलावा उन्होंने देश के उत्तरी और पूर्वी भाग से आपतकालीन नियंत्रण हटाए जाने की भी बात कही है। मेनन ने संवाददाताओं से कहा कि श्रीलंका ने संवैधानिक संशोधनों को सुधारने का वादा किया है और उन्होंने आशा जताई कि वह भारत की ओर से प्रस्तावित योजना को लागू करेगा।

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