Wednesday, June 1, 2011
भारत को रोशन करने में मददगार बनेगा जर्मनी
अगले एक दशक में अपना परमाणु बिजली उत्पादन बंद करने की तैयारी कर रहा जर्मनी भारत की ऊर्जा भूख मिटाने में मदद को बेताब है। भारत दौरे पर आई जर्मनी की चांसलर एंजेला मार्केल ने वादा किया कि ऊर्जा साधन जुटाने में भारत की मदद के लिए जर्मन तकनीक और नाभिकीय ज्ञान मदद के लिए हाजिर है। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सीट के दोनों दावेदार मुल्कों ने आतंकवाद और अफगानिस्तान के हालात संभालने में सहयोग समेत कई मोर्चो पर सहयोग बढ़ाने पर भी रजामंदी जताई। अपने एक दर्जन से ज्यादा मंत्रियों के साथ भारत दौरे पर आई जर्मन चांसलर ने भारत के साथ हुई शिखर वार्ता में रक्षा, वाणिज्य, ऊर्जा से लेकर तकनीक, पर्यावरण और शहरी विकास के मुद्दों पर व्यापक बातचीत का सिलसिला शुरू किया। दोनों देशों के बीच पहली अंतर सरकारी वार्ता के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बताया कि जर्मन चांसलर से साथ हुई उनकी बातचीत में अफगानिस्तान और पाकिस्तान के हालात भी शामिल थे। तंकवाद को गंभीर चुनौती बताते हुए सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि इसके खिलाफ हर मोर्चे पर मिलकर मुकाबला करने की जरूरत है। दोनों नेताओं ने अफगानिस्तान में स्थिरता और शांति की कोशिशों पर भी जोर दिया। गौरतलब है कि अफगानिस्तान में जर्मनी मध्यस्थता प्रयास शुरू कर रहा है। चांसलर मार्केल के मुताबिक जर्मनी ने इस साल के अंत तक संबंधित पक्षों की बैठक बुलाई है। भारत और जर्मनी के कूटनीतिक संबंधों की 60वीं सालगिरह के साल आई जर्मन चांसलर के इस दौरे में बर्लिन ने नई दिल्ली की नाभिकीय ऊर्जा विस्तार कार्यक्रम को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए मदद देने का वादा किया। इस दौरान दोनों देशों के बीच नाभिकीय फिजिक्स क्षेत्र में साझा अनुसंधान का भी करार हुआ। इसके लिए कोलकाता स्थित साहा इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर फिजिक्स और जर्मनी के डौशे इलैक्ट्रोनेन सिंक्रोटोन के बीच समझौता हुआ। उल्लेखनीय है कि फुकुशिमा हादसे के बाद जर्मन सरकार ने घरेलू दबाव के मद्देनजर यह एलान किया है कि 2022 तक परमाणु ऊर्जा उत्पादन बंद कर दिया जाएगा। हालांकि भारतीय नाभिकीय ऊर्जा विस्तार को मदद के बारे में पूछे सवालों पर उनका कहना था कि अपने ऊर्जा विकल्प तय करना हर देश का अपना फैसला है। वहीं प्रधानमंत्री सिंह का कहना था कि अपनी ऊर्जा जरूरतों के मद्देनजर भारत नाभिकीय ऊर्जा विकल्पों की अनदेखी नहीं कर सकता।
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