नई दिल्ली आपात हालात में सैन्य संचार को त्वरित और सुरक्षित बनाने की कोशिशें जल्द ही परवान चढ़ सकती हैं। बदले हालात और नई चुनौतियों के लिहाज से सेना के नेटवर्क को तैयार करने के लिए उसे अपना संचार सेटेलाइट जीसेट-7एस इस साल के अंत तक मिलने की उम्मीद है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) एस-बैंड पर सुरक्षित संचार की सुविधा मुहैया कराने वाले उपग्रह को इसी साल लांच करने की तैयारी कर रहा है। इसरो के मुताबिक 2011 के अंत तक जीएसएलवी से छोड़े जाने वाले उपग्रह जीसेट-7एस में एस बैंड के अलावा अति उच्च फ्रीक्वेंसी (यूएचएफ) के साथ केयू और सी बैंड के भी ट्रांसपोंडर होंगे। सैन्य सूत्रों के मुताबिक जीसेट-7एस हैकिंग और सूचना तंत्र के घुसपैठियों के खिलाफ दीवार दुरुस्त करने में लगी फौज को अपना सुरक्षित मोबाइल नेटवर्क तैयार करने में भी मदद करेगा। क्लोज यूजर ग्रुप की इस मोबाइल सेवा से फौज के आला अधिकारी ही नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र के आला अफसर भी जुड़ सकेंगे। साथ ही आपात स्थितियों में शीर्ष सुरक्षा तंत्र के संवाद के लिए मौजूदा वाणिज्यिक दूरसंचार नेटवर्क पर निर्भरता भी खत्म हो सकेगी। कुछ खास अधिकारियों के लिए सीमित इस नेटवर्क के नंबरों तक बाहरी दूरसंचार सेवा से पहुंचना नामुमकिन होगा। सुरक्षित एस-बैंड की सेटेलाइट सुविधा सेना को नेटवर्क आधारित अभियानों के भी संचालन की बेहतर सुविधा मुहैया कराएगी। इसके अलावा पायलट रहित टोही विमानों के बेड़े को भी सेटेलाइट संचालन प्रणाली से लैस करने पर काम जारी है। सेना ने अपने संचार तंत्र को 2017 तक पूरी तरह नेटवर्क आधारित बनाने का फैसला किया है। वैसे तो अभी भी हवा में उड़ता जहाज जमीन पर दौड़ते टैंक से संवाद स्थापित कर सकता है, लेकिन यह तंत्र पूरी तरह सक्षम नहीं है। रक्षा मंत्रालय की योजना तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल और सामंजस्य बनाने वाली नेटवर्क व्यवस्था स्थापित करने की है। इसके लिए एक डिफेंस कम्यूनिकेशन नेटवर्क के विकास का भी काम जारी है
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