Wednesday, September 14, 2011

ड्रैगन के दांत खट्टे करेगा लड़ाकू दस्ता रेमफोर

नई दिल्ली ड्रैगन की चुनौती से मुकाबले के लिए भारत जमीन और पानी दोनों जगह दुश्मनों के दांत खट्टे करने वाले लड़ाकू दस्ते तैयार कर रहा है। इसके लिए भारतीय सेना की एक इंफ्रेंट्री ब्रिगेड को एंफीबियस ब्रिगेड में तब्दील किया जा रहा है। वहीं आपात अभियानों के लिए एक पूरी इंफेंट्री डिविजन को रैपिड एंफीबियस फोर्स रेमफोर की शक्ल दी जा रही है। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक भारतीय सेना ने चीन के साथ पूर्वी मोर्चे की खास जरूरतों के मद्देनजर क्षमता विस्तार के ये फैसले लिए हैं। चीनी सैन्य चुनौतियों के मुकाबले भारतीय सेना का क्षेत्रीय दबदबा बनाने की कड़ी में सेना की 91 इंफेंट्री ब्रिगेड को एक एंफीबियंस ब्रिगेड में तब्दील किया जा रहा है। वहीं 54 इंफेंट्री डिविजन को भी रेमफोर (रैपिड एंफीबियस फोर्स) के तौर पर खड़ा किया जा रहा है। सैन्य अधिकारियों के मुताबिक रेमफोर अपने इलाके से बाहर के भी आपात अभियानों को पूरा कर सकेगी। इस तरह के दस्ते पानी के रास्ते दुश्मन के किसी भी सीमांत इलाके में आक्रामक धावा बोलने की क्षमता रखते हैं। गौरतलब कि बीते सप्ताह केंद्रीय मंत्रिमंडल की सुरक्षा संबंधी समिति ने जल और थल के सैन्य अभियानों की क्षमता बढ़ाने के लिए दो हजार करोड़ रुपये की लागत से आठ लैंडिग क्राफ्ट यूटिलिटी (एलसीयू) युद्धपोत बनाने की योजना को मंजूरी दी। सरहदी इलाके में नए सड़क व रेल नेटवर्क विस्तार, मध्यम दूरी की बैलेस्टिक मिसाइलों में बढ़ोतरी, इलाके में छाताधारी दस्तों की तादाद बढ़ाने और भारतीय सीमा से लगे क्षेत्रों में सैन्य क्षमता के इजाफे ने नई दिल्ली की चिंताएं बढ़ाई हैं। वहीं बीते दिनों दक्षिण चीन सागर में भारतीय नौसैनिक पोत आइएनएस एरावत के साथ पेश आए वाकये ने भारत को भविष्य की चुनौतियों का भी नया नमूना दिखा दिया है। जुलाई 2011 में भारतीय नौसैनिक पोत को चीनी नौसेना के नाम से भेजे रेडियो संदेश में दक्षिण चीन सागर में मौजूदगी के कारण बताने को कहा गया था। बीजिंग दक्षिण चीन सागर में लगातार अपनी दबंगई साबित करने में लगा है। भारतीय थिंक टैंक साउथ एशिया एनालिसिस ग्रुप से जुड़े विशेषज्ञ भास्कर रॉय कहते हैं कि दक्षिण चीन सागर भारत की रणनीतिक जरूरतों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है। खासकर दक्षिण पूर्व एशिया और पूर्वी एशिया से भारत के वाणिज्यिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को बनाए रखने के लिए दक्षिण चीन सागर का आवाजाही मार्ग खासा अहम है। इसका भारत के लिए सामरिक महत्व है

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