Friday, September 23, 2011

रेडक्रास का बीपीएल सीमा पर फिर से विचार का सुझाव

गरीबी रेखा की सरकारी परिभाषा पर उभरे विवाद के मद्देनजर विश्व के सबसे बड़ी लोकोपकारी संगठन इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेडक्रास (आइएफआरसी) ने गुरुवार को गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) जीवनयापन कर रहे लोगों के वर्गीकरण पर फिर से विचार करने का सुझाव दिया। यह भी कहा जा रहा है कि प्रस्तावित राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक देश में भूख को खत्म करने के लिए पर्याप्त नहीं है। रेडक्रास ने कहा, गरीबी रेखा से नीचे या ऊपर जीवन-यापन करने वाले लोगों के वर्गीकरण पर फिर से विचार करने की जरूरत है। आइएफआरसी व रेड क्रेसेंट सोसायटीज ने विश्व आपदा रपट-2011 में कहा, इसके बदले असंगठित क्षेत्र में उद्यम से जुड़े राष्ट्रीय आयोग के निष्कर्ष को अर्थपूर्ण सबके लिए भोजन कार्यक्रम का आधार बनाया जाना चाहिए जिसमें कहा गया है कि भारत के 83.6 करोड़ लोग खाने पर एक दिन में 20 रुपये से कम खर्च कर रहे हैं। रपट में यह भी सुझाव दिया गया कि प्रति व्यक्ति 35 किलो औसत राशन को भी बढ़ाने की जरूरत होगी। खाद्य बॉस्केट के विस्तार की भी जरूरत है जिसमें मोटा अनाज और दाल शामिल की जा सकें। आइएफआरसी ने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक भारत में भूख को खत्म करने में पर्याप्त नहीं होगा और सुझाव दिया कि गरीबों के लिए जीवनयापन का जरिया सुनिश्चित करने के लिए समग्र रवैया अपनाया जाना चाहिए तथा लक्ष्य प्राप्त करने के लिए पर्याप्त अनाज उत्पादन किया जाना चाहिए। विश्व खाद्य कार्यक्रम की निदेशक (भारत) मिहोको तामामुरा ने कहा, सिर्फ खाना ही इसका हल नहीं है .. सरकार को गरीब परिवारों को जीवनयापन का जरिया मुहैया कराने के लिए योजना शुरू करने और लगातार ज्यादा खाद्य उत्पादन की जरूरत है। आइएफआरसी ने सरकार को यह भी सलाह दी कि सरकार गांवों और उप जिला स्तर पर अनाज बैंक बनाए। आइएफआरसी और रेड क्रेसेंट सोसायटीज ने भारत में कृषि क्षेत्र और निवेश की सलाह दी। एजेंसी ने कहा, कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार है। पिछले कुछ वर्षो में भारत का कृषि उत्पादन स्थिर रहा है और लगातार बढ़ रही आबादी के अनुपात में इसमें बढ़ोतरी नहीं हुई है। रपट में कहा गया, तेजी से हो रहे शहरीकरण और जीविका की तलाश में ग्रामीण इलाकों से शहर आ रहे लोगों की बढ़ी तादाद कुछ ऐसे तथ्य हैं जिससे भारत में कृषि का विकास प्रभावित हो रहा है। भारत समेत विश्व भर में खाद्य कीमतों में तेजी पर चिंता जाहिर करते हुए रपट में कहा गया, जनवरी 2011 में भारत में खाद्य कीमतें साल भर के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। भारत के करोड़ों लोग खाने पर अपने परिवार की आय का 50 फीसदी खर्च करते हैं इसलिए खाने की कीमत में किसी भी तरह की बढ़ोतरी स्वास्थ्य, कल्याण और सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है

No comments:

Post a Comment