Thursday, September 8, 2011

तीस्ता पर ममता ने तोड़ा समझौते का पुल


नई दिल्ली तीस्ता जल बंटवारे पर भारत-बांग्लादेश के बीच बन रहा समझौते का पुल आखिरी ईंट रखने से ठीक पहले भरभरा कर टूट गया। समझौते से नाराज पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की ऐतिहासिक ढाका यात्रा का बॉयकाट कर केंद्र सरकार को कदम वापस खींचने पर मजबूर कर दिया। हालांकि प्रधानमंत्री ने ढाका रवाना होने से ठीक पहले ममता से फोन पर बात कर उन्हे आश्वस्त किया कि उनकी सहमति बिना कोई फैसला नहीं होगा। इसके बावजूद तीस्ता समझौते को मुकाम तक पहुंचाने की कोशिशें ममता की जिद के सामने दम तोड़ती नजर रही हैं। इसके बावजूद केंद्र सरकार ने तीस्ता जल बंटवारे की उम्मीदों को दरकिनार नहीं किया है। यह बात अलग है कि समझौते का कोई रास्ता उनके पास भी नहीं है। खुद विदेश सचिव रंजन मथाई भी इस मुद्दे पर सिर्फ इतना ही कहा कि बांग्लादेश और ममता को मंजूर समझौते की राह निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, बांग्लादेश को ज्यादा पानी देने से नाराज ममता के रुख से पैदा हुई सरकार की परेशानियां वह नहीं छिपा सके। विदेश सचिव ने कहा कि पानी का मसला दोनों देशों के लिए बेहद संवेदनशील है। हम सभी पक्षों को मंजूर समझौते पर सहमति बनाने में जुटे हैं। हमारी संघीय नीति में कुछ भी राज्य सरकार से सहमति के बगैर कुछ किया गया है और ही किया जाएगा। जो भी अंतिम समझौता होगा वह राज्य सरकार की सहमति से होगा। ठीक इसी तरह वह बांग्लादेश को भी मंजूर होना चाहिए। एक सवाल के जवाब में मथाई ने कहा, जाहिर तौर पर यह अहम दौरा है। इसीलिए, प्रधानमंत्री अपने साथ पांच मुख्यमंत्रियों को भी लेकर जा रहे थे। चार मुख्यमंत्रियों के साथ एक और राज्य की मुख्यमंत्री होतीं तो अच्छा ही होता। हालांकि, ममता अब दौरे पर नहीं जा रही हैं। यह भी तय है कि 12 साल बाद हो रही किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यात्रा को एतिहासिक बनाने की सारी कोशिशें असफल हो चुकी हैं। तीस्ता जल बंटवारे का समझौता इस यात्रा का सबसे अहम पड़ाव था। सरकार की कोशिश है कि सम्मानजनक रास्ता निकल आए। भले ही समझौता हो, लेकिन कुछ बात आगे बढ़े। 52 और 48 फीसदी वाले बंटवारे के अनुपात पर पश्चिम बंगाल को कुछ और दरियादिली दिखाने और बांग्लादेश की शेख हसीना सरकार को थोड़ा और नीचे लाने का प्रयास किया जा रहा है। कोशिश यह है कि इस यात्रा के दौरान ही तीस्ता पर कुछ घोषणा हो जाए और बाद में उसे अमली जामा पहना दिया

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