Tuesday, September 20, 2011

सिक्किम के लोगों को राहत का इंतजार

नई दिल्ली भूकंप की तबाही से जख्मी सिक्किम में जानमाल के नुकसान का सही अंदाजा अब भी नहीं लग पा रहा है। हालांकि बारिश व भूस्खलन के बावजूद सेना के 120 कालम (2400 फौजी), आइटीबीपी के 700 जवान, एसएसबी-बीआरओ के साथ बचाव कार्य में जुटे हैं पर सड़क संपर्क टूटने से उत्तरी सिक्किम अब भी पहुंच से दूर हैं। बागडोगरा से गंगटोक की सड़क खुलने के बाद दिल्ली से भेजी गईं राहत टीमें 24 घंटे बाद गंगटोक तक तो पहुंच गईं, पर गंगटोक-नाथुला और गंगटोक-चांगथांगकी मुख्य मार्ग अब भी बंद है। नुकसान का जायजा लेने को हवाई सर्वेक्षण कराया गया पर खास सफलता नहीं मिली। हालांकि दिन ढलने के साथ ही मृतकों की संख्या 66 और घायलों की तादात सौ का आंकड़ा पार कर गई है। हजारों लोग शिविरों में शरण लिए हैं। बचाव व राहत कार्यो की निगरानी कर रहे केंद्रीय गृह सचिव आर के सिंह ने कहा, जानमाल के सही नुकसान के आंकलन के लिए भूकंप प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण जरूर हुआ है, लेकिन ऊंचे पहाड़ी क्षेत्र में दूर- दूर फैले गांवों में हुए नुकसान का सही आंकलन वहां जाकर ही हो सकता है। राज्य सरकार ने जिलों में तैनात अफसरों को गांव-गांव जाकर क्षति का जायजा लेने का निर्देश दिया है ताकि उन तक राहत सामग्री पहुंचाई जा सके। उन्होंने कहा, केंद्र से गई राहत टीमें मौके पर पहुंचने लगी हैं। साढ़े चार टन दवाइयों के साथ 30 डाक्टरों की टीम भी गंगटोक के रास्ते में है। सिंह ने दावा किया कि राज्य में बिजली, दूरसंचार सेवाओं को काफी हद तक बहाल कर दिया गया है। दूरदराज के इलाकों में फंसे पीडि़तों तक हवाई रास्ते से खाद्य सामग्री पहुंचाने की तैयारी कर ली गई है। बंगाल सरकार को खाद्य सामग्री के पैकेट तैयार रखने को कहा गया है। सिलीगुड़ी-बिहार के पूर्णिया हवाई अड्डे को इस काम के चिन्हित किया गया है। सिक्किम के मंगन जिले में विमान से खाद्य पैकेट गिराये भी गए हैं। भूकंप पीडि़तों को राज्य के अलावा केंद्र ने भी राहत पैकेज देने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री ने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख और घायलों को एक-एक लाख देने की घोषणा की है। (पेज-5 भी देखें

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