नई दिल्ली भारत और बांग्लादेश के बीच करीब चार दशक से अधूरी पड़ी सीमा रेखा के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की ढाका यात्रा में निर्धारण का रास्ता बन गया है। बारह वर्ष बाद भारतीय पीएम के ढाका दौरे में एक दूसरे की सरहद में स्थित एनक्लेव कहलाने वाली बसावटों के निपटारे पर भी मुहर लगनी है। मंगलवार से शुरू हो रही पीएम की दो दिनी यात्रा में आधा दर्जन से ज्यादा समझौते अपेक्षित हैं। रवानगी से पहले पीएम ने कहा कि इस दौरान होने वाले ठोस समझौते दोनों देशों की साझेदारी को नए पायदान पर ले जाएंगे। प्रधानमंत्री की यात्रा कार्यक्रम का ब्यौरा दे रहे विदेश सचिव रंजन मथाई ने बताया कि सीमा विवाद सुलझाने के लिए चल रही कवायद को लाभ या हानि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। बल्कि यह 1974 में हुए समझौते को ही पूरी तरह क्रियान्वित करनी की प्रक्रिया है। गौरतलब है कि दोनों देश 1974 में इंदिरा-मुजीब समझौते की कड़ी में होने वाले एक पैकेज प्रोटोकॉल के सहारे पांच प्रमुख मुद्दों का समाधान निकालने की कोशिश करेंगे। इसमें अभी तक तय न हो सकी साढ़े छह किमी सीमा का निर्धारण, एक-दूसरे की जमीन पर स्थित बसाहटों और जमीन भूमि पर फैसला, बांग्लादेश को तीन बीघा गलियारे के इस्तेमाल की इजाजत आदि शामिल हैं। सरकारी सूत्रों के मुताबिक इस कवायद में करीब दस हजार एकड़ भूमि प्रभावित होगी। उल्लेखनीय है कि बांग्लादेश की भूमि पर भारत के 111 एनक्लेव हैं वहीं भारत में बांग्लादेश के 51। दोनों देशों के संयुक्त सर्वेक्षण के मुताबिक इन बसाहटों में 50 हजार से अधिक की आबादी रहती है जिनकी अदला-बदली का फैसला होना है। इसके अलावा एक दूसरे के क्षेत्राधिकार में आने वाली भूमि पर भी फैसला होना है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि वास्तविक समझौते में दोनों देश कितना भू-भाग एक दूसरे को देंगे। कई मायनों में ऐतिहासिक कहे जा रहे इस दौरे में प्रधानमंत्री के साथ बांग्लादेश से सीमा साझा करने वाले चार पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्री भी होंगे। वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी का कार्यक्रम ऐन मौके पर रद हो गया है। रवानगी के पहले जारी बयान में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और बांग्लादेश के लिए आपसी रिश्तों का नया अध्याय शुरू करने का यह ऐतिहासिक मौका है। पीएम के दौरे में रिश्तों में अक्सर खटास का सबब बनने वाले आतंकवाद, सुरक्षा जैसे मसलों को सुलझाने पर जोर है। गृह मंत्रालय सूत्रों ने संकेत दिए कि दोनों देशों के बीच प्रत्यपर्ण संधि पर भी मुहर लग जाएगी। इससे बांग्लादेश में बंद उल्फा सरगना अनूप चेतिया को भारत लाने का रास्ता साफ हो सकेगा। उल्लेखनीय है कि जुलाई 2011 में गृहमंत्री पी चिदंबरम के दौरे में ढाका ने चेतिया के प्रत्यपर्ण पर भारत को भरोसा दिलाया था। छोटी-बड़ी 54 नदियों का जल साझा कर रहे दोनों मुल्कों के बीच जल विवाद निपटारे की कड़ी में तीस्ता का मामला भले फिलहाल न सुलझ पा रहा हो लेकिन फेनी के पानी पर समझौते का राह निकलने की उम्मीद है। इसके अलावा भारत से बांग्लादेश के व्यापक बिजली खरीद के लिए भी एक करार होना है। यातायात व संपर्क सुविधाएं बढ़ाने के लिए संभावित करारनामा नेपाल और भूटान के साथ भारत और बांग्लादेश का सड़क संपर्को बढ़ाएगा।
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