Thursday, September 29, 2011

ड्रैगन ने दक्षिणी चीन सागर पर फिर जताया हक


चीन ने दक्षिणी चीन सागर और उसके आसपास के द्वीपों पर फिर दावा जताया है। भारत पर निशाना साधते हुए चीन की सेना ने बुधवार को कहा कि वियतनाम, फिलीपींस और अन्य एशियाई देशों द्वारा मामले का वैश्विकरण किया जा रहा है। दक्षिण चीन सागर में तेल उत्खनन के काम में विदेशी सेनाओं की मौजूदगी से यह विवाद और गहरा जाएगा। चीन की सेना के प्रवक्ता गेंग यानशेंग ने कहा, दक्षिण चीन सागर और उसके आसपास के द्वीपों पर चीन का आधिपत्य है। मामले के वैश्विकरण का कोई भी प्रयास विवाद को और जटिल बना देगा। चीन हमेशा द्विपक्षीय बातचीत के जरिये शांतिपूर्ण तरीके से मामले का हल खोजने का हिमायती रहा है। चीन, वियतनाम और फिलीपींस के अलावा मलेशिया, ताइवान और ब्रुनेई भी दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा करते हैं। सभी की नजर दक्षिण चीन सागर में तेल और गैस के प्रचुर भंडार पर है। पिछले दिनों वियतनाम ने भारतीय कंपनी ओएनजीसी विदेश को दो ब्लॉक में तेल उत्खनन का काम सौंपा है। चीन ने इस पर एतराज करते हुए आरोप लगाया था कि वियतनाम उसके आधिपत्य का उल्लंघन कर रहा है। इस विवाद के बीच ऐसी खबरें भी आई थीं कि चीन की नौसेना ने दक्षिण चीन सागर में मौजूद भारतीय युद्धपोत विराट को तत्काल वह क्षेत्र छोड़ने को कहा था। बाद में हालांकि चीन और भारत ने इन खबरों का खंडन किया था। भारत-अमेरिका समुद्री रक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमत वाशिंगटन : क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि के लिए भारतीय हिंद महासागर में बिछे केबलों की सुरक्षा को महत्वपूर्ण बताते हुए भारत और अमेरिका ने समुद्री सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। अमेरिका में भारत की राजदूत निरूपमा राव ने कहा, विश्व ऊर्जा आपूर्ति का पांचवा हिस्सा हिंद महासागर से गुजरता है। हिंद महासागर में बिछे केबलों की सुरक्षा न सिर्फ भारत और अमेरिका के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है। समुद्री डकैती से हम सभी को समान रूप से खतरा है। इसलिए हम समुद्री सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए हैं।

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