विकासशील देशों में वर्ष 2010 के हथियार खरीदारों की सूची में भारत शीर्ष पर है। अमेरिकी कांग्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के ने 5.8 अरब डॉलर (लगभग 286.92 अरब रुपये) के हथियार खरीदे हैं। इस सूची में ताइवान 2.7 अरब डॉलर (लगभग 133.57अरब रुपये) की हथियार खरीद के साथ दूसरे स्थान पर है, जिसके बाद सउदी अरब और पाकिस्तान का स्थान है। रिपोर्ट के मुताबिक, यद्यपि भारत के हथियार बाजार में रूस ने अपना वर्चस्व कायम रखा है लेकिन भारत ने हथियारों में विविधता के लिए इजरायल, फ्रांस और अमेरिका से भी उच्च तकनीक के हथियार लेने शुरू कर दिए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि विकासशील देशों को हथियार स्थानांतरण करने के समझौते में अमेरिका पहले और रूस दूसरे स्थान पर हैं। 2010 में पूरी दुनिया में हुए हथियार खरीद-फरोख्त के समझौतों का मूल्य 40.4 अरब डॉलर (लगभग 1.9 खरब रुपये) था। रिपोर्ट के अनुसार यह 2009 में हुए समझौतों के मुकाबले 38.1 प्रतिशत कम है और 2003 के बाद वैश्विक स्तर पर किए गए सबसे कम हथियार समझौते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि रूस द्वारा दक्षिण एशिया को आधुनिक हथियारों की आपूर्ति अमेरिका के लिए चिंता का विषय है क्योंकि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव की स्थिति है। इसके अलावा इसमें यह भी कहा गया है कि अमेरिका की प्रमुख नीति है कि इन क्षेत्रों में अस्थिर हथियार दौड़ को रोका जा सके, जिसके लिए अमेरिका ने हाल ही मैं भारत के साथ सैन्य सहयोग का विस्तार किया है।
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