पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार ने कहा कि पाकिस्तान कश्मीर समेत भारत के साथ हर मुद्दे को सुलझाना चाहता है। हिना ने कहा कि भारत के साथ वार्ता जारी है। उम्मीद है कि यह अबाध और फलदायी होगी। वह 193 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र महासभा को मंगलवार को संबोधित कर रही थीं। 34 वर्षीय खार ने कहा, मुझे खुशी है कि दोनों देश के बीच बातचीत जारी है, जिसे हम हर हाल में सफल और एक-दूसरे के लिए लाभकारी बनाना चाहते हैं। हिना ने कहा कि पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र के एजेंडे में सबसे पुराने कश्मीर सहित सभी लंबित मुद्दों को भारत के साथ सुलझाने के लिए उत्सुक है। उन्होंने कहा, कश्मीरी लोगों के मानवाधिकारों की रक्षा करने के लिए शांति प्रस्ताव लाना जरूरी है। खार ने कहा कि परमाणु हथियार संपन्न भारत और पाकिस्तान पर आपसी विश्वास, हथियारों की स्पद्र्धा से बचने और रणनीतिक स्थिरता को बढ़ाने के लिए साथ मिलकर काम करने की भारी जिम्मेदारी है। उन्होंने वादा किया कि लोकतांत्रिक देश के तौर पर पाकिस्तान विश्व शांति और समृद्धि के लिए अपने प्रयास जारी रखेगा। आइएसआइ का बचाव हिना रब्बानी खार ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ का हक्कानी नेटवर्क से संबंधों के आरोप का बचाव किया। खार ने कहा कि पाक अपनी भूमि से आतंक खत्म करने के लिए दृढ़ संकल्प है और पड़ोसियों को महसूस होने वाले खतरे से अवगत है। उन्होंने कहा, यदि मैं आतंकवाद खत्म करने में पाकिस्तान की कुर्बानी और समझौते गिनाने लगी तो सभी को यहां अगले वर्ष सितंबर तक बैठना पड़ेगा। हम आतकंवाद को हल्के में नहीं ले सकते क्योंकि लंबे समय से हमें इससे नुकसान हो रहा है। संयुक्त राष्ट्र महासभा का अधिवेशन संपन्न संयुक्त राष्ट्र महासभा का 66वां अधिवेशन समाप्त हो गया है। पिछले सप्ताह बुधवार को बुलाए गए इस अधिवेशन की थीम विवादों के शांतिपूर्ण समाधान में मध्यस्थता की भूमिका था। एक सप्ताह तक चले महासभा के अधिवेशन में 120 देशों के राष्ट्र प्रमुखों सहित संयुक्त राष्ट्र के 193 प्रतिनिधियों ने वर्ष 2015 तक शताब्दी विकास लक्ष्य पूरा करने को लेकर भाषण दिए। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 66वें अध्यक्ष नासिर अब्दुल अजीज अल नासिर ने कहा कि सदस्य देशों को अपनी प्रतिबद्धताओं को अमल में लाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने कहा, हमारी संयुक्त जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए आवश्यक है कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए हम आपसी सहमति बनाएं। बराबर संपर्क में रहते हैं ओबामा-मनमोहन अमेरिका के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लेकर राष्ट्रपति बराक ओबामा के मन में पूरा सम्मान और प्रशंसा का भाव है और दोनों नेता बराबर संपर्क में रहते हैं। जन मामलों के सहायक विदेश मंत्री माइक हैमर ने कहा, मजबूत संबंधों के विकास के लिए भारत के साथ साझेदारी पर हमारा ध्यान जारी है। उन्होंने कहा, आपको मालूम है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के लिए राष्ट्रपति बराक ओबामा के मन में पूरा सम्मान और प्रशंसा का भाव है और वे अक्सर संपर्क में रहते हैं ताकि जो गति बनी है उसे बरकरार रखा जा सके। विदेशी पत्रकारों के साथ बातचीत में एक सवाल के जवाब में हैमर ने कहा, भारत अमेरिकी साझेदारी का सबसे खूबसूरत हिस्सा यह है कि राष्ट्रपति बिल क्लिंटन से यह वास्तव में शुरू हुआ और राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के शासनकाल में यह जारी रहा और राष्ट्रपति ओबामा के कार्यकाल में इसने गति पकड़ी है। उन्होंने कहा कि अनेक मुद्दों पर ओबामा प्रशासन का भारत के साथ उत्कृष्ट सहयोग जारी है। तुर्की-ईरान की बढ़ती दोस्ती से अमेरिका नाराज तुर्की-ईरान के बीच बढ़ती नजदीकियों से अमेरिका इतना नाराज हो गया है कि उसने तुर्की को चेतावनी दी है कि यदि अंकारा और तेहरान के बीच दोस्ती और बढ़ी तो वह दंडात्मक कार्रवाई कर सकता है। अंकारा और तेहरान के बीच बढ़ते संबंधों के कारण ही अमेरिका ने शीर्ष कोष अधिकारी रोजर कोहेन को अंकारा भेजा। उन्होंने वहां कहा, यदि दोनों देशों के बीच ऐसे ही व्यापार बढ़ा तो यह अमेरिका की ईरान पर प्रतिबंध लगाने की इच्छा के खिलाफ होगा। पिछले कुछ साल में ईरान और तुर्की ने आपस में ऊर्जा, सुरक्षा, व्यापार, शिक्षा और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया है। तुर्की संसद में विदेशी मामलों की समिति के प्रमुख वौनकेन बोजकिर ने अमेरिकी धमकी को खारिज करते हुए कहा कि तुर्की अब दस साल पहले वाला देश नहीं है। उन्होंने कहा कि सिर्फ संयुक्त राष्ट्र ही किसी देश पर प्रतिबंध लगा सकता है, अमेरिका नहीं। यदि संयुक्त राष्ट्र ऐसा करता है तो तुर्की इसका पालन करेगा।
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