Wednesday, September 21, 2011

सिक्किम में भूकंप के जख्म गहराए

 नई दिल्ली हिमालय की गोद में बसे शांत-सुरम्य सिक्किम को भूकंप ने जो जख्म दिए हैं, उनके निशान काफी दिनों तक पीड़ा का एहसास कराएंगे। भूकंप के तीसरे दिन भी तमाम दूरदराज के इलाकों में राहत दल पहुंचने में कामयाब नहीं हो पाए। भूकंप के केंद्र के करीब स्थित मंगन में मंगलवार को हेलीकॉप्टर से पहुंचे सेना के राहत दल को वहां भारी तबाही देखने को मिली। प्रदेश में मृतकों की संख्या का आंकड़ा बढ़कर 53 हो गया है। केंद्रीय गृह सचिव आरके सिंह ने यह संख्या बढ़ने की आशंका जताई है। इस प्रकार से देश में भूकंप से मरने वालों की कुल संख्या 92 हो गई है। इस बीच, यहां रक्षा बल अब तक 3,000 से भी ज्यादा लोगों की जान बचा चुके हैं। रविवार शाम आए भूकंप के बाद स्थितियों को सामान्य बनाने की कवायद तेज है, बावजूद इसके बुधवार शाम तक सर्वाधिक प्रभावित सिक्किम के दूरदराज के इलाकों में राहत दल नहीं पहुंच पाए। मौसम अभी खराब है और सड़कें रुकी हुई हैं। भूकंप से आई दरारों और भूस्खलन से अभी भी प्रदेश के तमाम इलाकों में सड़क मार्ग अवरुद्ध हैं। सीमा सड़क संगठन और अन्य एजेंसियां संसाधनों के इस्तेमाल और विस्फोट करके सड़कों पर से अवरोध हटा रही हैं। राहत दल जिन नए इलाकों में पहुंच रहे हैं, वहां पर उन्हें तबाही का आलम मिल रहा है। तमाम मकान पूरी तरह से ध्वस्त हो गए हैं, जबकि ज्यादातर इमारतें क्षतिग्रस्त हैं। बारिश और ठंड से बचने के लिए लोगों ने मंदिरों या क्षतिग्रस्त भवनों में ही शरण ले रखी है। राज्य प्रशासन ने लोगों से क्षतिग्रस्त भवनों में न जाने की अपील की है। भूकंप के केंद्र के नजदीक स्थित सिंघतम इलाके में पहुंचने की कोशिश की जा रही है। वहां पर भी भारी नुकसान होने की खबर है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राहत सामग्री और दवाएं लेकर बुधवार को पड़ोसी राज्य की राजधानी गंगटोक पहुंच गईं। उन्होंने वहां पर हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है। हेलीकॉप्टरों के माध्यम से रक्षा बल अब तक सिक्किम के भूकंप प्रभावित क्षेत्रों से 3,000 से ज्यादा लोगों को बचा चुके हैं। सैन्य अभियान, उपमहानिदेशक ब्रिगेडियर रणवीर सिंह ने नई दिल्ली में बताया, वायु सेना की मदद से आठ से 13 हेलीकॉप्टरों को बचाव कार्य सेवा में लगाया गया है। घायलों के इलाज के लिए 20 चिकित्सा शिविर बनाए गए हैं, जिनमें 370 लोगों का इलाज हो रहा है। आठ राहत शिविर स्थापित किए गए हैं, जिनमें 2,700 से भी ज्यादा लोगों को आश्रय दिया गया है। दहशत से उबर नहीं पा रहे : सिक्किम के लोग भूकंप की दहशत से अब तक नहीं उबर पाए हैं। बहुत से लोग डर के चलते अब भी अपने घरों में नहीं घुस पा रहे। लाचन गांव के 74 वर्षीय देंगजी शेरपा ने कहा, अगर दूसरी बार भूकंप आ गया, तो मेरा घर ढह जाएगा। इसलिए हम खुले में ही इंतजार कर रहे हैं। बहुत से लोग मलबे में से अपना घरेलू सामान तलाशते नजर आ रहे हैं। कई गांवों के बारे में कोई जानकारी नहीं भूकंप से प्रभावित क्षेत्रों में कई ऐसे गांव और इलाके भी हैं जहां की स्थिति के बारे में अब तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। इनमें कई गांव ऐसे हैं जो पर्यटकों के बीच खासे लोकप्रिय रहे हैं। लाचुंग गांव के प्रधान चोंग नगीन ने कहा कि उस दिन वह गंगटोक में थे और वह अब तक अपने गांव नहीं पहुंच सके हैं। उनका गांव पर्यटकों के बीच खासा लोकप्रिय रहा है और वहां कई होटल और गेस्टहाउस हैं। उन्होंने कहा, मेरे सहायक तेंदीन ने खबर भेजी है कि स्थिति गंभीर है। मुझे नहीं मालूम कि कितने लोग हताहत हुए हैं। उन्होंने कहा कि करीब 70 श्रमिक एक सड़क बनाने में लगे हुए थे और रविवार से उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। वह अपने गांव पहुंचने के लिए बेचैन हैं लेकिन सड़क संपर्क कट जाने के कारण वह नहीं जा पा रहे हैं। बिहार में हालात सामान्य की ओर भूकंप से प्रभावित बिहार के जिलों में हालात सामान्य हो रहे हैं। क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत का काम शुरू हो गया है। किसी नए नुकसान की खबर नहीं है। यहां पर भूकंप से 17 लोगों की मौत हो गई थी। झारखंड के जिन इलाकों में भूकंप से नुकसान हुआ था, वहां पर जीवन ढर्रे पर आ गया है। साहेबगंज जिले में एक व्यक्ति की मौत हुई थी

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