Monday, May 9, 2011
पाक के बचाव में उतरा अमेरिका
पाकिस्तानी सेना की नाक के नीचे पिछले हफ्ते मारे गए अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन को छुपा कर रखने के आरोप से पाकिस्तान सरकार को थोड़ी राहत मिली है। पाकिस्तान के बचाव में उतरे अमेरिका ने उसे क्लीनचिट देते हुए कहा कि अब तक इस बात के कोई सबूत नहीं मिले हैं कि लादेन के एबटाबाद में छुपे होने की जानकारी पाकिस्तानी राजनेताओं, सेना और वहां की खुफिया एजेंसी को थी। हालांकि अमेरिका ने यह जरूर साफ कर दिया कि अभी इस मामले में जांच जारी रहेगी। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से लगभग 60 किमी उत्तर में स्थित एबटाबाद में लादेन पिछले कुछ वर्षो से रह रहे लादेन को अमेरिकी सील्स कमांडो ने हफ्ते भर पहले मार गिराया था। अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार टॉम डोनीलोन ने रविवार को पत्रकारों से कहा, मैं आप लोगों को बताना चाहता हूं कि मुझे ऐसे कोई सबूत नहीं मिले हैं, जिससे हम कह सकें कि पाकिस्तान के राजनीतिक, सेना या फिर खुफिया नेतृत्व को ओसामा के उसके देश में छुपे होने की जानकारी थी, लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि इसकी जांच जारी रहेगी। टॉम से पूछा गया था कि क्या पाकिस्तान अलकायदा सरगना को शरण देने का दोषी था। डोनीलोन ने कहा, पाकिस्तानी ने कहा है कि वह जांच करने जा रहा है। वर्तमान में पाकिस्तान में यह बहुत बड़ा मुद्दा है। पाकिस्तान में यह सब कैसे हुआ? हम इसकी जांच चाहते हैं। हम पाकिस्तानियों के साथ काम करना चाहते हैं और इसके लिए उस पर दबाव भी बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी अधिकारी भी चाहते हैं कि लादेन जिस परिसर में मारा गया है और अमेरिकी अधिकारियों ने वहां से जो जानकारियां हासिल की हैं, वे उन्हें उपलब्ध कराई जाएं। इसमें उसकी तीन पत्नियां भी हैं जो इस समय पाकिस्तान की ही कस्टडी में हैं। हालांकि उन्होंने कहा, अमेरिका-पाकिस्तान रिश्तों में कुछ तनाव होने के बावजूद हमने अपने आतंकवाद विरोधी प्रयासों में पाकिस्तान के साथ मिलकर बहुत बारीकी से काम किया है। हमने अधिकतर आतंकियों और अतिवादियों को या तो कब्जे में ले लिया या फिर मारे गिराया। मालूम हो कि पाकिस्तान बहुत कुछ अमेरिका की अरबों डॉलर की सहायता पर निर्भर है। शनिवार को वरिष्ठ पाकिस्तानी अधिकारी ने कहा था कि अमेरिकी नेवी सील के मारे जाने से पहले बिन लादेन पाकिस्तान में सात वर्षो से अधिक समय से रह रहा था। इससे इस बात के संदेह गहरा गए हैं कि पाकिस्तान की इंटर सर्विस इंटेलीजेंस जासूसी एजेंसी, जिसका आतंकी संगठनों से रिश्तों का पुराना इतिहास रहा है, क्या उसके बिन लादेन के साथ या फिर कम से कम उसके कुछ एजेंटों से संबंध थे। हालांकि पाकिस्तान ने इस सब संदेहों को बकवास करार दिया है और कहा कि 11 सितंबर 2011 के हमले के बाद अमेरिका के आतंकियों के खिलाफ युद्ध का समर्थन करने की उसने बहुत बड़ी कीमत चुकाई है। डोनीलोन ने कहा कि लादेन का मारा जाना आतंकी संगठन अलकायदा के सूचना तंत्र के लिए बड़ा झटका है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष के अंत में प्रशासन के आकलन के बाद निश्चित हो गया था कि 2001 के बाद से अलकायदा अपने सबसे कमजोर रूप में है, यद्यपि वह अब भी खतरनाक है। उन्होंने कहा, पाकिस्तानी परिसर में हमला करने और ओसामा के मारने का कदम उठाने का फैसला हमने लिया क्योंकि वे अब भी बेहद कमजोर स्थिति में हैं।
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