Saturday, May 7, 2011

अमेरिका को सता रहा स्टील्थ हेलीकॉप्टर का रहस्य खुलने का डर

ओसामा बिन लादेन को मारने के लिए एबटाबाद में चलाए गए अभियान में अमेरिका ने स्टील्थ हेलीकॉप्टर (रडार से बचने में सक्षम) का प्रयोग किया था। अमेरिका ने इस खास हेलीकॉप्टर को अब तक दुनिया से नजरों से दूर रखा था, लेकिन लादेन के खात्मे के लिए उसे इसकी जरूरत थी, इसलिए पहली बार इसका प्रयोग किया गया। अमेरिका अभियान सफल रहा और इस खास हेलिकॉप्टर की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। ऐसे में अमेरिका हेलीकॉप्टर को डर सता रहा है कि उसके स्टील्थ हेलीकॉप्टर का रहस्य चीन के हाथ न लग जाए। उसे ज्यादा चिंता इसलिए भी हो रही है, क्योंकि एबटाबाद में कार्रवाई के दौरान एक स्टील्थ हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था जिसका मलबा अमेरिका ने पाकिस्तान में ही छोड़ दिया था। पाकिस्तान, चीन के साथ मिलकर जेएफ-17 थंडर लड़ाकू विमान की परियोजना पर काम कर रहा है। ब्रिटिश समाचार पत्र डेली टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी नौसेना के सील्स कमांडो ने पाकिस्तान के एबटाबाद में अपने मिशन के लिए स्टील्थ हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल इसलिए किया था, ताकि वे पाकिस्तानी रडारा की पकड़ में न आ पाएं और लादेन के ठिकाने तक पहुंचने के दौरान किसी को कुछ पता न चल सके। एबटाबाद में कार्रवाई के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर का पिछला हिस्सा सलामत रह गया था और पाकिस्तानी सेना ने उसे कब्जे में ले लिया है। अब अमेरिका को चिंता सता रही है कि कहीं पाकिस्तान हेलीकॉप्टर के पिछले हिस्से को लौटाने के अमेरिकी अनुरोध को खारिज न कर दे। लादेन की पाकिस्तान में मौत के बाद वह पूरी दुनिया के निशाने पर है और अमेरिका के साथ उसकी तनातनी चल रही है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पाकिस्तान इसे लौटा भी देता तो भी रहस्य खुलने का डर बना रहेगा, क्योंकि पाकिस्तानी विशेषज्ञों को हेलीकॉप्टर का निरीक्षण करने से तो अमेरिका नहीं रोक सकता। आखिरकार हेलीकॉप्टर का पिछला हिस्सा उसके ही कब्जे में है। वैसे भी पाकिस्तान और चीन की दोस्ती किसी से छिपी नहीं। अगर पाक के पास कोई जानकारी होगी तो वह चीन से जरूर साझा करेगा। ब्लैकहॉक का आधुनिक संस्करण है स्टील्थ इस हेलीकॉप्टर की खुफिया क्षमता इस बात से स्पष्ट हो जाती है कि लादेन के पड़ोस के लोगों को उसकी आवाज तब तक नहीं सुनाई दी, जब तक कि वह उनके सिर पर नहीं पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस हेलीकॉप्टर का आकार और उसकी डिजाइन आरएएच-66 कमांचे हेलीकॉप्टर जैसी ही है। संभव है कि उसी तकनीक को ब्लैकहॉक में इस्तेमाल किया गया हो। परिवर्धित पिछले हिस्से ने शोर को कम कर दिया होगा और लगता है कि स्टील्थ लड़ाकू विमानों पर इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री की परत उस पर चढ़ा दी गई। अखबार ने जेन्स डिफेंस वीकली के संपादक पीटर फेलस्टीड के हवाले से कहा, अमेरिका हेलीकॉप्टर के मलबे को हर हाल में वापस लेना चाहेगा, लेकिन उसकी प्रौद्योगिकी के चीन पहुंचने को लेकर भी चिंताएं होंगी। इस तरह की प्रौद्योगिकी इस समय उनके लिए बहुत उपयोगी होगी। इस समय अमेरिका और चीन के बीच हथियारों को लेकर जबर्दस्त होड़ लगी है, लेकिन ड्रोन और स्टील्थ के दम पर अमेरिका आगे है।

No comments:

Post a Comment