Friday, May 6, 2011

अपनों के ही अनगिनत सवाल

लेखक ओसामा के पाकिस्तान में मिलने और मारे जाने के बाद घरेलू स्तर पर उठ रहे सवालों से इस्लामाबाद की बेचैनी बढ़ती देख रहे हैं…

अमेरिकी ख़ुफिया एजेंसी सीआइए के प्रमुख लियोन पेनेटा के बयान से बौखलाई पाकिस्तान सरकार के विदेश सचिव ने कहा है कि अमेरिका को आरोपों से बाज आना चाहिए। यह समय आरोपों का नहीं है। लियोन पेनेटा ने कहा था कि ओसामा के खिलाफ कार्रवाई की कोई भी ख़ुफिया जानकारी पाकिस्तान के साथ इसलिए नहीं बांटी गई थी, क्योंकि इससे कार्रवाई के विफल होने का खतरा था। इसका मतलब यह है कि अगर पाकिस्तान सरकार को ओसामा के खिलाफ ऑपरेशन के बारे में बताया जाता तो सरकार खुद ओसामा को यह सूचना देकर उसे बचा लेती। इस हद तक अविश्वास होने के बावजूद आतंकवाद के खिलाफ जारी युद्ध में अमेरिका पाकिस्तान कब तक, कैसे, क्यों और कहां तक चल सकेंगे, उन सवालों का उत्तर भी जल्दी मिलने वाला है। पाकिस्तान ने यहां तक कह दिया है कि अमेरिका ने पाकिस्तान की ख़ुफिया एजेंसी आइएसआइ की जानकारी के आधार पर ही ऑपरेशन चलाकर ओसामा को मारा है, लेकिन अब दुनिया पाकिस्तान की किसी भी बात का भरोसा करने को तैयार नहीं है। बात केवल ओसामा बिन लादेन तक ही हो तो कोई मान भी ले, लेकिन अबु ज़ुबेद से लेकर ओसामा तक सब आतंकवादी पाकिस्तान की राजधानी के आसपास से कैसे गिरफ्तार हुए या मारे गए, यह एक बड़ा सवाल है। अमेरिका कह चुका है कि अगर इन सवालों का उत्तर नहीं आया तो पाकिस्तान के साथ संबंधों पर पुनर्विचार किया जा सकता है। पाकिस्तान समझ सकता है कि इस अमेरिकी धमकी के क्या नतीजे हो सकते हैं। 11 सितंबर, 2001 को हुए आतंकी हमले के छह माह बाद जब पाकिस्तान में दोनों देशों ने अभियान शुरू किया तो ओसामा और अल जवाहिरी के बाद तीसरे नंबर का आतंकवादी अबु ज़ुबेद पाकिस्तान के शहर फैसलाबाद से पकड़ा गया, जिसे बाद में मुशर्रफ सरकार ने अमेरिका के हवाले कर दिया। छह माह बाद एक और बड़े आतंकवादी को पाकिस्तान की एजेंसियों ने कराची से गिरफ्तार किया। यह था अलकायदा जर्मनी का प्रभारी रमजी बिन शीबबा। उनसे बड़े आतंकवादी खालिद शेख मोहम्मद को मार्च 2002 में इस्लामाबाद से पांच किलोमीटर की दूरी से गिरफ्तार किया गया। अहमद खलफान को पंजाब प्रांत से पकड़ कर अमेरिका को सौंप दिया गया। अबु फराज अल्लबी को पकड़ा गया। अबु लेस ललबी को मारा गया और वह भी पाकिस्तान में। करीब एक साल पहले मई 2010 में मुस्तफा अबु यजीद को मारा गया। अब ओसामा के भी पाकिस्तान में मारे जाने के बाद अब सवाल उठता है कि आखिर इतने आतंकी पाकिस्तान में मिले हैं तो शेष बचे आतंकवादी कहां हैं? इसके अलावा और भी कई सवाल हैं जिनका जवाब मांगा जा रहा है। माना जा रहा है कि लादेन यहां काफी समय से रहता था। 9/11 के बाद ओसामा अफगानिस्तान गया भी था या सीधा पाकिस्तान आ गया था? अगर 11 वषरें से वह पाकिस्तान में था तो अमेरिका क्यों पता लगाने में असफल रहा? जहां अंतरराष्ट्रीय समुदाय ओसामा के बारे में सवाल उठा रहा है वहीं पाकिस्तान की सरकार और सेना के बारे में भी कई सवाल उठते हैं, जिनका कोई जवाब देने को तैयार नहीं। पाकिस्तान में सरकार और सेना से ये सवाल पूछे जा रहे हैं कि अमेरिका ने बिना बताए पाकिस्तान के अंदर आकर कार्रवाई कैसे की है। पाकिस्तान की सेना दुनिया की सातवीं बड़ी सेना है। अगर इस तरह की विदेशी कार्रवाई को सेना रोक नहीं सकती तो फिर इसे रखने का क्या फायदा है? अगर पाकिस्तान की सरकार और सेना बिन लादेन को आतंकवादी समझती थी तो उसे गिरफ्तार क्यों नहीं क्या? ओसामा को पाकिस्तान भी बड़ा आतंकवादी समझता था तो उसे पकड़ कर यहां मुकदमा क्यों नहीं चलाया गया? पाकिस्तान के गृहमंत्री से लेकर सेना प्रमुख तक या प्रधानमंत्री से लेकर राष्ट्रपति तक किसको पता था कि ओसामा को आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में मारा जा सकता है? इसके बाद शुरू होते हैं दुनिया के सवाल जो पाकिस्तानी की परेशानी को बढ़ा रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि क्या सरकार के आशीर्वाद से ही ओसामा पाकिस्तान में रह रहा था? ओसामा के कई साथी पाकिस्तान में थे, जो या तो मारे गए या पकड़े गए। यह कौन बताएगा कि अलकायदा से जुड़े कितने नेता अब भी पाकिस्तान में हैं? फिर यह भी सवाल पैदा होता हैं कि ओसामा का साथी और अलकायदा का नंबर दो अल जवाहिरी व तालिबान प्रमुख मुल्ला उमर कहां है? यह शक भी जताया जा रहा है कि ओसामा की तरह बाकी आतंकवादियों का भी पता चल सकेगा या नहीं? इस तरह के कई और सवाल हैं जिनके जवाब का पाकिस्तान और विश्व बिरादरी को इंतजार है। सरकार और देश की असल सरकार यानी सेना अब उन सवालों का उत्तर तैयार कर रही है, लेकिन अब सच सामने लाने के सिवा कुछ नहीं चलेगा। (लेखक पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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