Thursday, May 5, 2011

लादेन पर अमेरिका पाक में तनातनी

दुनिया के मोस्ट वांटेड आतंकी ओसामा बिन लादेन को मारे जाने के बाद अमेरिका और पाकिस्तान में तनातनी जारी है। विवाद की वजह एबटाबाद स्थित पाकिस्तानी सैन्य अकादमी की नाक के नीचे ओसामा का मारा जाना है। सीआइए प्रमुख ने यह कहकर पाकिस्तान को फिर चिढ़ा दिया कि या तो पाकिस्तान को ओसामा के बारे में पूरी जानकारी थी और वह उसे पाल पोस रहा था या फिर उसका समूचा तंत्र नाकारा था। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने सीआइए प्रमुख की टिप्पणी को बेचैन करने वाला बताया है। हालांकि पाकिस्तान के लिए राहत की बात यह है कि सीनेटरों के विरोध के बावजूद अमेरिका ने इस्लामाबाद को मदद जारी रखने का एलान किया है। लेकिन ओसामा के उसके यहां छिपे रहने पर उसको जवाब तो देना ही होगा। अमेरिका ने यह भी साफ कर दिया है कि ओसामा को पाकिस्तानी सरजमीं पर मारे जाने पर किसी भी कीमत पर माफी नहीं मांगेगा। समाचार पत्र वाशिंगटन पोस्ट के मुताबिक ओबामा प्रशासन के स्थानीय और इस्लामाबाद में तैनात अधिकारियों ने पाकिस्तान से कहा है कि ओसामा और उसकी वर्षो तक पनाहगाह रही वजीरिस्तान हवेली के बारे में कुछ खास सवालों का जवाब फौरन दे। मसलन, ओसामा को मदद कैसे मिल रही थी। हवेली का मालिक कौन था और उसे बनवाया किसने। सुरक्षा व्यवस्था कौन मुहैया करा रहा था। इसके अलावा दोनों देशों के बीच आगामी रिश्ते कैसे होंगे, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि पाकिस्तान किस प्रकार जवाब देता है। अफगानिस्तान में जारी जंग का खात्मा भी इसी पर निर्भर करेगा। ह्वाइट हाउस के प्रेस सचिव जे. कार्नी का कहना था, हम उस मददगार नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटाने में लगे हैं, जिसकी बदौलत ओसामा सैन्य प्रशिक्षण अकादमी के निकट रह रहा था। जहां तक हम समझते हैं कि पाक इस दिशा में जांच करेगा। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार पाक अधिकारियों ने इस बात को तो तत्काल खारिज कर दिया कि ओसामा को पनाह दी जा रही थी। साथ ही उसने पेनेटा के बयान को भी चिंताजनक बताया है। पाकिस्तान के विदेश सचिव सलमान बशीर ने कहा, वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ जो भी चीजें हुई हैं उसमें पाकिस्तान ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। एबटाबाद में जहां ओसामा का खात्मा किया गया उस परिसर को आइएसआइ ने कुछ समय पहले ही संदिग्ध करार दिया था। ऐसे में यह चिंताजनक है कि हमारे लिए इस तरह का बयान दिया गया। सीआइए निदेशक लियोन पेनेटा ने कहा था कि जानकारी लीक होने से बचने और अभियान को खतरे में डालने से बचाने के लिए ओबामा प्रशासन ने पाकिस्तान को सूचना नहीं देने का निर्णय लिया था। पेनेटा के बाद सांसद पीटर किंग ने कहा था, इस बात पर विश्वास करना असंभव है कि इतनी बेहतर खुफिया एजेंसी और सैन्य प्रणाली के बावजूद पाकिस्तान यह पता करने में नाकाम रहा कि ओबामा उसके ही देश में रह रहा था। पेरिस में पाक प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई पूरे विश्व की जिम्मेदारी है। गिलानी ने कहा, यह सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं बल्कि पूरे विश्व की खुफिया एजेंसियों की नाकामी है। उन्होंने कहा, निश्चित रूप से हम अपनी खुफिया जानकारियां विश्व के अन्य देशों से साझा करते हैं, इसमें अमेरिका भी शामिल है, इसलिए यह कहना गलत है कि गलती सिर्फ पाकिस्तान की ओर से ही हुई है। साफ है कि यह पूरे विश्व की नाकामी है। अमेरिका ने पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों को पेचीदा लेकिन महत्वपूर्ण बताते हुए कहा है कि पाक के साथ संबंधों को लेकर वह कठिन प्रयास कर रहा है। वहीं अमेरिकी सांसदों का विचार है कि उनके देश की ओर से पाकिस्तान को दी जाने वाली वित्तीय सहायता रोक दी जानी चाहिए। सांसद टेड पोई ने तो इस संबंध में विधेयक लाने तक की घोषणा कर दी है, लेकिन ओबामा प्रशासन का कहना है कि वह वित्तीय सहायता जारी रखेगा। इससे पूर्व अमेरिकी अटार्नी जनरल एरिक होल्डर ने लादेन के खिलाफ अभियान को यह कहकर पुरजोर समर्थन किया कि अमेरिका ने राष्ट्रीय आत्मरक्षा में सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया। जे. कार्नी ने कहा, हमें अलकायदा के खिलाफ लड़ाई जारी रखनी है और इस प्रयास में पाकिस्तान बहुत महत्वपूर्ण सहयोगी है।

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