उन्होंने एक अगस्त से ही काम करना शुरू कर दिया है। विश्वविद्यालय ने एक बयान में कहा है कि ऊषा राजगोपालन हिंदी, तमिल व मलयालम भाषाओं पर अच्छी पकड़ रखती हैं। अन्नामलाई और मैरीलैंड विश्वविद्यालयों की डिग्री उनके पास है। यही नहीं ऊषा ट्राइएंगल क्षेत्र में हिंदू पूजा सेवाओं की प्रमुख रही हैं। 2009 में ट्राइएंगल समुदाय फाउंडेशन की ओर से उन्हें सामुदायिक सेवा के लिए कैथ्रीन वालेस पुरस्कार दिया जा चुका है। ऊषा ने कहा, हिंदूत्व व सनातन धर्म कोई धर्म नहीं बल्कि जीवन जीने का तरीका है। ड्यूक चैपल के डीन शमूएल वेल्स ने कहा कि वो विभिन्न मान्यताओं पर ऊषा राजगोपालन के परिप्रेक्ष्य का स्वागत करते हैं। ड्यूक विश्वविद्यालय में हिंदू छात्र संघ की स्थापना 1998 में हुई थी, जो शास्त्र अध्ययन, हिंदू त्योहारों और हिंदू धर्म के प्रति जागरुकता लाने के लिए कार्यक्रम आयोजित करता है।
No comments:
Post a Comment