पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून में संशोधन का समर्थन करने के कारण अपना जीवन गंवाने वाले पंजाब के गवर्नर सलमान तासीर और केंद्रीय मंत्री शहबाज भट्टी के हत्यारों को सख्त सजा देने का वादा करने वाली पीपीपी सरकार के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने अब कायद-ए-आज़म मोहम्मद अली जिन्ना के द्विराष्ट्र सिद्धांत के प्रति आने वाली नस्लों को जागरूक करने की बात कही है। इसका मतलब है कि पाकिस्तान मुस्लिम देश के रूप में वजूद में आया था और वह मुस्लिम देश ही रहेगा, अन्य धर्म के लोगों के लिए या तो कोई जगह नहीं है और अगर है तो मुस्लिम कानून के अंतर्गत है। गिलानी के इस वक्तव्य से कट्टरपंथियों को विशेष रूप से हौसला मिला है और अब वे खुद को वफादार नागरिक समझने लगे हैं, क्योंकि वे पहले से वही कर रहे हैं जो गिलानी आगे करना चाहते हैं। गिलानी के इस विचार के बारे में अंग्रेजी दैनिक नेशन ने लिखा है कि प्रधानमंत्री ने द्विराष्ट्रीय थ्योरी से ही नई नस्ल की पहचान करने और उसे अमली जामा पहनाने की कोशिश करने की बात कहकर आधे पके हुए खाने को पूरी तरह पका कर चूल्हे से उतारने की बात कही है ताकि खाने का मजा लिया जा सके। गिलानी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वह नई नस्ल के लिए दिए जाने वाले बलिदानों को नष्ट नहीं होने देंगे और उनकी पूरी रक्षा करेंगे। लाहौर में नज़रिया पाकिस्तान ट्रस्ट द्वारा ऐवान-ए-कायद-ए-आज़म के समारोह में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए गिलानी ने अपनी इस प्रतिबद्घता की घोषणा की। इस अवसर पर मौजूद पंजाब के मुख्यमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने कहा कि पाकिस्तान को इस्लामी देश बनाने के कायद-ए-आज़म के सपनों को साकार करने के लिए नई नस्ल को जागरूक करने की जरूरत है। कायद-ए-आज़म की थ्योरी ऐसे समय में पेश की गई है जब देश समस्याओं से घिरा हुआ है। द्विराष्ट्रीय दृष्टिकोण का इतिहास याद दिलाते हुए अखबार ने लिखा है कि यह थ्योरी हिंदू मुस्लिम एकता के समर्थक जिन्ना ने पेश की थी, लेकिन यह उपमहाद्वीप में हिंदू मुस्लिम तकरार का कारण बन गई। इस नज़रिये का उद्देश्य यह था कि भारत को तोड़कर एक ऐसे मुस्लिम देश का गठन किया जाए जहां इस्लाम के विकास के साथ साथ न्याय और शांति भी हो। गिलानी ने इसी आधार पर जिन्ना के सपनों को साकार करने की बात कही है। गिलानी ने कहा कि मेरी सरकार जिन्ना के नज़रिये के अनुसार कर रही है।दैनिक जागरण,
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