46 साल बाद अपनी गलती के लिए माफी मांगने वाले पाकिस्तानी पायलट को भारतीय पीडि़त परिवार ने माफ कर दिया। 1965 में भारत-पाक युद्ध के दौरान शहीद भारतीय पायलट जहांगीर इंजीनियर की बेटी फरीदा सिंह ने पाकिस्तानी पायलट कैस मजहर हुसैन के माफीनामे का शालीनता भरा जवाब दिया है। कैस मजहर के पत्र के लिए फरीदी सिंह ने उनका शुक्रिया अदा किया है और कहा है कि जो कुछ भी हुआ वो युद्ध की अस्तव्यस्तता के बीच हुआ। इस युद्ध के दौरान एक भारतीय नागरिक विमान कच्छ के रन में भारत और पाकिस्तान की सीमा की ओर भटक गया था। कैस मजहर हुसैन ने इस भारतीय विमान पर हमला किया, जिसमें जहांगीर इंजीनियर के अलावा उक्त विमान में सवार गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री बलवंत राय मेहता और उनकी पत्नी सरोजबेन मेहता समेत कुल सात लोग मारे गए थे। इस घटना के 46 साल बाद कैस मजहर हुसैन ने मारे गए पायलट की बेटी फरीदा सिंह को एक पत्र लिख कर संवेदना व्यक्त की और कहा कि उन्हें उस हादसे पर बहुत खेद हुआ। कैस ने अपने पत्र में कहा कि उन्हें ये मालूम नहीं था कि उस विमान में आम लोग सवार थे और उन्होंने अपना कर्तव्य निभाने के लिए ऐसा किया। 1965 के इस हादसे के कुछ घंटों बाद जब ऑल इंडिया रेडियो ने घोषणा की कि जिस विमान पर पाकिस्तान के पायलट ने गोली चलाई थी, वह एक असैन्य विमान था, तो दोनों तरफ अफसोस का माहौल पैदा हो गया था। अपने पत्र में फरीदा सिंह ने लिखा कि ये सच है कि इस हादसे ने हमारे परिवार के भविष्य को हमेशा के लिए बदल दिया था। लेकिन हमने कभी भी उस इंसान के बारे में बुरी भावना नहीं रखी, जिसने विमान पर निशाना लगाया था। सच्चाई तो ये है कि ये सब कुछ युद्ध के बीच हुआ। हम सभी युद्ध और शांति के घिनौने खेल के महज मोहरे हैं। अपने पिता को बेहद साहसी और दयालु इंसान बताते हुए फरीदा सिंह ने कैस मजहर हुसैन को लिखे पत्र में कहा है, क्योंकि मेरे पिता बेहद दयालु किस्म के थे, इसलिए आपका पत्र मिलने के बाद आपकी ओर हाथ बढ़ाने में मुझे कोई तकलीफ नहीं हो रही है। ये हादसा एक उदाहरण है, जो ये साबित करता है कि अर्थहीन जंग अच्छे इंसानों से क्या-क्या करवाती है। उन्होंने मजहर हुसैन को लिखा है कि वह समझती हैं कि उनके लिए ये पत्र लिखना बेहद कठिन रहा होगा। उन्होंने कैस मजहर की हिम्मत की तारीफ भी की है। पत्र में लिखा है कि उन्हें मालूम नहीं कि कैस मजहर का पत्र कैसे सार्वजनिक हुआ। हालांकि इसके बाद फरीदा ने ये लिखा है, मुझे ख़ुशी है कि ये पत्र सार्वजनिक हुआ क्योंकि इससे सिर्फ जख्म भरेगा और कोई नुकसान नहीं होगा। इसका लाभ व्यक्तिगत ही नहीं, बल्कि एक बड़े पैमाने पर होगा। अगर मेरे पिता जिंदा होते तो उन्हें ये देखकर अच्छा लगता कि एक पत्र से दो मुल्कों के बीच माफी का सिलसिला शुरू हुआ। आखिरकार किसी समय में ये दो मुल्क एक हुआ करते थे। कैस मजहर हुसैन का कहना है कि वह उस हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों की तलाश कर रहे हैं और उनको अगर कोई पता मिलता है तो वह उनको भी संवेदना के पत्र लिखेंगे।
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