अमेरिका को जिस बात का डर था, वही हुआ। पाकिस्तान ने उसके रडार से बच निकलने वाले स्टील्थ हेलीकॉप्टर का मलबा अपने मित्र चीन तक पहुंचा दिया है। मीडिया रिपोर्टो के अनुसार पाकिस्तान ने न केवल चीनी सेना के इंजीनियरों को आमंत्रित कर इस हेलीकॉप्टर के मलबे की व्यापक तस्वीरें खींचने की इजाजत दी, बल्कि उसके कुछ हिस्से भी अपने साथ ले जाने दिए। यह बात अमेरिका और पाकिस्तान के संबंधों में पड़ी दरार को और चौड़ी करने का काम करेगी। अमेरिका के नेवी सील्स ने 2 मई को एबटाबाद में अलकायदा के सरगना ओसामा बिन लादेन तक पहुंचने और उसे मार गिराने के लिए इन्हीं हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया था। इस अभियान में एक स्टील्थ हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था और एबटाबाद स्थित लादेन की वजीरिस्तान हवेली में ही गिर गया। इस कारण से अमेरिकी सैनिकों ने हेलीकॉप्टर को मौके पर ही जला दिया, क्योंकि वे मलबा साथ ले जाने में सक्षम नहीं थे। अमेरिका के यह स्टील्थ हेलीकॉप्टर बेहद उन्नत प्रौद्योगिकी का है। इसमें एक विशेष कोटिंग डिजाइन है जिसकी मदद से यह रडार को चकमा देने में सक्षम है। दरअसल स्टील्थ हेलीकॉप्टर में ऐसे ब्लेड भी बनाए गए हैं, जिनसे आवाज न के बराबर होती है। चीन लंबे समय से मानव रहित अमेरिकी विमान ड्रोन और स्टील्थ जैसे हेलीकॉप्टर विकिसित करने का प्रयास कर रहा है। द न्यूयार्क टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि चीनी इंजीनियरों ने पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों के निमंत्रण पर स्टील्थ हेलीकॉप्टर के अलग हो चुके पिछले हिस्से की व्यापक तस्वीरें ली हैं, जिसमें रडार से बचने के लिए गुप्त प्रौद्योगिकी लगी थी। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया, चीन के साथ पाकिस्तान का ऐसा सहयोग भड़काऊ है। रिपोर्ट में कहा गया, जिस कार्रवाई में ओसामा मारा गया, उसके कुछ दिन बाद पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ ने संभवत: चीनी सैन्य इंजीनियरों को स्टील्थ हेलीकॉप्टर के मलबे की जांच की अनुमति दी थी। खुफिया जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने कहा कि अमेरिकी आशंका टैप की गई एक बातचीत पर आधारित है, जिसमें पाकिस्तानी अधिकारी चीनियों को दुर्घटनास्थल पर आने का न्योता देने की बात करते सुनाई पड़ते हैं। चीन के पहले विमानवाहक ने समुद्री परीक्षण पूरा किया बीजिंग, एजेंसी : विश्व में चिंता प्रकट करने वाले चीन के पहले विमानवाहक अपनी प्रणालियों और क्षमताओं के परीक्षण के लिए चार दिन की समुद्री यात्रा के बाद अपने ठिकाने पर लौट आया है। विमानवाहक में यूक्रेन से आयातित वेरयाग नामक प्लेटफार्म फिर से लगाया गया। शिन्हुआ संवाद समिति ने बताया कि पीले सागर में चार दिन के परीक्षण के बाद वह चीन के लिओनिंग प्रांत के डालियान बंदरगाह लौट आया। परीक्षण के दौरान विमानवाहक की इलेक्ट्रानिक प्रणालियों, नौवहन प्रणालियों तथा हथियारों को परखा गया। चीन के एक विशेषज्ञ यिन झुओ के अनुसार इसकी रडार प्रणाली दुनिया के सर्वाधिक उन्नत प्रणाली में एक है। विमानवाहक में चीनी निर्मित 30 जे-15 लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर तथा चालक दल के करीब 2000 सदस्यों की क्षमता है। उसके अगले सात अगस्त में औपचारिक तौर पर चीन की नौसेना में शामिल होने की उम्मीद है।
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