नई दिल्ली पश्चिमी सीमा पर चीन और पाकिस्तानी सेना के साझा युद्धाभ्यास की खबरों ने भारतीय रक्षा तंत्र के कान खड़े कर दिए हैं। भारत से लगी सीमा से चंद किलोमीटर दूर इस अभ्यास को लेकर सरहद पार से आ रही खबरों के बीच सेना मुख्यालय इसकी हकीकत तलाशने में जुटा है। सेना मुख्यालय के आला अधिकारियों के अनुसार इस बारे में पाकिस्तान की ओर से उनके पास कोई सूचना नहीं आई है। लेकिन इस बाबत आई खबरों के बाद इसकी पुष्टि के कवायद जारी है। उल्लेखनीय है कि दोनों मुल्कों के बीच व्यवस्था डिविजन स्तर के युद्धाभ्यास की पूर्व सूचना एक-दूसरे को देने की है। लिहाजा यदि अभ्यास इससे निचले स्तर का हो पाकिस्तान को सूचना न देने का गलियारा मिल सकता है। खबरों के मुताबिक चीन और पाकिस्तान के सैन्य दस्ते पश्चिमी क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सीमा से कुछ किमी के फासले पर अभ्यास कर रहे हैं, जिसमें टैंक भी शिरकत कर रहे हैं। हालांकि आधिकारिक तौर पर इस अभ्यास की कोई पुष्टि अभी तक पाकिस्तान की ओर से नहीं की गई है। वैसे 2011 में दोनों देशों के प्रस्तावित सैन्य अभ्यास की खबर इस साल फरवरी में पाकिस्तान के ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के प्रमुख जनरल खालिद शमीम वाइने की चीन यात्रा के दौरान भी आई थी। चीनी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने 23 फरवरी 2011 को वायने से बातचीत के आधार पर खबर दी थी कि दोनों देश कूटनीतिक संबंधों की 60वीं सालगिरह के मौके पर 2011 में सेना और वायुसेना के दो साझा अभ्यास करेंगें। चीन और पाकिस्तान की सेनाओं का गठजोड़ नया नहीं है और यह सांठगांठ भारत के लिए हमेशा ही एक चिंता की सबब रही है। खासकर अंतर्राष्ट्रीय सीमा से महज कुछ किमी की दूरी पर यदि भारत के दो पड़ोसी मिलकर सैन्य अभ्यास करते हैं तो पेशानी पर चिंता की लकीरें लाजिमी हैं। पाक अधिकृत कश्मीर में चीनी सैनिकों की मौजूदगी की खबरों पर भी भारत अपनी चिंता जता चुका है। वहीं उत्तरी कमान के प्रमुख केटी परनायक ने बीते दिनों सरहदी इलाके में दोनों देशों की साझेदारी को भारत की सुरक्षा के लिए चिंता करार दिया था।
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