पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार ने कहा है कि भारत और पाकिस्तान को विवादित मुद्दों पर वार्ता करनी चाहिए ताकि यह मुद्दे अगली पीढ़ी तक ना पहंुचे। पहली बार चीन दौरे पर आई खार ने कहा कि पाकिस्तान अपने पड़ोसी देशों विशेष रूप से भारत और अफगानिस्तान के साथ अपने संबंध सुधारने को प्राथमिकता देता है। चीन के सरकारी अखबार चाइना डेली ने खार के हवाले से कहा कि भारत और पाकिस्तान के संबंधों की दिक्कतें अगली पीढ़ी तक नहीं पहुंचनी चाहिए। अनसुलझे मुद्दों के अलावा दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास होना चाहिए। उन्होंने कहा, यदि हम एक दूसरे पर भरोसा करना नहीं सीखेंगे तो ये मुद्दे अगली पीढ़ी तक पहुंच जाएंगे। चीन की मीडिया ने उनकी यात्रा के मद्देनजर पाकिस्तान में संचालित आतंकवाद पर विशेष जोर दिया है। खार ने आतंकवाद से लड़ने के लिए चीन और पाकिस्तान के रिश्तों को और मजबूत करने की बात कही। उन्होंने कहा कि पूर्वी तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट हमारा साझा दुश्मन है। दोनों देशों को इसके सफाए के लिए दृढ़ संकल्प होना चाहिए। उल्लेखनीय है कि चीन ने पिछले दिनों शिनजियांग प्रांत में हुई हिंसा के लिए पहली बार अपने दोस्त पाकिस्तान पर अंगुली उठाई थी। इस हिसंा के पीछे उसने पाकिस्तान प्रशिक्षित ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट (ईटीआइएम) को जिम्मेदार ठहराया था। रब्बानी ने कहा कि मीडिया उनके व्यक्तिगत सौंदर्य पर ध्यान दे रहा है और उनके राजनयिक अनुभव पर संदेह प्रकट कर रहा है, लेकिन इससे उनका कार्य प्रभावित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि लोग इस बात को भूल जाते हैं कि वह राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ के प्रशासन में सात साल तक कनिष्ठ मंत्री रहीं। आर्थिक तरक्की के लिए बदलना होगा रवैया : शाहिद जावेद बर्की सिंगापुर : दक्षिण एशियाई क्षेत्र के आर्थिक विकास के लिए भारत और पाकिस्तान को अपने रवैये में बदलाव लाना होगा। पाकिस्तान के पूर्व वित्त मंत्री शाहिद जावेद बर्की की किताब साउथ एशिया इन न्यू वर्ल्ड आर्डर में यह आकलन किया गया है। बर्की विश्व बैंक के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं और इन दिनों सिंगापुर इंस्टीट्यूट ऑफ साउथ एशियन स्टडीज से अतिथि अनुसंधानकर्ता के रूप में जुड़े हैं। उन्होंने लिखा है कि जो नई विश्व अर्थव्यवस्था उभर रही है वह अधिक जटिल होगी। यह दो धु्रवीय होने की बजाय बहु धु्रवीय होगी। इसके केंद्र में अमेरिका और चीन होंगे। जबकि आर्थिक गतिविधियों के आठ और केंद्र होंगे जिनमें भारत भी होगा। उन्होंने लिखा, एशिया के दूसरे भाग जिस तरह से तरक्की की सीढि़यां चढ़ते गए, वैसा दक्षिण एशिया में नहीं हुआ। इसकी एक मुख्य वजह क्षेत्र की एतिहासिक पृष्ठभूमि रही। किताब में भारत में ब्रिटिश शासन की समाप्ति, देश के विभाजन, बांग्लादेश के गठन के साथ-साथ भारत और पाकिस्तान की दुश्मनी पर भी चर्चा की गई है। बर्की ने कहा है कि जहां एशिया के अन्य भाग समृद्धि की राह पर बढ़ते रहे, वहीं दक्षिण एशिया अपने झगड़ों में फंसा रहा। इस क्षेत्र के आर्थिक भविष्य को बेहतर बनाने में भारत अहम भूमिका निभा सकता है। यदि राजनीतिक कारणों से भारत यह भूमिका नहीं निभाता है तो इस क्षेत्र को उत्पे्ररक के रूप में किसी अन्य देश को जोड़ना पड़ सकता है।
No comments:
Post a Comment