Tuesday, August 16, 2011

वाजपेयी की उदारता पर भारी पड़ा कारगिल


पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की उदारता की तारीफ करते हुए कहा है कि 1999 में वे कश्मीर सहित सभी मसलों को हल करने के लिए तैयार थे, लेकिन कारगिल के दुर्भाग्य ने दोनों देशों के बीच वार्ता की गाड़ी को पटरी से उतार दिया। इस प्रकरण की जांच के लिए जल्दी ही एक आयोग का गठन किया जाएगा। पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ का नाम लिए बगैर शरीफ ने कहा कि सभी जानते हैं कि कारगिल के लिए कौन जिम्मेदार था। वह दिन आएगा जब आयोग की जांच से यह पता चलेगा कि कारगिल युद्ध किसने और क्यों शुरू किया था ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोका जा सके। यहां एक सेमिनार को संबोधित करते हुए शरीफ ने कहा कि कारगिल के कारण न सिर्फ पाकिस्तान को नुकसान हुआ बल्कि उस शख्स का भी अवसान हुआ जो इसके लिए जिम्मेदार था। बकौल शरीफ, 1999 में वाजपेयी की लाहौर यात्रा के दौरान उन्हें काफी हैरानी हुई जब पता चला कि भारतीय प्रधानमंत्री कश्मीर सहित सभी मसलों का हल चाहते हैं। उन्होंने कहा, मैं भी बातचीत के लिए उत्सुक था लेकिन हिचक रहा था क्योंकि मुझे डर था कि पाकिस्तान की जनता इसे स्वीकार नहीं करेगी लेकिन जब उन्होंने (भारतीय नेता) पहल की तो मैं भी इसके लिए खुशी-खुशी तैयार हो गया। दोनों देशों के बीच दोस्ताना संबंधों की हिमायत करते हुए शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान की खुशहाली भारत से जुड़ी हुई है। दोनों देशों को मामूली अड़चनों को दूर करते हुए शांति स्थापित करने की दिशा में काम करना चाहिए। लेकिन कश्मीर के कारण इसमें अपेक्षित प्रगति नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने परमाणु परीक्षण नहीं किया होता तो बेहतर होता। हालांकि इसी वजह से दोनों देशों के प्रधानमंत्री करीब भी आए, लेकिन कारगिल ने सारा खेल बिगाड़ दिया।

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