: भारत की शंका को दूर करने की कवायद के तहत माओवादी नेता प्रचंड ने स्पष्ट किया है कि वह चीन समर्थक नहीं हैं। उनका कहना था कि वह हमेशा से किसी ताकतवर पड़ोसी मुल्क की ओर नेपाल के झुकाव के विरोधी रहे हैं। लिहाजा उन्हें चीन समर्थक नहीं कहा जा सकता। मलेशिया दौरे पर रवाना होने से पहले प्रचंड रविवार रात को त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे। नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि लुंबनी के विकास के लिए आयोजित एशिया प्रशांत सहयोग एवं विनिमय प्रतिष्ठान की बैठक में भाग लेने के कारण उन्हें चीन का पक्षधर कहा जा रहा है। लेकिन केवल बैठक में भाग लेने के कारण उन पर चीन समर्थक होने का ठप्पा लगाना गलत है। प्रचंड चीन के इस प्रतिष्ठान के दस सह अध्यक्षों में एक हैं। इस संगठन ने भारत-नेपाल सीमा पर स्थित भगवान गौतम बुद्ध की जन्म भूमि लुंबनी को विकसित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन के साथ तीन अरब डॉलर की परियोजना पर हस्ताक्षर किया है। प्रचंड ने कहा कि नेपाल के प्रधानमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने भारत की कई परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की। अब अगर इस कारण उन्हें कोई भारत समर्थक करार दे तो यह भी गलत है। उनका कहना था कि भारत या चीन समर्थक न होकर वह अपने देश के हितों के पक्षधर हैं।
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