तिब्बत देश तिब्बती समुदाय का है। चीन से वह अपना हक लेकर रहेंगे। प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार मीडिया से मुखातिब हुए डॉ. लोबसांग सांग्ये ने कहा कि तिब्बत के लोगों को उनके देश ले जाना ही उनका सपना है। इसके लिए उनके पिता एवं परिवार के कई सदस्यों ने जान गंवाई है। सांग्ये ने कहा कि भारत का नजरिया तिब्बत के प्रति सकारात्मक और सहयोगपूर्ण रहा है। भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उन्हें हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है। डॉ. लोबसांग सांग्ये ने सोमवार को निर्वासित तिब्बत सरकार के प्रधानमंत्री (कालोन ट्रिपा) पद की शपथ ली। देश-विदेश से आए लोगों की मौजूदगी में केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के चीफ जस्टिस कमिश्नर न्गावांग फेलग्याल ने डॉ. सांग्ये को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। तिब्बती धर्मगुरु दलाईलामा की अध्यक्षता में मैक्लोडगंज स्थित चुग्लाखां मंदिर में आयोजित समारोह में सांग्ये ने पद ग्रहण किया। प्रधानमंत्री ने उपस्थित जनसमूह से कहा कि हम तिब्बती सब कुछ करने में समर्थ हैं। तिब्बती समुदाय चीन सरकार के विरोध में नहीं है। उनका आंदोलन भेदभाव करने वाले लोगों के खिलाफ है। डॉ. सांग्ये ने कहा कि 1950 में चीनी सेना तिब्बत में आई थी। तब इस प्रक्रिया को सामाजिक भावना का नाम दिया जा रहा था, लेकिन चीन ने तिब्बत में मानव अधिकारों को कुचल दिया।
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