Tuesday, August 30, 2011

चीन के 40 हजार बांध खतरनाक स्थिति मेंबीजिंग


: चीन ने ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध बनाने पर भारत की चिंता को लेकर भले ही आश्वासन दे दिया है, लेकिन वह उस आपदा से कैसे निपटेगा जो उसके 40 हजार बांधों में पड़ी दरारों और टूटने पर उत्पन्न हो सकती है। एक सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, उसके 40 हजार बांधों पर टूटने का खतरा मंडरा रहा है। अगर ऐसा हुआ तो चीन की अधिकांश कृषि योग्य भूमि, रेल यातायात, इमारतें तबाह हो जाएंगी। चीन की सरकारी पत्रिका चाइना इकोनॉमिक वीकली में सरकारी अधिकारी जू युआनमिंग के हवाले से यह चौंकाने वाली रिपोर्ट दी गई है। रिपोर्ट सामने आने के बाद सरकार तुरंत हरकत में आ गई। सरकार ने पुराने पड़ चुके बांधों की मरम्मत के लिए 590 करोड़ डॉलर (करीब 27 हजार दो सौ करोड़ रुपये) का बजट जारी किया है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि अगले पांच साल के भीतर सभी 87 हजार बांधों को सुरक्षित बना लिया जाएगा। सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ने छठे और सातवें दशक में कई बांध बनवाए थे। देश को सूखे और बाढ़ से बचाने के लिए बड़ी जल्दबाजी में ये बांध बनवाए गए थे। रपोर्ट में बताया गया है, उस जमाने में तकनीक काफी सीमित थी। तब चीन की अर्थव्यवस्था में भी उतना उछाल नहीं था। इस वजह से अधिकांश बांधों की गुणवत्ता निर्माण मानकों पर उतनी बेहतर नहीं है जितनी आज होती है।


द्विराष्ट्रवाद सिद्धांत को मजबूत करेगा पाक

पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून में संशोधन का समर्थन करने के कारण अपना जीवन गंवाने वाले पंजाब के गवर्नर सलमान तासीर और केंद्रीय मंत्री शहबाज भट्टी के हत्यारों को सख्त सजा देने का वादा करने वाली पीपीपी सरकार के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने अब कायद-ए-आज़म मोहम्मद अली जिन्ना के द्विराष्ट्र सिद्धांत के प्रति आने वाली नस्लों को जागरूक करने की बात कही है। इसका मतलब है कि पाकिस्तान मुस्लिम देश के रूप में वजूद में आया था और वह मुस्लिम देश ही रहेगा, अन्य धर्म के लोगों के लिए या तो कोई जगह नहीं है और अगर है तो मुस्लिम कानून के अंतर्गत है। गिलानी के इस वक्तव्य से कट्टरपंथियों को विशेष रूप से हौसला मिला है और अब वे खुद को वफादार नागरिक समझने लगे हैं, क्योंकि वे पहले से वही कर रहे हैं जो गिलानी आगे करना चाहते हैं। गिलानी के इस विचार के बारे में अंग्रेजी दैनिक नेशन ने लिखा है कि प्रधानमंत्री ने द्विराष्ट्रीय थ्योरी से ही नई नस्ल की पहचान करने और उसे अमली जामा पहनाने की कोशिश करने की बात कहकर आधे पके हुए खाने को पूरी तरह पका कर चूल्हे से उतारने की बात कही है ताकि खाने का मजा लिया जा सके। गिलानी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वह नई नस्ल के लिए दिए जाने वाले बलिदानों को नष्ट नहीं होने देंगे और उनकी पूरी रक्षा करेंगे। लाहौर में नज़रिया पाकिस्तान ट्रस्ट द्वारा ऐवान-ए-कायद-ए-आज़म के समारोह में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए गिलानी ने अपनी इस प्रतिबद्घता की घोषणा की। इस अवसर पर मौजूद पंजाब के मुख्यमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने कहा कि पाकिस्तान को इस्लामी देश बनाने के कायद-ए-आज़म के सपनों को साकार करने के लिए नई नस्ल को जागरूक करने की जरूरत है। कायद-ए-आज़म की थ्योरी ऐसे समय में पेश की गई है जब देश समस्याओं से घिरा हुआ है। द्विराष्ट्रीय दृष्टिकोण का इतिहास याद दिलाते हुए अखबार ने लिखा है कि यह थ्योरी हिंदू मुस्लिम एकता के समर्थक जिन्ना ने पेश की थी, लेकिन यह उपमहाद्वीप में हिंदू मुस्लिम तकरार का कारण बन गई। इस नज़रिये का उद्देश्य यह था कि भारत को तोड़कर एक ऐसे मुस्लिम देश का गठन किया जाए जहां इस्लाम के विकास के साथ साथ न्याय और शांति भी हो। गिलानी ने इसी आधार पर जिन्ना के सपनों को साकार करने की बात कही है। गिलानी ने कहा कि मेरी सरकार जिन्ना के नज़रिये के अनुसार कर रही है।दैनिक जागरण, 

पाक जेल में सरबजीत की रिहाई का एक और प्रयास


अमृतसर पाकिस्तान की कोट लखपत जेल में बंद सरबजीत की रिहाई के लिए उसके परिजनों ने एक और प्रयास किया है। उन्होंने अब राष्ट्रीय अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति आयोग का दरवाजा खटखटाया है। सरबजीत की बहन दलबीर कौर की ओर से दायर की गई याचिका को स्वीकार करते हुए आयोग ने गृह मंत्रालय व विदेश मंत्रालय को नोटिस भेजकर रिहाई के बाबत 30 दिनों में पूरी जानकारी मांगी है। यही नहीं आयोग ने केंद्र सरकार से बातचीत कर सरबजीत के परिजनों को नौकरी देने का भी भरोसा दिया है। पाकिस्तान की जेल में 21 साल से कैद सरबजीत की पत्नी सुखप्रीत कौर, बेटी स्वप्नदीप व पूनम ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति आयोग के वाइस चेयरमैन डा. राजकुमार के साथ शनिवार दोपहर सर्किट हाउस में मुलाकात की। राजकुमार ने बताया कि दलबीर कौर ने अपने भाई सरबजीत की रिहाई के बाबत एक सप्ताह पहले आयोग में याचिका दायर की है। उनकी याचिका स्वीकार कर ली गई है और उस पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। केंद्र सरकार के साथ भी सरबजीत की रिहाई के बाबत बातचीत की जाएगी। डॉ. राजकुमार ने कहा कि झूठे केस में पाकिस्तान की कोट लखपत जेल में बंद सरबजीत से मिलने के लिए आयोग की टीम भी वहां जाएगी। सरबजीत के परिजनों को सरकारी नौकरी दिलाने के लिए सरकार से बातचीत हुई है। पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को भी इस बाबत आयोग चिट्ठी लिखेगा। उन्होंने स्वप्नदीप व पूनम से सर्टिफिकेट जमा करने के लिए भी कहा।

Monday, August 29, 2011

चीन ने भारतीय सीमा पर तैनात कीं अत्याधुनिक मिसाइलें


चीन की बढ़ती सैन्य ताकत भारत के लिए चिंता का सबब बनी हुई है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में दावा किया है कि चीन ने भारतीय सीमा पर अत्याधुनिक हथियारों से लैस सीएसएस-5 एमआरबीएम मिसाइलें तैनात की हैं। इससे दोनों पड़ोसी देशों के संबंधों में तनाव बढ़ सकता है। चीन की सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने पहले भारतीय सीमा पर तरल ईधन वाली सीएसएस-2 आइएमबीएम मिसाइलें तैनात कर रखी थीं। रिपोर्ट के अनुसार बीजिंग अपनी सीमा के बुनियादी ढांचे के विकास में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है। भारत-चीन सीमा के निकट कई सड़क और रेल नेटवर्क बनाए गए हैं। हालांकि यह निर्माण कार्य पश्चिमी चीन में आर्थिक विकास के मकसद से किए गए हैं, लेकिन यह पीएलए के रक्षा अभियानों में मददगार साबित होंगे। पेंटागन ने कहा कि चीन के पाकिस्तान से नजदीकी सैन्य संबंधों, हिंद महासागर, मध्य एशिया और अफ्रीका में भी बढ़ते दखल को लेकर भारत की चिंता बनी हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान पारंपरिक हथियारों को लेकर चीन का प्रमुख ग्राहक बना हुआ है। चीन की ओर से पाकिस्तान को जेएफ-17, हेलीकॉप्टर, टैंक, के-8 ट्रेनर्स, एफ-7 लड़ाकू विमान, हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, पोत भेदी मिसाइलों के अलावा इसकी तकनीक मुहैया कराई गई है। भारत-चीन रिश्ते पर पेंटागन ने कहा कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संवाद बढ़ा है, लेकिन सीमा पर तनाव में कमी नहीं आई है। अमेरिकी रक्षा विभाग का मानना है कि चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने पिछले साल अपनी नई दिल्ली यात्रा के दौरान मतभेदों को कुछ हद तक दूर करने का प्रयास किया था, लेकिन गंभीर बातों पर गौर नहीं किया।


अगली पीढ़ी तक न पहुंचे भारत-पाक रिश्तों की जटिलता


पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार ने कहा है कि भारत और पाकिस्तान को विवादित मुद्दों पर वार्ता करनी चाहिए ताकि यह मुद्दे अगली पीढ़ी तक ना पहंुचे। पहली बार चीन दौरे पर आई खार ने कहा कि पाकिस्तान अपने पड़ोसी देशों विशेष रूप से भारत और अफगानिस्तान के साथ अपने संबंध सुधारने को प्राथमिकता देता है। चीन के सरकारी अखबार चाइना डेली ने खार के हवाले से कहा कि भारत और पाकिस्तान के संबंधों की दिक्कतें अगली पीढ़ी तक नहीं पहुंचनी चाहिए। अनसुलझे मुद्दों के अलावा दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास होना चाहिए। उन्होंने कहा, यदि हम एक दूसरे पर भरोसा करना नहीं सीखेंगे तो ये मुद्दे अगली पीढ़ी तक पहुंच जाएंगे। चीन की मीडिया ने उनकी यात्रा के मद्देनजर पाकिस्तान में संचालित आतंकवाद पर विशेष जोर दिया है। खार ने आतंकवाद से लड़ने के लिए चीन और पाकिस्तान के रिश्तों को और मजबूत करने की बात कही। उन्होंने कहा कि पूर्वी तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट हमारा साझा दुश्मन है। दोनों देशों को इसके सफाए के लिए दृढ़ संकल्प होना चाहिए। उल्लेखनीय है कि चीन ने पिछले दिनों शिनजियांग प्रांत में हुई हिंसा के लिए पहली बार अपने दोस्त पाकिस्तान पर अंगुली उठाई थी। इस हिसंा के पीछे उसने पाकिस्तान प्रशिक्षित ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट (ईटीआइएम) को जिम्मेदार ठहराया था। रब्बानी ने कहा कि मीडिया उनके व्यक्तिगत सौंदर्य पर ध्यान दे रहा है और उनके राजनयिक अनुभव पर संदेह प्रकट कर रहा है, लेकिन इससे उनका कार्य प्रभावित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि लोग इस बात को भूल जाते हैं कि वह राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ के प्रशासन में सात साल तक कनिष्ठ मंत्री रहीं। आर्थिक तरक्की के लिए बदलना होगा रवैया : शाहिद जावेद बर्की सिंगापुर : दक्षिण एशियाई क्षेत्र के आर्थिक विकास के लिए भारत और पाकिस्तान को अपने रवैये में बदलाव लाना होगा। पाकिस्तान के पूर्व वित्त मंत्री शाहिद जावेद बर्की की किताब साउथ एशिया इन न्यू व‌र्ल्ड आर्डर में यह आकलन किया गया है। बर्की विश्व बैंक के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं और इन दिनों सिंगापुर इंस्टीट्यूट ऑफ साउथ एशियन स्टडीज से अतिथि अनुसंधानकर्ता के रूप में जुड़े हैं। उन्होंने लिखा है कि जो नई विश्व अर्थव्यवस्था उभर रही है वह अधिक जटिल होगी। यह दो धु्रवीय होने की बजाय बहु धु्रवीय होगी। इसके केंद्र में अमेरिका और चीन होंगे। जबकि आर्थिक गतिविधियों के आठ और केंद्र होंगे जिनमें भारत भी होगा। उन्होंने लिखा, एशिया के दूसरे भाग जिस तरह से तरक्की की सीढि़यां चढ़ते गए, वैसा दक्षिण एशिया में नहीं हुआ। इसकी एक मुख्य वजह क्षेत्र की एतिहासिक पृष्ठभूमि रही। किताब में भारत में ब्रिटिश शासन की समाप्ति, देश के विभाजन, बांग्लादेश के गठन के साथ-साथ भारत और पाकिस्तान की दुश्मनी पर भी चर्चा की गई है। बर्की ने कहा है कि जहां एशिया के अन्य भाग समृद्धि की राह पर बढ़ते रहे, वहीं दक्षिण एशिया अपने झगड़ों में फंसा रहा। इस क्षेत्र के आर्थिक भविष्य को बेहतर बनाने में भारत अहम भूमिका निभा सकता है। यदि राजनीतिक कारणों से भारत यह भूमिका नहीं निभाता है तो इस क्षेत्र को उत्पे्ररक के रूप में किसी अन्य देश को जोड़ना पड़ सकता है।


चीन ने दबाव में तिब्बत के शीर्ष कम्युनिस्ट नेता को हटाया


: चीन अब तिब्बत के लोगों के आगे झुकने लगा है। उसने तिब्बती जनांदोलन को कुचलने के दोषी शीर्ष कम्युनिस्ट नेता को पद से हटा दिया है। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने गुरुवार को यह जानकारी दी। शिन्हुआ के अनुसार, तिब्बत में पार्टी प्रमुख झांग क्विंगली की छुट्टी कर दी गई है। उनके स्थान पर चेन कुआंगुओ की नियुक्ति की गई है। कुआंगुओ इससे पूर्व हेबेई प्रांत में कम्युनिस्ट पार्टी के प्रमुख थे। शिन्हुआ ने क्विंगली को पद मुक्त करने का कोई कारण नहीं बताया है। लेकिन माना जा रहा है कि चीन और कम्युनिस्ट पार्टी को अपना दुश्मन मानने वाले तिब्बत लोगों को दिल जीतने के लिए ऐसा किया गया है। क्विंगली को तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा का कट्टर विरोधी माना जाता है। धर्मशाला स्थित निर्वासित तिब्बती सरकार सहित कई मानवाधिकार संगठनों ने 2008 में तिब्बत में भड़के जनविद्रोह को बर्बर तरीके से कुचलने के लिए क्विंगली को जिम्मेदार ठहराया है। दैनिक 

चीन की बढ़ती ताकत से बढ़ेगा क्षेत्रीय असंतुलन


अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने कहा है कि चीन की बढ़ती सैन्य ताकत पड़ोसी देशों में अस्थिरता पैदा कर रही है। रडार से बच निकलने वाले स्टील्थ लड़ाकू विमान, विमानवाहक पोत, अंतरिक्ष और क्रूज मिसाइल के विकास की सफलता से उत्साहित चीन की सेना अत्याधुनिक हथियारों से लैस हो रही है। यह दक्षिण एशियाई देशों में अस्थिरता का कारण बन रहा है। उक्त बातें पेंटागन की ओर से चीन की सैन्य क्षमता संबंधी वार्षिक रिपोर्ट जारी करते हुए पूर्वी एशिया के उप सहायक सचिव माइकल शिफर ने कहीं। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि प्रमुख विश्व शक्तियों के साथ प्रौद्योगिकी अंतर चीन वर्ष 2020 तक समाप्त कर दुनिया की बड़ी ताकत बनकर उभरेगा। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) विश्व की सबसे बड़ी सेना है। इसमें करीब एक करोड़ 25 लाख सैनिक हैं। वह क्षेत्र पर केंद्रित सुरक्षा बलों की सेना वर्ष 2020 तक तैयार करने में जुटा है।


China deploys advanced n-missile on Indian border: US


China has deployed more advanced and survivable solid-fuel nuclear capable CSS-5 MRBM missiles against India as a 'deterrent posture', Pentagon has said warning that a high degree of mistrust continues to strain their bilateral ties.
The PLA has replaced liquid-fuelled, nuclear-capable CSS-2 IRBMs with more advanced and survivable solid-fuelled CSS-5 MRBM systems to strengthen its deterrent posture relative to India, the Pentagon has said in its annual report on Chinese military build up to the Congress.
The report also says that Beijing is pumping in huge investments on border infrastructure developments laying more roads and rail network along the Sino-Indian border.
"Although this construction is primarily aimed at facilitating economic development in western China, improved roads could also support PLA border defense operations," it said.
Pentagon said that New Delhi remains concerned by China's close military ties with Pakistan and its growing footprints in the Indian Ocean, Central Asia and Africa. The report noted that Pakistan continued to be China's primary customer for conventional weapons and sales to Islamabad included newly rolled out JF-17 fighters with production facilities, F-22P frigates with helicopters, early warning and control aircraft, tanks, K-8 trainers, F-7 fighters, air-to-air missiles, anti-ship cruise missiles and missile technologies.
On Sino-Indian ties, Pentagon said, that though bilateral dialogue between the two nations increased, border tensions remained an irritant.
"China deepened its ties with India through increased trade and high-level dialogues in 2010, though border tensions remained an irritant in the bilateral relationship. Bilateral trade in 2010 reached nearly USD 60 billion," Pentagon said.
The two neighbours have held several rounds of dialogue over disputed territorial claims. Sino-Indian defense ties were institutionalised in 2007 with the establishment of an Annual Defense Dialogue, the report said.
"Though India cancelled high-level military exchanges following China's denial of visa to a senior Indian general in 2010, both sides agreed to resume exchanges in April 2011," the Pentagon said.
The US Defence Department in its assessment said that Chinese Prime Minister Wen Jiabao's trip to New Delhi in 2010 attempted to smooth over differences following a year of uneasy relations, but he did not address serious irritants.
"A high degree of mistrust continues to strain the bilateral relationship," it said.





Saturday, August 20, 2011

Khadi market growing by 30% AJAYAN DC KOCHI,


“I see God in every thread that I draw on the spinning wheel....the wheel represents the hope of the masses,“ was what the Mahatma had to say about khadi.
Sixty three years after his death, the khadi industry has reasons to be cheerful since the khadi market is growing at roughly 30 per cent.
Earlier, the LDF Government had imposed the use of khadi or handloom dhotis among government employees.

Kerala Khadi and Village Industries Board secretary Sreekumaran said that Board staff wore only khadi clothes.
There has been a steady increase in the sales of products promoted by the board during the last fiscal, the sales turnover in the state touching a high of `27.33 crore.
The board has 220 sales outlets including mobile units. It employs over 700 regular staff, and provides livelihood to over 10,000 artisans.
Sreekumaran said that coarse rough khadi had undergone a tota change, both in texture and quality. The Board also sells a host of other products from starch to pickles to slippers to fur niture now.
“We promote khadi and also village-level prod ucts,“ says Sreekumaran The rebate that govern ment offers during festi val seasons, which goes up to 30 per cent, is a big attraction. Sreekumaran said that the benefits were passed on to the weavers and spinners According to him, khad doesn't need a celebrity brand ambassador since it already has a message from the Mahatma.











Fai’s shadow stalks India-Pak MPs conference


The shadow of Pak agent Ghulam Nabi Fai who has been charged by the FBI stalks a two-day conference of MPs from India and Pakistan — the India-Pakistan Parliamentarians Dialogue — that began at Vigyan Bhawan annexe today.
The links to Fai lie silently buried in the list of the board of advisors to the Pakistan Institute of Legislative Development and Transparency (PILDAT), the non-profit organisation facilitating this dialogue from the Pakistan side.
As per PILDAT, nearly 40 Indian MPs are expected to attend, including Mani Shankar Aiyar, Jaswant Singh and Shashi Tharoor. Some 20 MPs have come from Pakistan, including Mir Jan Muhammad Khan Jamali, deputy chairman of the Pakistan Senate.
PILDAT’s advisors include Lord Nazir Ahmed who heads the UK Parliamentary Group on Kashmir, and is believed to have close connections with the Kashmir Centre in London run by a Fai affiliate, the Justice Foundation.
This London centre is mentioned in the FBI chargesheet against Fai. “The KAC (Kashmir American Council) was founded in 1990 and goes by the name Kashmir Centre. It is one of the three Kashmir Centres that this investigation revealed are run by elements of the Government of Pakistan. The others are Justice Foundation/Kashmir Centre located in London, England, run by Nazir Ahmad Shawl and the Kashmir Centre — European Union, located in Brussels, Belgium, run by Abdul Majeed Tramboo. The director of KAC is Syed Ghulam Nabi Fai, who often works out of his home in Fairfax, Virginia.”
According to Ahmed’s disclosure in the UK Parliament’s Register of Interests, he enjoyed the hospitality of the Justice Foundation in February. This direct involvement of the UK Parliamentary Group on Kashmir with the Justice Foundation and its Kashmir Centre in London is also a subject of an official protest by the Indian High Commission in London. Ahmed has been in the forefront of the campaign in UK for the Kashmiri right to self-determination. He originally belongs to Mirpur in PoK.
Another member of the board of PILDAT’s advisors is Mohammed Sarwar, a British Labour Party politician and a former MP from Glasgow Central. The seat is now represented by his son Anas Sarwar, who is also a member of the UK Parliamentary Group on Kashmir.
In 2006, the Justice Foundation organised a two-day International Kashmir Peace Conference in the House of Commons, where Mohammed Sarwar called for the UN to appoint a special envoy for Kashmir. That session of the seminar was chaired by Fai himself.
Another British MP Khalid Mahmood had in the same conference, which even came out with a London Declaration, called for internationally monitored elections in J&K. Now, Mahmood makes up for the third Pak-origin British politician in PILDAT’s board of advisors.
The Indian co-chair for the event is former Finance and External Affairs Minister Yashwant Sinha. When contacted, Sinha told The Indian Express: “PILDAT is facilitating the Pakistani delegation for the dialogue. This is a completely private effort but we have informed Parliament and also the Ministry of External Affairs. We have not gone into such detail but nobody has ever objected. I had earlier traveled to Islamabad in January for this dialogue.” In January, the MEA had raised a red flag on PILDAT and the British origins of its funding. As reported by The Indian Express on January 5, the Lok Sabha Secretariat had informed the MPs then that if they participate, they should not accept foreign funding. The matter was somewhat resolved with PILDAT giving an assurance that it will not use the funds obtained from British sources for this purpose.



अमेरिका भारतवंशियों को तय समय में ही करनी पड़ेगी विदेशी खातों की घोषणा : यूएस


अमेरिकी वित्त विभाग ने भारतीय मूल के अमेरिकी समुदाय के उस अनुरोध को खारिज कर दिया है। इसमें विदेशी खातों के बारे में घोषणा किए जाने की समय सीमा 31 अगस्त से बढ़ाकर 31 दिसंबर करने और घोषणा न करने के एवज में जुर्माने की राशि घटाने की मांग की गई है। ग्लोबल ऑर्गनाइजेशन ऑफ पीपुल ऑफ इंडियन ओरिजिन (गोपियो) की ओर से अमेरिकी वित्त मंत्री टिमोथी गेथनर को जून में दिए गए पत्र के जवाब में विभाग ने कहा, इस समय हम सभी करदाताओं के लिए समय सीमा बढ़ाने पर विचार नहीं कर सकते। जुर्मानों को घटाने के संदर्भ में गोपियो का अनुरोध खारिज करते हुए वित्त विभाग ने कहा है कि ऐसे खातों के बारे में 2011 की स्वैच्छिक खुलासे की पहल अघोषित संपत्ति वाले करदाताओं को समस्याओं के समाधान के लिए एक रास्ता मुहैया कराता है। गोपियों की उस शिकायत का जिक्र करते हुए, जिसमें कहा गया था कि स्वैच्छिक घोषणा की पहल के बारे में किसी नस्लीय समाचार पत्र और अन्य भाषाई सामुदायिक मीडिया में जानकारी प्रकाशित नहीं की गई थी। वित्त विभाग ने कहा कि उसने वेबसाइट आईआरएसडॉटजीओवी पर हिंदी सहित आठ विदेशी भाषाओं में इस बारे में जागरूकता के लिए सूचनाएं प्रकाशित की थी। विभाग ने कहा है, हमने पारंपरिक मीडिया के साथ ही ट्विटर जैसे सामाजिक मीडिया के जरिए भी सूचना जारी की है। हम इस प्रयास को 31 अगस्त, 2011 तक की समय सीमा तक जारी रखेंगे। गोपियो ने कहा कि भारतीय सामुदायिक संगठनों ने हालांकि तय किया है कि वे इस मुद्दे पर पुनर्विचार करने के लिए वित्त विभाग पर अपना दबाव बनाते रहेंगे। जिन चार संगठनों ने इस मुद्दे पर अभियान छेड़ रखा है, उनमें गोपियो, नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन अमेरिकन एसोसिएशंस, अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ फिजिशियंस ऑफ इंडियन ओरिजिन व एशियन अमेरिकन होटल ओनर्स एसोसिएशन शामिल हैं।



जातिगत भेदभाव के चलते भारतीय दंपति को नौकरी से निकाला


ब्रिटेन में भारतीय दंपति ने अपने नियोक्ता पर गैर कानूनी तरीके से नौकरी से बर्खास्त करने और जाति के आधार पर भेदभावपूर्ण व्यवहार करने का आरोप लगाया है। लॉ कंपनी में प्रबंधक रहे विजय बेगराज और उनकी पत्नी अमरदीप ने इस मामले में रोजगार न्यायाधिकरण का दरवाजा खटखटाया है। ब्रिटिश समाचार पत्र द टाइम्स के अनुसार इन दोनों पर अत्याचार इसलिए किया गया, क्योंकि बेगराज दलित हैं और उनकी पत्नी अमरदीप सिख जट्ट हैं। रिपोर्ट के अनुसार कार्यस्थल पर विकसित चार साल की दोस्ती के बाद दोनों ने शादी करने का निर्णय लिया। अमरदीप के मुताबिक जब उनके नियोक्ताओं को उनके रोमांस के बारे में पता चला तब उनका करियर चौपट कर दिया गया। हीर मनक नामक कंपनी के उच्चाधिकारियों ने दोनों को शादी करने से रोकने का प्रयास किया। गुरुद्वारे में शादी के दौरान भी अमरदीप पर कटाक्ष किया गया और कहा गया, कैसे वह अपने से निचली जाति में शादी कर सकती है। इसके बाद अमरदीप को परेशान किया जाने लगा और उसे पिछले साल नौकरी छोड़नी पड़ी। कंपनी ने विजय को तो 2010 में ही निकाल दिया था। दूसरी ओर कंपनी ने इस दंपति के आरोपों का खंडन किया है। यह मामला ऐसे समय में प्रकाश में आया है जब ब्रिटेन की गृहमंत्री थेरेसा इस बात पर विचार कर रही हैं कि ब्रिटिश समानता कानून में नस्ल, लिंग, धर्म लिंगभेद के साथ जाति को शामिल किया जाए या नहीं। भारतीय टैक्सी चालक की हत्या करने वाले चीनी को 15 साल की कैद बीजिंग, एजेंसी : चीन की अदालत ने पिछले साल न्यूजीलैंड में भारतीय मूल के टैक्सी चालक के हत्यारे को 15 साल कैद की सजा सुनाई है। ऑकलैंड के टैक्सी चालक 39 वर्षीय हिरेन मोहिनी की चीनी नागरिक ने किराए को लेकर बहस के चलते 31 जनवरी 2010 को हत्या कर दी थी। हत्या के बाद शंघाई निवासी 24 वर्षीय श्याओ मौके से भाग गया। उसने चाकू घोंपकर हत्या की बात कबूली थी। शंघाई के सेकेंड इंटरमिडिएट कोर्ट ने श्याओ को दोषी ठहराते हुए आज यह सजा सुनाई। 15 साल कैद की सजा के अलावा श्याओ चार साल तक अपने राजनीतिक अधिकारों से वंचित रहेगा।



पाक ने फिर माना, भारत से खतरा नहीं


: भारत को सबसे बड़ा खतरा मानने वाले पाकिस्तान के रुख में बदलाव आया है। पहली बार पाकिस्तानी अधिकारियों ने स्वीकारा है कि पूर्वी सीमा से बड़ी संख्या में सैनिकों और सैन्य साजो-सामान को हटाने के बावजूद उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा को भारत से कोई खतरा नहीं है। इन सैनिकों को पश्चिमी सीमा पर तैनात किया है। ताकि अलकायदा और तालिबान आतंकियों से लोहा ले सके। वाशिंगटन में पाकिस्तानी दूतावास ने कई देशों के राजनयिकों को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के संदर्भ में जानकारी देने के दौरान यह बात स्वीकार की। अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत हुसैन हक्कानी ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में वित्तीय सहायता और साजो-सामान समेत अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पाकिस्तान की मदद करनी चाहिए। इस बैठक में भारत के रक्षा अधिकारियों को आमंत्रित नहीं किया गया था। पाकिस्तानी राजनयिकों ने बताया कि भारतीय सीमा से सेना की पांच टुकडि़यों को हटाया गया है, जबकि अफगानिस्तान की सीमा से लगे कबाइली इलाकों में सात से नौ टुकडि़यां तैनात की गई हैं। राजनयिकों ने कहा कि पाकिस्तान की पश्चिमी सीमा पर 450 तोपों और 142 टैंकों की तैनाती की गई है। एक राजनयिक ने कहा, इस घटनाक्रम ने उस धारणा को खारिज कर दिया है कि पाकिस्तान सेना पूर्वी सीमा को खुद के लिए सबसे बड़ी चुनौती मानती है। इससे पहले पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और आइएसआइ प्रमुख शुजा पाशा ने भी भारत से खतरा न होने की बात कही थी।







कश्मीर के हालात पर अमेरिकी सांसद ने जताया संतोष


नई दिल्ली अमेरिका के वरिष्ठ सीनेटर (सांसद) जॉन मैक्केन ने जम्मू-कश्मीर का दौरा करने के बाद वहां के सुरक्षा हालात पर संतोष जताया है। पहली बार जम्मू-कश्मीर की यात्रा कर लौटे रिपब्लिकन पार्टी सीनेटर ने इसपर भी तसल्ली जताई की न केवल सूबे में लोगों का जनजीवन सामान्य हो रहा है बल्कि पर्यटन और कारोबार भी बढ़ रहा है। उन्होंने माना कि पाकिस्तानी सेना और हक्कानी नेटवर्क व लश्कर ए तोयबा जैसे आतंकी संगठनों के साथ सामने आ रहे संबंधों अमेरिका में भी चिंता बढ़ा रहे हैं। दक्षिण एशिया के दौरे पर आए एरिजोना प्रांत के सिनेटर मैक्केन ने लद्दाख ही नहीं जम्मू-कश्मीर के इलाकों का भी यात्रा की और राज्य के नेताओं से मुलाकात की। पिछले राष्ट्रपति चुनाव में बराक ओबामा के खिलाफ रिपब्लिकन पार्टी के प्रत्याशी रहे मैक्केन ने कहा कि घाटी के सुरक्षा हालात को लेकर लोगों का भरोसा लौट रहा है। भारत से पहले पाक से आए मैक्केन ने पाक सेनाप्रमुख जनरल परवेज कियानी के साथ अपनी वार्ता में कश्मीर मुद्दे पर किसी तरह की बातचीत से इंकार किया। मैक्केन ने इतना माना की बीते कुछ महीनों में जिस तरह पाक सेना और दक्षिण एशिया में सक्रिय आतंकी संगठनों के बीच रिश्ते सामने आए हैं उसे लेकर अमेरिका में भी बहस जारी है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ अमेरिकी दोस्ती अहम है लेकिन इसका आधार उम्मीद नहीं, तथ्य होने चाहिए। मालूम हो कि एफबीआइ ने बीते दिनों कश्मीर पर पाक प्रायोजित प्रचार के सरगना गुलाम नबी फई को आइएसआइ से पैसा हासिल करने के आरोपों में गिरफ्तार किया था।



Wednesday, August 17, 2011

पाकिस्तान ने चीन भेजा अमेरिका के स्टील्थ हैलिकप्टर का मलबा


अमेरिका को जिस बात का डर था, वही हुआ। पाकिस्तान ने उसके रडार से बच निकलने वाले स्टील्थ हेलीकॉप्टर का मलबा अपने मित्र चीन तक पहुंचा दिया है। मीडिया रिपोर्टो के अनुसार पाकिस्तान ने न केवल चीनी सेना के इंजीनियरों को आमंत्रित कर इस हेलीकॉप्टर के मलबे की व्यापक तस्वीरें खींचने की इजाजत दी, बल्कि उसके कुछ हिस्से भी अपने साथ ले जाने दिए। यह बात अमेरिका और पाकिस्तान के संबंधों में पड़ी दरार को और चौड़ी करने का काम करेगी। अमेरिका के नेवी सील्स ने 2 मई को एबटाबाद में अलकायदा के सरगना ओसामा बिन लादेन तक पहुंचने और उसे मार गिराने के लिए इन्हीं हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया था। इस अभियान में एक स्टील्थ हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था और एबटाबाद स्थित लादेन की वजीरिस्तान हवेली में ही गिर गया। इस कारण से अमेरिकी सैनिकों ने हेलीकॉप्टर को मौके पर ही जला दिया, क्योंकि वे मलबा साथ ले जाने में सक्षम नहीं थे। अमेरिका के यह स्टील्थ हेलीकॉप्टर बेहद उन्नत प्रौद्योगिकी का है। इसमें एक विशेष कोटिंग डिजाइन है जिसकी मदद से यह रडार को चकमा देने में सक्षम है। दरअसल स्टील्थ हेलीकॉप्टर में ऐसे ब्लेड भी बनाए गए हैं, जिनसे आवाज न के बराबर होती है। चीन लंबे समय से मानव रहित अमेरिकी विमान ड्रोन और स्टील्थ जैसे हेलीकॉप्टर विकिसित करने का प्रयास कर रहा है। द न्यूयार्क टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि चीनी इंजीनियरों ने पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों के निमंत्रण पर स्टील्थ हेलीकॉप्टर के अलग हो चुके पिछले हिस्से की व्यापक तस्वीरें ली हैं, जिसमें रडार से बचने के लिए गुप्त प्रौद्योगिकी लगी थी। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया, चीन के साथ पाकिस्तान का ऐसा सहयोग भड़काऊ है। रिपोर्ट में कहा गया, जिस कार्रवाई में ओसामा मारा गया, उसके कुछ दिन बाद पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ ने संभवत: चीनी सैन्य इंजीनियरों को स्टील्थ हेलीकॉप्टर के मलबे की जांच की अनुमति दी थी। खुफिया जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने कहा कि अमेरिकी आशंका टैप की गई एक बातचीत पर आधारित है, जिसमें पाकिस्तानी अधिकारी चीनियों को दुर्घटनास्थल पर आने का न्योता देने की बात करते सुनाई पड़ते हैं। चीन के पहले विमानवाहक ने समुद्री परीक्षण पूरा किया बीजिंग, एजेंसी : विश्व में चिंता प्रकट करने वाले चीन के पहले विमानवाहक अपनी प्रणालियों और क्षमताओं के परीक्षण के लिए चार दिन की समुद्री यात्रा के बाद अपने ठिकाने पर लौट आया है। विमानवाहक में यूक्रेन से आयातित वेरयाग नामक प्लेटफार्म फिर से लगाया गया। शिन्हुआ संवाद समिति ने बताया कि पीले सागर में चार दिन के परीक्षण के बाद वह चीन के लिओनिंग प्रांत के डालियान बंदरगाह लौट आया। परीक्षण के दौरान विमानवाहक की इलेक्ट्रानिक प्रणालियों, नौवहन प्रणालियों तथा हथियारों को परखा गया। चीन के एक विशेषज्ञ यिन झुओ के अनुसार इसकी रडार प्रणाली दुनिया के सर्वाधिक उन्नत प्रणाली में एक है। विमानवाहक में चीनी निर्मित 30 जे-15 लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर तथा चालक दल के करीब 2000 सदस्यों की क्षमता है। उसके अगले सात अगस्त में औपचारिक तौर पर चीन की नौसेना में शामिल होने की उम्मीद है।


Tuesday, August 16, 2011

: पाकिस्तान ने अपने ग्वादर बंदरगाह के विकास के लिए चीन से मदद मांगी


अरब सागर से होकर मध्य पूर्व के देशों के बीच चीन के आर्थिक कारोबार की दृष्टि से यह बंदरगाह एक प्रमुख केंद्र के तौर पर काम करेगा। पाकिस्तान की इस महत्वाकांक्षी परियोजना में बंदरगाह के विकास के साथ ही इसे दूरसंचार, रेल, सड़क, और हवाई मार्ग से जोड़ना भी शामिल है। इस बंदरगाह की स्थापना भी पाकिस्तान ने चीन की मदद से ही की थी। ग्वादर बंदरगाह मध्य पूर्व और हिंद महासागर की अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार है। चीन में पाकिस्तान के राजदूत मसूद खान ने रविवार को संवाददाताओं से कहा कि चीन की ही मदद से ग्वादर बंदरगाह का निर्माण हुआ था और अब हम इसके विस्तार में भी चीन की भूमिका का स्वागत करते हैं। मसूद खान ने कहा ग्वादर बंदरगाह को रेल, सड़क और हवाई संचार जैसे बुनियादी ढांचे से जोड़ने के लिए जरूरी विकास किया जाना है। चाइना डेली ने मसूद खान के हवाले से बताया कि जब यह नेटवर्क ग्वादर से उरुम्की और बीजिंग तक चालू हो जाएगा तो इससे चीन के पास मध्य पूर्व और यूरोप के साथ व्यापार करने का विकल्प होगा। उन्होंने कहा कि पाक-चीन ऊर्जा, दूरसंचार, कृषि व कई अन्य क्षेत्रों में एक दूसरे का सहयोग कर रहे हैं।

वाजपेयी की उदारता पर भारी पड़ा कारगिल


पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की उदारता की तारीफ करते हुए कहा है कि 1999 में वे कश्मीर सहित सभी मसलों को हल करने के लिए तैयार थे, लेकिन कारगिल के दुर्भाग्य ने दोनों देशों के बीच वार्ता की गाड़ी को पटरी से उतार दिया। इस प्रकरण की जांच के लिए जल्दी ही एक आयोग का गठन किया जाएगा। पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ का नाम लिए बगैर शरीफ ने कहा कि सभी जानते हैं कि कारगिल के लिए कौन जिम्मेदार था। वह दिन आएगा जब आयोग की जांच से यह पता चलेगा कि कारगिल युद्ध किसने और क्यों शुरू किया था ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोका जा सके। यहां एक सेमिनार को संबोधित करते हुए शरीफ ने कहा कि कारगिल के कारण न सिर्फ पाकिस्तान को नुकसान हुआ बल्कि उस शख्स का भी अवसान हुआ जो इसके लिए जिम्मेदार था। बकौल शरीफ, 1999 में वाजपेयी की लाहौर यात्रा के दौरान उन्हें काफी हैरानी हुई जब पता चला कि भारतीय प्रधानमंत्री कश्मीर सहित सभी मसलों का हल चाहते हैं। उन्होंने कहा, मैं भी बातचीत के लिए उत्सुक था लेकिन हिचक रहा था क्योंकि मुझे डर था कि पाकिस्तान की जनता इसे स्वीकार नहीं करेगी लेकिन जब उन्होंने (भारतीय नेता) पहल की तो मैं भी इसके लिए खुशी-खुशी तैयार हो गया। दोनों देशों के बीच दोस्ताना संबंधों की हिमायत करते हुए शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान की खुशहाली भारत से जुड़ी हुई है। दोनों देशों को मामूली अड़चनों को दूर करते हुए शांति स्थापित करने की दिशा में काम करना चाहिए। लेकिन कश्मीर के कारण इसमें अपेक्षित प्रगति नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने परमाणु परीक्षण नहीं किया होता तो बेहतर होता। हालांकि इसी वजह से दोनों देशों के प्रधानमंत्री करीब भी आए, लेकिन कारगिल ने सारा खेल बिगाड़ दिया।

ब्रिटेन में भी लामबंदी कर रहा था फई


अमेरिका में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ के लिए कथित रूप से काम करने वाले उसके अघोषित एजेंट सैयद गुलाम नबी फई के बारे में नया खुलासा हुआ है कि वह ब्रिटेन में भी एक संगठन का प्रमुख और वहां पर भारत के खिलाफ लामबंदी करने में जुटा था। वाशिंगटन स्थित कश्मीरी-अमेरिकन परिषद के प्रमुख फई को हाल में अमेरिका की संघीय एजेंसी एफबीआइ ने गिरफ्तार किया है। उस पर आरोप है कि कश्मीर पर अमेरिकी सांसदों का दृष्टिकोण बदलने के लिए उसे आइएसआइ से हजारों डॉलर दिए गए। द डेली टेलीग्राफ की खबर के अनुसार 62 वर्षीय फई ब्लूम्सबरी स्थित जस्टिस फाउंडेशन का भी निदेशक है। यह संगठन ब्रिटेन में कश्मीर पर पाकिस्तानी हितों को साधने के लिए ब्रिटिश संासदों के लिए ढेर सारे कार्यक्रम आयोजित कराता है और उसके लिए उसे गुप्त तरीके से धन उपलब्ध कराया जाता है।



पाक में नागरिकों के उत्पीड़न पर अमेरिका आगबबूला


अमेरिका ने पाकिस्तान में अपने नागरिकों के साथ उत्पीड़न की घटनाओं पर चिंता जाहिर करते हुए अमेरिकी दूतों के आवागमन के लिए अनिवार्य अनापत्ति प्रमाणपत्र की व्यवस्था वापस लेने की मांग की है। अमेरिका ने यह चिंता ऐसे समय में जाहिर की है, जब बंदूकधारियों ने लाहौर में एक अमेरिकी सहायता विशेषज्ञ को अगवा कर लिया है। जियो न्यूज के अनुसार अमेरिकी सीनेटर जॉन मैक्केन ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल अशफाक परवेज कयानी से मुलाकात कर पाक-अमेरिका संबंधों के साथ ही आतंकवाद निरोधी संयुक्त सहयोग बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की। पाकिस्तानी रक्षा बलों से संबंधित इंटर सर्विसिस पब्लिक रिलेशंस ने कहा है कि मुलाकात के दौरान मैक्केन ने पाकिस्तान में अमेरिकी नागरिकों के उत्पीड़न पर चिंता जाहिर की और अमेरिकी दूतों के आवागमन के लिए अनिवार्य अनापत्ति प्रमाणपत्र की व्यवस्था वापस लिए जाने की मांग की। ज्ञात हो कि शनिवार को 10 से ज्यादा बंदूकधारियों ने एक अमेरिकी नागरिक को लाहौर स्थित उसके घर में घुसकर अगवा कर लिया। पुलिस ने कहा कि आठ की संख्या में बंदूकधारियों ने अमेरिकी सहायता विशेषज्ञ के घर के पिछले दरवाजे से घुस कर उसके सुरक्षा रक्षकों को दबोच लिया और अमेरिकी नागरिक को अगवा कर लिया। अमेरिकी दूतावास के अनुसार अगवा किए गए व्यक्ति की पहचान वारेन वेनस्टेन के रूप में हुई है। अपनी उम्र के 60वें दशक में चल रहा वह व्यक्ति एक निजी कंपनी के लिए काम करता है। इस सप्ताह के प्रारंभ में अमेरिका ने यह कहते हुए अपने नागरिकों के लिए एक यात्रा परामर्श जारी किया था कि सहायताकर्मियों व पत्रकारों सहित कई सारे अमेरिकियों को पाकिस्तान में गलत तरीके से जासूस बताया जा रहा है। अमेरिकी नागरिक के अपहरण के पीछे पूर्व पाक कमांडो लाहौर : पंजाब प्रांत की राजधानी से अमेरिकी नागरिक के अपहरण के पीछे पाकिस्तानी सेना से भागे हुए एक कमांडो का हाथ होने की खबर आ रही है। अमेरिकी नागरिक वारेन वेन्सटेन के अपहरण में विशेष सेवा समूह (एसएसजी) के एक पूर्व सदस्य का हाथ होने का संदेह है। वह वेन्सटेन के निवास पर गार्ड के रूप में काम कर रहा था। वेन्सटेन का शनिवार को दस बंदूकधारियों ने अपहरण कर लिया था। कानून प्रवर्तन एजेंसी से जुड़े एक सूत्र ने कहा कि वह कुछ समय पहले सेना से भाग गया था।

खनल का इस्तीफा, नेपाल फिर संकट मेंकाठमांडू


दिनभर चले नाटकीय राजनीतिक घटनाक्रम के बाद अंतत: नेपाल के प्रधानमंत्री झलनाथ खनल ने रविवार की शाम राष्ट्रपति रामबरन यादव को इस्तीफा सौंप दिया। इससे पहले सोमवार को उनके इस्तीफा देने की संभावना थी, लेकिन शाम को हुई कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल की सेंट्रल कमेटी की बैठक में इस्तीफा देने संबंधी उनकी पूर्व घोषणा मंजूर हो जाने के बाद उन्होंने तुरंत राष्ट्रपति को इस्तीफा सौंप दिया। प्रधानमंत्री खनल के इस्तीफे के साथ ही अगले सरकार के गठन की अनिश्चितता के बीच नेपाल में एक बार फिर राजनीतिक संकट की स्थिति पैदा हो गई है। इससे देश के नए संविधान बनाने व शांति स्थापना की प्रक्रिया भी प्रभावित होगी। खनाल ने पहली अगस्त को कहा था कि यदि वे गठबंधन सरकार के बीच प्रमुख मतभेदों पर सहमति नहीं बना सके तो वे 13 अगस्त को अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। बाद में उन्होंने 10 अगस्त को संसद में भी अपना वादा दोहराया था। दूसरी ओर शनिवार को तय समय बीत जाने के बाद भी उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया तथा वे लगातार अगली सरकार के लिए आम सहमति बनाने के लिए लगातार राजनीतिक दलों से बैठक कर बातचीत में जुटे हुए थे। रविवार को दिन में उन्होंने देश में संवैधानिक संकट की दुहाई देते हुए नई सरकार के गठन की आम सहमति बनने तक इस्तीफा नहीं देने की बात कही थी, लेकिन शाम होते-होते उन्हें इस्तीफा देना ही पड़ा।


Friday, August 12, 2011

श्री लंका में बढता का चीन दखल


माफीनामे पर पाक पायलट को माकूल जवाब


46 साल बाद अपनी गलती के लिए माफी मांगने वाले पाकिस्तानी पायलट को भारतीय पीडि़त परिवार ने माफ कर दिया। 1965 में भारत-पाक युद्ध के दौरान शहीद भारतीय पायलट जहांगीर इंजीनियर की बेटी फरीदा सिंह ने पाकिस्तानी पायलट कैस मजहर हुसैन के माफीनामे का शालीनता भरा जवाब दिया है। कैस मजहर के पत्र के लिए फरीदी सिंह ने उनका शुक्रिया अदा किया है और कहा है कि जो कुछ भी हुआ वो युद्ध की अस्तव्यस्तता के बीच हुआ। इस युद्ध के दौरान एक भारतीय नागरिक विमान कच्छ के रन में भारत और पाकिस्तान की सीमा की ओर भटक गया था। कैस मजहर हुसैन ने इस भारतीय विमान पर हमला किया, जिसमें जहांगीर इंजीनियर के अलावा उक्त विमान में सवार गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री बलवंत राय मेहता और उनकी पत्‍‌नी सरोजबेन मेहता समेत कुल सात लोग मारे गए थे। इस घटना के 46 साल बाद कैस मजहर हुसैन ने मारे गए पायलट की बेटी फरीदा सिंह को एक पत्र लिख कर संवेदना व्यक्त की और कहा कि उन्हें उस हादसे पर बहुत खेद हुआ। कैस ने अपने पत्र में कहा कि उन्हें ये मालूम नहीं था कि उस विमान में आम लोग सवार थे और उन्होंने अपना कर्तव्य निभाने के लिए ऐसा किया। 1965 के इस हादसे के कुछ घंटों बाद जब ऑल इंडिया रेडियो ने घोषणा की कि जिस विमान पर पाकिस्तान के पायलट ने गोली चलाई थी, वह एक असैन्य विमान था, तो दोनों तरफ अफसोस का माहौल पैदा हो गया था। अपने पत्र में फरीदा सिंह ने लिखा कि ये सच है कि इस हादसे ने हमारे परिवार के भविष्य को हमेशा के लिए बदल दिया था। लेकिन हमने कभी भी उस इंसान के बारे में बुरी भावना नहीं रखी, जिसने विमान पर निशाना लगाया था। सच्चाई तो ये है कि ये सब कुछ युद्ध के बीच हुआ। हम सभी युद्ध और शांति के घिनौने खेल के महज मोहरे हैं। अपने पिता को बेहद साहसी और दयालु इंसान बताते हुए फरीदा सिंह ने कैस मजहर हुसैन को लिखे पत्र में कहा है, क्योंकि मेरे पिता बेहद दयालु किस्म के थे, इसलिए आपका पत्र मिलने के बाद आपकी ओर हाथ बढ़ाने में मुझे कोई तकलीफ नहीं हो रही है। ये हादसा एक उदाहरण है, जो ये साबित करता है कि अर्थहीन जंग अच्छे इंसानों से क्या-क्या करवाती है। उन्होंने मजहर हुसैन को लिखा है कि वह समझती हैं कि उनके लिए ये पत्र लिखना बेहद कठिन रहा होगा। उन्होंने कैस मजहर की हिम्मत की तारीफ भी की है। पत्र में लिखा है कि उन्हें मालूम नहीं कि कैस मजहर का पत्र कैसे सार्वजनिक हुआ। हालांकि इसके बाद फरीदा ने ये लिखा है, मुझे ख़ुशी है कि ये पत्र सार्वजनिक हुआ क्योंकि इससे सिर्फ जख्म भरेगा और कोई नुकसान नहीं होगा। इसका लाभ व्यक्तिगत ही नहीं, बल्कि एक बड़े पैमाने पर होगा। अगर मेरे पिता जिंदा होते तो उन्हें ये देखकर अच्छा लगता कि एक पत्र से दो मुल्कों के बीच माफी का सिलसिला शुरू हुआ। आखिरकार किसी समय में ये दो मुल्क एक हुआ करते थे। कैस मजहर हुसैन का कहना है कि वह उस हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों की तलाश कर रहे हैं और उनको अगर कोई पता मिलता है तो वह उनको भी संवेदना के पत्र लिखेंगे।



प्रतिष्ठित ड्यूक विश्वविद्यालय में पहली बार ऊषा राजगोपालन नामक हिंदू धार्मिक गुरु (चैपलेन) की नियुक्ति


उन्होंने एक अगस्त से ही काम करना शुरू कर दिया है। विश्वविद्यालय ने एक बयान में कहा है कि ऊषा राजगोपालन हिंदी, तमिल व मलयालम भाषाओं पर अच्छी पकड़ रखती हैं। अन्नामलाई और मैरीलैंड विश्वविद्यालयों की डिग्री उनके पास है। यही नहीं ऊषा ट्राइएंगल क्षेत्र में हिंदू पूजा सेवाओं की प्रमुख रही हैं। 2009 में ट्राइएंगल समुदाय फाउंडेशन की ओर से उन्हें सामुदायिक सेवा के लिए कैथ्रीन वालेस पुरस्कार दिया जा चुका है। ऊषा ने कहा, हिंदूत्व व सनातन धर्म कोई धर्म नहीं बल्कि जीवन जीने का तरीका है। ड्यूक चैपल के डीन शमूएल वेल्स ने कहा कि वो विभिन्न मान्यताओं पर ऊषा राजगोपालन के परिप्रेक्ष्य का स्वागत करते हैं। ड्यूक विश्वविद्यालय में हिंदू छात्र संघ की स्थापना 1998 में हुई थी, जो शास्त्र अध्ययन, हिंदू त्योहारों और हिंदू धर्म के प्रति जागरुकता लाने के लिए कार्यक्रम आयोजित करता है।


लंदन में दंगे थमे पर भारत की चिंता बरकरार


नई दिल्ली लंदन में दंगों की आग तो काबू में आ गई, लेकिन वहां मौजूद भारतीयों की हिफाजत को लेकर नई दिल्ली की चिंता कम नहीं हुई है। विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने इस मामले पर लंदन स्थित उच्चायोग को ब्रिटेन में मौजूद भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हिदायत दी है। सूत्रों के मुताबिक कृष्णा ने उच्चायोग को भेजे अपने संदेश में भारतीय समुदाय के लोगों की हिफाजत के उपायों के लिए ब्रिटेन सरकार से बात करने को कहा है। साथ ही वहां मौजूद भारतीय क्रिकेट टीम के सुरक्षा उपायों पर भी ध्यान देने की ताकीद की है। इसमें न केवल खेल के दौरान, बल्कि टीम की आवाजाही और प्रैक्टिस के दौरान भी अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था कराना शामिल है। इस बारे में संपर्क करने पर उच्चायोग सूत्रों का कहना था कि लंदन में हालात धीरे-धीरे समान्य हो रहे हैं और भारतीय समुदाय के साथ लगातार संपर्क बनाये रखा जा रहा है। क्रिकेट टीम की सुरक्षा के बारे में पूछे जाने पर सूत्रों ने बताया कि ब्रिटेन सरकार ने यह भरोसा दिलाया है कि स्थिति को नियंत्रण में लाने के साथ ही सबकी सुरक्षा मुकम्मल करने के उपाय हो रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि लगातार चार दिन चले दंगों में भारतीय समुदाय सुरक्षित है। दंगों ने जहां लंदन के उत्तर, उत्तर पूर्व, दक्षिण और दक्षिण पूर्व को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है वहीं, भारतीयों की आबादी अधिकतर पश्चिमी हिस्से में है, जहां हिंसक वारदातों का ज्यादा असर नहीं हुआ है। बहरहाल, लंदन और ब्रिटेन के कुछ अन्य हिस्सों में लूटमार, तोड़फोड़ व आगजनी की घटनाओं के बाद उच्चायोग ने भारतीयों के लिए एडवाइजरी जारी की है। इसके मुताबिक भारतीय समुदाय के लोगों को मीडिया की खबरों पर नजर रखने, स्थानीय सरकार की सलाह पर गौर करने व प्रभावित इलाकों से दूर रहने को कहा गया है। गौरतलब है कि ब्रिटेन की छह करोड़ 18 लाख की आबादी में भारतीय मूल के लोगों की संख्या करीब 20 लाख है। वहीं इनमें से 40 फीसदी लोग बाहरी और भीतरी लंदन में रहते हैं। पश्चिमी और पूर्व मिडलैंड का इलाका भारतीय मूल के लोगों का गढ़ माना जाता है। ब्रिटेन में बीते ढाई दशक में अब तक के सबसे हिंसक दंगों ने पूरे मुल्क को सकते में डाल दिया है। भारी पुलिस प्रयोग के सहारे ब्रिटेन सरकार ने हालात को नियंत्रण में भले कर लिया हो, लेकिन स्थिति अब भी तनावपूर्ण है।



India, China need to talk more: NSA


There is a need for India and China to improve communication on key issues to ensure that there is no misunderstanding given the elements of ‘cooperation and competition’ that exist in bilateral relations, National Security Adviser Shivshankar Menon has said.
Listing China’s and Asia’s rise as one the key issues that will affect India’s ability to transform in the future, Menon cautioned that the current relationship between the two countries, despite a boundary dispute, can continue only if there is much better communication to dispel doubts on each others actions and motives.
“We have a boundary dispute, and overlapping peripheries in our extended neighbourhood which is also China’s neighbourhood. As long as we stick to our internal transformations, cooperate on common interests, we can expect the current relationship to continue.”
“This will require much better communication between India and China and no misunderstanding of each others actions and motives,” the NSA said, adding India is interested in an inclusive world order with China as one of its cooperative members.
In his speech on India and the Global Scene, Menon touched on India’s internal priorities of uplift of millions from below the poverty line and the implications this has with relations with the outside world.
Besides the rise of China and Asia, Menon named energy security and climate change as other factors that would affect the future ability to transform India. He named India’s ability to maintain internal cohesion as the third factor. The NSA said things like policing megacities and tackling Naxalism are major challenges that the country faces.
“We know that it is neither the application of force alone or a single-minded focus on development can solve the problem,” he said.
The NSA emphasised that India needs to learn new rules for the defence of its porous borders and said that the lack of indigenous defence production capabilities is a real strategic weakness. “A country that does not develop and produce its own major weapons platforms has a major strategic weakness and cannot claim true strategic autonomy,” he said.
Menon was delivering the 16th Prem Bhatia Memorial Lecture that was preceded by an award ceremony for excellence in journalism. The award for excellence in political reporting was shared by J Dey of the Mid Day who was gunned in Mumbai and Josy Joseph of The Times of India.


46 साल बाद पाक पायलट ने भारत से मांगी माफी


वर्ष 1965 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान एक भारतीय नागरिक विमान पर हमला कर उसे गिराने करने को लेकर पाकिस्तानी पायलट ने माफी मांग ली है। उक्त विमान के पायलट की बेटी को ई-मेल भेजकर माफी मांगी गई है। कैस हुसैन नामक इस पायलट ने भारतीय पायलट जहांगीर इंजीनियर द्वारा उड़ाए जा रहे विमान पर हमला कर दिया था। विमान में सवार गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री बलवंत राय मेहता और उनकी पत्‍‌नी सरोजबेन मेहता समेत कुल सात लोग मारे गए थे। दरअसल, युद्ध के दौरान कैस हुसैन पाकिस्तान वायुसेना में फ्लाइंग अफसर पद पर नए-नए बहाल हुए थे। उन्होंने 18 सितंबर, 1965 को भारतीय विमान बीचक्राफ्ट को मार गिराया था। तब बलवंत राय मेहता विमान में बैठकर भारत-पाकिस्तान की कच्छ सीमा का निरीक्षण कर रहे थे। पाकिस्तान वायुसेना के पूर्व अधिकारी कैसर तूफैल ने हाल ही में इस घटना की छानबीन की है। वह इस निष्कर्ष पर पहंुचे हैं कि पाक अधिकारियों ने गलत अंदाजा लगाया था कि भारतीय विमान निगरानी मिशन पर था। 70 वर्षीय हुसैन ने जहांगीर की बेटी फरीदा सिंह को लिखे ई-मेल में पूरे घटनाक्रम का जिक्र किया है। उन्होंने लिखा है, आपके पिता जिस विमान को उड़ा रहे थे वह मीलों भटक गया था। यह रण के कच्छ सीमा इलाके में ऊपर नीचे जा रहा था। हमारे रडार पर दर्ज हुआ। मैंने सोचा कि विमान एक नया मोर्चा खोलने के लिए हमारी टोह लेने आया है, इसलिए उसे घेर लिया। मगर उस पर तुरंत फायरिंग करने की बजाय मैंने अपने कंट्रोलर से संपर्क साधकर आगे की कार्रवाई के निर्देश मांगे। मुझे उम्मीद थी कि बिना फायरिंग किए वापस आने का निर्देश मिलेगा, लेकिन मुझे विमान को तुरंत मार गिराने का आदेश दिया गया। जब हमें पता चला कि उसमें मुख्यमंत्री सवार थे, तो हमारा मन खराब हो गया।


सीमा पर पाक-चीन अभ्यास की सुगबुगाहट ने बढ़ाई चिंता


नई दिल्ली पश्चिमी सीमा पर चीन और पाकिस्तानी सेना के साझा युद्धाभ्यास की खबरों ने भारतीय रक्षा तंत्र के कान खड़े कर दिए हैं। भारत से लगी सीमा से चंद किलोमीटर दूर इस अभ्यास को लेकर सरहद पार से आ रही खबरों के बीच सेना मुख्यालय इसकी हकीकत तलाशने में जुटा है। सेना मुख्यालय के आला अधिकारियों के अनुसार इस बारे में पाकिस्तान की ओर से उनके पास कोई सूचना नहीं आई है। लेकिन इस बाबत आई खबरों के बाद इसकी पुष्टि के कवायद जारी है। उल्लेखनीय है कि दोनों मुल्कों के बीच व्यवस्था डिविजन स्तर के युद्धाभ्यास की पूर्व सूचना एक-दूसरे को देने की है। लिहाजा यदि अभ्यास इससे निचले स्तर का हो पाकिस्तान को सूचना न देने का गलियारा मिल सकता है। खबरों के मुताबिक चीन और पाकिस्तान के सैन्य दस्ते पश्चिमी क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सीमा से कुछ किमी के फासले पर अभ्यास कर रहे हैं, जिसमें टैंक भी शिरकत कर रहे हैं। हालांकि आधिकारिक तौर पर इस अभ्यास की कोई पुष्टि अभी तक पाकिस्तान की ओर से नहीं की गई है। वैसे 2011 में दोनों देशों के प्रस्तावित सैन्य अभ्यास की खबर इस साल फरवरी में पाकिस्तान के ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के प्रमुख जनरल खालिद शमीम वाइने की चीन यात्रा के दौरान भी आई थी। चीनी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने 23 फरवरी 2011 को वायने से बातचीत के आधार पर खबर दी थी कि दोनों देश कूटनीतिक संबंधों की 60वीं सालगिरह के मौके पर 2011 में सेना और वायुसेना के दो साझा अभ्यास करेंगें। चीन और पाकिस्तान की सेनाओं का गठजोड़ नया नहीं है और यह सांठगांठ भारत के लिए हमेशा ही एक चिंता की सबब रही है। खासकर अंतर्राष्ट्रीय सीमा से महज कुछ किमी की दूरी पर यदि भारत के दो पड़ोसी मिलकर सैन्य अभ्यास करते हैं तो पेशानी पर चिंता की लकीरें लाजिमी हैं। पाक अधिकृत कश्मीर में चीनी सैनिकों की मौजूदगी की खबरों पर भी भारत अपनी चिंता जता चुका है। वहीं उत्तरी कमान के प्रमुख केटी परनायक ने बीते दिनों सरहदी इलाके में दोनों देशों की साझेदारी को भारत की सुरक्षा के लिए चिंता करार दिया था।





Wednesday, August 10, 2011

बांग्लादेशी जेल में 20 साल कैद रहने के बाद लौटा घर कोलकाता


अवैध रूप से घुसपैठ कर सीमापार गए बंगाल का एक बाशिंदा बांग्लादेशी जेल में 20 वर्षो तक सजा काट कर मंगलवार को घर लौटा। उसे बांग्लादेशी अदालत ने आ‌र्म्स एक्ट के तहत 30 साल कैद की सजा सुनाई थी, लेकिन उसके अच्छे चाल-चलन को देखते हुए 20 वर्षो तक जेल में रखने के बाद छोड़ दिया। 48 वर्षीय अमरेश विश्वास महानगर से सेट उत्तर चौबीस परगना जिले के अशोकनगर इलाके का रहने वाला है। उसकी जिन्दा रहने की आशा छोड़ चुके परिजनों ने अचानक अपने बेटे को देख फूले नहीं समा रहे हैं। नदिया जिले के पुलिस अधीक्षक एसआर मिश्रा ने बताया कि अमरेश अवैध रूप से जिले के बुरनपुर क्षेत्र के कुलोपाड़ा व तुंगी सीमा से बांग्लादेश में प्रवेश किया था। वह अपने किसी रिश्तेदार से मिलने के लिए गया था। कुछ दिनों बाद जब वह बस से दर्शना में चीनी मिल देखने के लिए जा रहा था उसी वक्त बांग्लादेशी पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। उस पर आ‌र्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर बांग्लादेशी कोर्ट में पेश किया गया जहां न्यायाधीश ने विश्वास को 30 वर्ष कैद की सजा सुना दी। अमरेश ने बताया कि मेरे पास कोई हथियार नहीं था इसके बावजूद मुझे 30 वर्ष की सजा सुना दी गई। छुट्टी के संचय और अच्छे आचरण को देखते हुए 20 साल में ही छोड़ दिया गया। सोमवार को गेदे सीमा पर बीडीआर ने उसे बीएसएफ को सौंपते हुए कहा कि अमरेश को बांग्लादेश में दोषी पाया गया था और मेहरपुर जेल में बंद था। बाद में बीएसएफ ने नदिया पुलिस को सौंप दिया। बाद में पुलिस ने उसके परिजनों को सूचना दी। इसके बाद परिजन उसे साथ ले गए।


झगड़ों में उलझे वार्ताकार


: जिन्हें देश के सबसे जटिल मुद्दे को सुलझाने की जिम्मेदारी दी गई थी, वे आपसी टकराव से ही नहीं उबर पा रहे हैं। कश्मीर पर केंद्र के वार्ताकारों के दल में गंभीर मतभेद पैदा हो गए हैं। इस बार एमएम अंसारी की टीका-टिप्पणियों से नाराज राधा कुमार ने गृह मंत्रालय से उनकी शिकायत की और इस्तीफे का प्रस्ताव किया। बाद में गृह मंत्रालय की मान-मनौव्वल के बाद उन्होंने इसे वापस ले लिया। माना जाता है कि कुमार ने गृह मंत्रालय से शिकायत में कहा कि वार्ताकार दल के एक सदस्य उनको बदनाम करने का अभियान चला रहे हैं। मंत्रालय ने उन्हें समझा-बुझाकर शांत किया और इस्तीफे जैसा कदम उठाने से रोक लिया। मंत्रालय ने इस विवाद पर मंगलवार को बयान जारी कर कहा, वार्ताकारों के दल ने जम्म-कश्मीर का अपना दौरा पूरा कर लिया है और अब अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप दे रहा है। राधा कुमार ने वार्ताकार की जिम्मेदारी से इस्तीफा नहीं दिया है। ताजा मामले में अंसारी ने राधा कुमार के ब्रुसेल्स दौरे पर अंगुली उठाई थी। यहां कश्मीर मसले पर एक सेमिनार आयोजित किया गया था, जिसके आयोजकों को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ से धन हासिल होने का पता चला है। जबकि राधा कुमार का कहना है कि उन्होंने विदेश मंत्रालय से इजाजत लेकर ही यह दौरा किया था। तीन सदस्यों के इस वार्ताकार दल में कुछ दिनों पहले भी विवाद हुआ था। तब अंसारी ने वार्ताकार दल के मुखिया दिलीप पडगांवकर के ऐसे ही एक दौरे पर सवाल उठाए थे। पडगांवकर ने अमेरिका में गुलाम नबी फई की ओर से आयोजित एक सेमिनार में भाग लिया था। फई को हाल ही में आइएसआइ का एजेंट होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।




After 46 yrs, the healing touch: Pak pilot says sorry for mistake


In September 1965, as the Indo-Pak war was drawing to a close, a Pakistani fighter jet shot down a civilian aircraft with the then chief minister of Gujarat, Balwantrai Mehta, on board. All eight people — Mehta and his wife, three aides, a journalist and the two pilots — were killed.
Forty-six years later, the Pakistani fighter pilot who shot down the Beechcraft has written to the daughter of the chief pilot of the downed Indian plane, expressing regret over the incident.
“If an opportunity ever arises that I could meet you face to face to condole the death of your father 46 years back I would grab it with both hands,” Qais Hussain has written in an email to Farida Singh, the daughter of distinguished IAF pilot Jahangir Engineer.
Engineer’s civilian plane was mistaken for a reconnaissance aircraft by Pakistani controllers, and he was ordered to shoot it down, Hussain has written. There was no intention to kill civilians, he has said.

Hussain told The Indian Express that he would like to write to the families of all those who were killed in the incident to explain that the plane was brought down only because he and his superiors were convinced that they were facing a military aircraft.
In his condolence email to Singh, Hussain, who was the only pilot in his plane, has explained that he carried out all possible checks, but all indications seemed to suggest that Engineer’s aircraft was an enemy warplane.
“I did not play foul and went by the rules of business but the unfortunate loss of precious lives, no matter how it happens, hurts each human and I am no exception. I feel sorry for you, your family and the other seven families who lost their dearest ones,” Hussain has said.
The pilot, who left service three years after the incident, told The Indian Express that he had decided to write to Singh to get his side of the story across. “I wanted to say that I was not a trigger-happy chap, and this happened in the confusion of war. It is a small gesture from my side to explain things to the family.”
“I was highly elated after I landed following the shooting down of what I thought was an enemy reconnaissance aircraft,” he said. “But in the evening when All India Radio announced the death of all the people, the mood was not as bright. We were all very sorry and dejected.”
Hussain added that there was no possibility of expressing regret at the time because of the hostile atmosphere in the aftermath of the war.
Hussain wrote the letter after former PAF pilot and writer Air Commodore Kaiser Tufail wrote a detailed account of the incident after interviewing all Pakistani officers connected with it, including the radar controller and operations superviser.
The intention, Tufail told The Indian Express, was to give the factual position and remove any lingering ill will over the incident. “My idea was to bring out the correct picture as little has been written about the incident in Pakistan. The issue was not of proving who was right or wrong, the idea was to find out what happened,” Tufail said.
In his detailed article, Tufail said Pakistani controllers mistook the civilian aircraft for a Packet C 119 aircraft that was being used at the time by the IAF for transport and reconnaissance missions. He also said that the Indian aircraft had strayed into Pakistani territory, and should not have been flying so close to the border during war.
In his letter to Singh, Hussain wrote that the incident was “as fresh in (his) mind as if it had happened yesterday”.
“Your father spotted my presence... and he started climbing and waggling his wings seeking mercy. Instead of firing at him at first sight, I relayed to my controller that I had intercepted an eight seat transport aircraft and wanted further instructions.
“At the same time, I was hoping that I would be called back without firing a shot. There was a lapse of 3 to 4 long minutes before I was given clear orders to shoot the aircraft,” Hussain wrote.
“Nonetheless, the unfortunate part in all this is that I had to execute the orders of my controller. Mrs Singh, I have chosen to go into this detail to tell you that it all happened in the line of duty and it was not governed by the concept that `everything is fair in love and war’, the way it has been portrayed by the Indian media due to lack of information...
“I hope and pray that you and your family stay well.”



Tuesday, August 9, 2011

प्रचंड ने किया चीन का समर्थक होने से इंकार


: भारत की शंका को दूर करने की कवायद के तहत माओवादी नेता प्रचंड ने स्पष्ट किया है कि वह चीन समर्थक नहीं हैं। उनका कहना था कि वह हमेशा से किसी ताकतवर पड़ोसी मुल्क की ओर नेपाल के झुकाव के विरोधी रहे हैं। लिहाजा उन्हें चीन समर्थक नहीं कहा जा सकता। मलेशिया दौरे पर रवाना होने से पहले प्रचंड रविवार रात को त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे। नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि लुंबनी के विकास के लिए आयोजित एशिया प्रशांत सहयोग एवं विनिमय प्रतिष्ठान की बैठक में भाग लेने कारण उन्हें चीन का पक्षधर कहा जा रहा है। लेकिन केवल बैठक में भाग लेने के कारण उन पर चीन समर्थक होने का ठप्पा लगाना गलत है। प्रचंड चीन के इस प्रतिष्ठान के दस सह अध्यक्षों में एक हैं। इस संगठन ने भारत-नेपाल सीमा पर स्थित भगवान गौतम बुद्ध की जन्म भूमि लुंबन को विकसित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन के साथ तीन अरब डॉलर की परियोजना पर हस्ताक्षर किया है। प्रचंड ने कहा कि नेपाल के प्रधानमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने भारत की कई परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की। अब अगर इस कारण उन्हें कोई भारत समर्थक करार दे तो यह भी गलत है। उनका कहना था कि भारत या चीन समर्थक होकर वह अपने देश के हितों के पक्षधर हैं।