Thursday, December 23, 2010

चीन से मांगी सफाई

कश्मीर को अलग बताए जाने पर भारत गंभीर

कश्मीर को भारत का हिस्सा स्वीकार नहीं करने की चीनी नीति के ताजा खुलासे पर दिल्ली ने प्रतिक्रिया भले ही न दी हो लेकिन इसे गंभीरता से लिया है। भारत ने कूटनीतिक चैनल के जरिए शिन्हुआ न्यूज एजेंसी के कश्मीर को अलग हिस्सा बताने पर बीजिंग से जवाब तलब कर लिया है। यह दो टूक पूछा गया है कि चीन की आधिकारिक एजेंसी से इस तरह की खबर को जारी करने में चीनी सरकार की सहमति थी या नहीं।
सूत्रों के अनुसार, बीजिंग में भारत के राजदूत एस जयशंकर ने विदेश मंत्रालय का यह संदेश कम्युनिस्ट शासकों को औपचारिक तरीके से दे दिया है। साउथ ब्लाक शिन्हुआ की इस खबर पर आपत्ति जताने से पहले बीजिंग से यह साफ कर लेना चाहता है कि सरहद विवाद छेड़ने में वहां की सरकार का हाथ है या नहीं। गौरतलब है कि शिन्हुआ ने भारत और चीन के बीच सीमा की लंबाई की जानकारी देने में तकरीबन 1500 किलोमीटर लंबे उस हिस्से को शामिल नहीं किया था जो कश्मीर में पड़ता है। बताया यह जा रहा था कि शिन्हुआ ने चीनी उप विदेश मंत्री की ब्रीफिंग के आधार पर यह जानकारी दी थी।
भारत यह जानना चाहता है कि इस तथ्य में कितनी सच्चाई है कि उप विदेश मंत्री की जानकारी के आधार पर शिन्हुआ ने यह खबर दी थी। अगर इसकी पुष्टि बीजिंग से होती है तो भारत चीन को आपत्ति पत्र देने की तैयारी करेगा। सूत्रों के अनुसार, भारत तब यह कहने की तैयारी में है कि जब सरहद विवाद पर चर्चा के लिए दोनों देशों के बीच पर्याप्त तंत्र विकसित किया गया है, जिसका जिक्र खुद प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने किया था, तो फिर इस तरह से जानकारी जारी करने का क्या औचित्य है।
एक अधिकारी ने कहा कि भारत और चीन की सरहद को लेकर विवादित जानकारी सार्वजनिक किया जाना तो शरारतपूर्ण कृत्य ही माना जाएगा। वह भी चीनी नेता जियाबाओ के ही सरहद विवाद सुलझाने के संबंध में सकारात्मक संकेत देने के बावजूद। यही वजह है कि भारत अब चीन से साफ कर लेना चाहता है कि सीमा विवाद सुलझाने की कोशिशों के बीच शिन्हुआ पर आई इस खबर को क्या माना जाए।

चीन में भारतीय राजदूत एस जयशंकर के जरिए विदेश मंत्रालय ने बीजिंग को भेजा संदेश
पूछा, शिन्हुआ एजेंसी पर जारी विवादास्पद खबर को चीन में किस स्तर तक थी सहमति
संतोषजनक जवाब नहीं आने पर दर्ज कराया जाएगा विरोध

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