Monday, December 20, 2010

चीन ने खड़ा किया सीमा पर विवाद

जम्मू कश्मीर से सटी सरहद को भारत की सीमा के तौर पर मान्यता से इनकार
न्यूज एजेंसी शिन्हुआ ने चीन-भारत सीमा को 1500 किमी कम बताया.
भारत और चीन के बीच मौजूदा सीमा विवाद सुलझाने के चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ के आश्वासन के खोखलेपन को बीजिंग ने ही उजागर कर दिया है। भारत और चीन के बीच सरहद की लंबाई को बीजिंग ने केवल 2000 किलोमीटर बताया है, जो आधिकारिक तौर पर भारत के रिकॉर्ड में 3600 किलोमीटर है। यानी उसने 1600 किलोमीटर सरहद के उस हिस्से को बाहर कर दिया है जो जम्मू-कश्मीर में पड़ता है। चीन सरकार की न्यूज एजेंसी शिन्हुआ में आई इस जानकारी से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनातनी बढ़ने का अंदेशा है।
चीनी न्यूज एजेंसी ने उप विदेश मंत्री हू चेंग्यू की ब्रीफिंग के संदर्भ में रिपोर्ट दी है कि भारत और चीन के बीच 2000 किलोमीटर लंबी सरहद है जो अभी आधिकारिक तौर पर चिह्नित नहीं है। इसमें से 1600 किमी को बाहर कर दिया गया है जो जम्मू कश्मीर को चीनी क्षेत्रों से अलग करता है। शिनजियांग और तिब्बत से सटी और चीन के दूसरे क्षेत्रों को अलग करने वाली 1600 किमी सीमा को चीनी सरकार मान्यता नहीं देती है। यही संदेश शिन्हुआ ने देने की कोशिश की है।
गौरतलब है कि जियाबाओ की भारत यात्रा से ठीक एक रोज पहले चीनी सरकार की एजेंसी शिन्हुआ ने भारत का क्षेत्रफल भी कुछ इस तरह दिखाया था कि इसमें से कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश के क्षेत्रफल को घटा हुआ था। इस तरह से दोनों सूबों को भारत के अखंड हिस्से के तौर पर मान्यता नहीं देने की चीन की नीति का ही खुलासा उसने किया था। वहीं भारतीय खेमा अभी इस पर प्रतिक्रिया देने से परहेज कर रहा है। मेदवेदेव की यात्रा पर ब्रीफिंग के दौरान जब विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विष्णु प्रकाश से पूछा गया तो उन्होंने इस सवाल को यह कहकर टाल दिया कि वह सिर्फ रूसी राष्ट्रपति की भारत यात्रा के संबंध में पूछ गए प्रश्नों का जवाब देंगे।

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